शातिर चालों के बावजूद कानून के शिकंजे में आ गए हत्यारोपी

लखनऊ. राजधानी लखनऊ में हत्या की घटना को अंजाम देने के बाद शातिर आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने और उसके चंगुल से बचने के लिए तमाम चालें चलीं, मगर वे आखिर कानून के शिकंजे में आ ही गये. हत्या के एक मामले में आरोपियों ने शव को जला दिया, स्मार्टफोन की जगह कीपैड मोबाइल फोन इस्तेमाल किये, बार-बार सिम कार्ड बदले और पुलिस को चकमा देने के लिए अंदरूनी सड़कों से यात्रा की, लेकिन यही एहतियाती उपाय पुलिस के लिये सुराग बन गए और छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों की शातिर चालों की वजह से जांच की रफ्तार धीमी रही लेकिन हफ्तों की तहकीकात के बाद आरोपी आखिरकार पकड़े गये. यह मामला लखनऊ के रहने वाले कबीर उर्फ शिव प्रकाश (42) की हत्या से जुड़ा है. उसका गला घोंटकर हत्या की गई थी और उसके शव को जलाकर उन्नाव जिले में फेंक दिया गया था. पुलिस ने बताया कि हत्या लंबे समय से चल रहे संपत्ति विवाद के कारण हुई थी और यह मामला सबसे पहले 19 नवंबर को सामने आया था.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कबीर के 15 नवंबर से घर नहीं लौटने पर निगोहां थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी. बाद में उन्नाव के बीघापुर इलाके से आंशिक रूप से जला हुआ एक अज्ञात पुरुष का शव मिलने की जानकारी मिली थी. तस्वीरों और अन्य पहचान चिह्नों की जांच के बाद, पीड़ित के परिवार ने शव की पहचान कबीर के रूप में की. अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) रल्लापल्ली वसंत कुमार ने बताया कि जांचकर्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि आरोपियों ने जानबूझकर डिजिटल या भौतिक सुराग छोड़ने से परहेज किया था.

उन्होंने कहा, “आरोपियों ने स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि कीपैड फोन पर भरोसा किया. बार-बार सिम कार्ड बदले और मुख्य सड़कों और सीसीटीवी कैमरा की पहुंच वाले रास्तों से परहेज किया.” पुलिस के अनुसार, हत्या रायबरेली-लखनऊ राजमार्ग के किनारे स्थित जमीन के एक कीमती टुकड़े से जुड़े पुराने विवाद के कारण हुई थी.

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह जमीन मूल रूप से कबीर की मां के नाम पर थी जिसे कई बार बेचा गया था तथा कबीर ने इन सौदों को चुनौती देते हुए अदालत में मामला दायर किया था और व्यक्तिगत रूप से मामले की पैरवी कर रहा था. उनके मुताबिक, आरोपियों को लगा था कि अदालत उनके खिलाफ फैसला दे सकती है और उनके सामने एक बड़ी रकम वापस करने जैसी मुश्किल खड़ी हो सकती है.

पुलिस ने बताया कि 15 नवंबर को कबीर को कीपैड फोन से कॉल कर एक स्थान पर बुलाया गया था ताकि उसे शक न हो कि कोई और उससे संपर्क कर रहा है. इसमें दो कारों का इस्तेमाल किया गया था. जांच अधिकारियों के मुताबिक, जब कबीर मौके पर पहुंचा, तो उसे जबरदस्ती एक गाड़ी में बिठाया गया और सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए अंदरूनी ंिलक रोड से ले जाया गया. कार के अंदर उसका गला घोंट दिया गया, जिसके बाद आरोपी एक सुनसान जगह की तलाश में अलग-अलग जिलों में घूमते रहे.

पुलिस ने बताया कि आरोपी आखिरकार उन्नाव जिले के बीघापुर पहुंचे जहां शव को सड़क किनारे एक गड्ढे में फेंक दिया गया और पहचान छुपाने की कोशिश में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई. लौटते समय आरोपियों ने मोबाइल फोन और सिम कार्ड तोड़कर, उन्हें अनजान जगहों पर फेंककर सुबूत नष्ट कर दिये. पुलिस सूत्रों ने बताया कि विस्तृत जांच के बाद आठ दिसंबर को नागरम इलाके से सुजीत कुमार श्रीवास्तव, ंिपटू, विनोद, नीरज कश्यप और राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया. अपराध में इस्तेमाल की गई दो कारें भी बरामद की गईं.

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