नयी दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान पुल बंगश इलाके में तीन लोगों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आग लगाए जाने के लगभग 39 साल बाद बुधवार को इस हत्याकांड मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को पांच अगस्त को तलब किया. अदालत ने कहा कि इस मामले में टाइटलर के खिलाफ ‘पर्याप्त सामग्री’ उपलब्ध है.
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विधि गुप्ता आनंद ने मामले में आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने के बाद बुधवार को आदेश पारित किया. अदालत ने कहा कि सीबीआई के लोक अभियोजक ने चश्मदीदों के बयानों पर भरोसा किया, जिन्होंने जांच के दौरान दावा किया कि उन्होंने आरोपी को उस स्थान पर देखा था, जहां घटना हुई थी.
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 मई को मामले में टाइटलर के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था. अदालत ने कहा कि लोक अभियोजक ने चश्मदीदों का हवाला देते हुए कहा है कि टाइटलर घातक हथियार वाली भीड़ का कथित तौर पर नेतृत्व कर रहे थे और उसे उकसा रहे थे. अभियोजक ने कहा कि मामले में आरोपी ने निषेधाज्ञा के तहत लागू प्रतिबंधों का खुलेआम उल्लंघन किया.
न्यायाधीश ने मामले में दाखिल तीसरे पूरक आरोप-पत्र पर संज्ञान लेते हुए कहा, ”चश्मदीदों के बयानों के साथ-साथ अन्य गवाहों के बयान, आईओ (जांच अधिकारी) द्वारा तैयार की गई मौका-ए-वारदात की रिपोर्ट और जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड पर लाई गई अन्य सामग्री पर गौर करने के बाद इस अदालत ने पाया कि मामले को आगे बढ़ाने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है.”
न्यायाधीश ने कहा, ”उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, आरोपी जगदीश टाइटलर को सुनवाई की अगली तारीख के लिए संबंधित आईओ के माध्यम से समन किया जाए.” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख पांच अगस्त तय की. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के एक दिन बाद एक नवंबर, 1984 को यहां पुल बंगश क्षेत्र में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी और एक गुरुद्वारे में आग लगा दी गई थी.
अदालत में दाखिल अपने आरोपपत्र में, सीबीआई ने दावा किया कि टाइटलर ने एक नवंबर, 1984 को आजाद मार्केट में पुल बंगश गुरुद्वारे पर इकट्ठा हुई भीड़ को ”उकसाया और भड़काया”, जिसके परिणामस्वरूप गुरुद्वारे में आग लगा दी गई और तीन सिखों- ठाकुर सिंह, बादल सिंह और गुरुचरण सिंह- की हत्या कर दी गई. सीबीआई ने कहा कि एजेंसी ने टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 148 (दंगा) और धारा 302 (हत्या) समेत अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं.
अदालत के आदेश के बाद वरिष्ठ वकील एच.एस. फुल्का ने पत्रकारों को बताया कि टाइटलर ने गवाहों को अतीत में धमकाया था और उन्हें अपनी गवाही बदलने के लिए मजबूर किया गया था. फुल्का पिछले चार दशकों से अदालतों में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
फुल्का ने कहा, ”यह एक ऐसा व्यक्ति है जो जेल में रहने का हकदार है. अगर वह बाहर है तो गवाहों पर दबाव बनाता रहेगा और धमकाता रहेगा. गवाह शुरुआत से ही उपलब्ध थे, लेकिन सीबीआई ने पहले उनके बयान दर्ज नहीं किए थे, जिससे उन्हें क्लीनचिट मिल गई. वह बहुत शक्तिशाली था. अब सीबीआई ने उन बयानों को दर्ज किया है.”
उन्होंने कहा कि वह अब दंगों में कथित संलिप्तता के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया, ”इसी तरह, कमलनाथ भी अपनी क्रूर राजनीतिक और धनशक्ति का इस्तेमाल करके कानून से बच रहे हैं.” उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ, उस समय गुरुद्वारा रकाबगंज में मौजूद थे, जहां दो सिखों को जिंदा जला दिया गया था.