सौर ऊर्जा से जगमगाया बस्तर का सवश्रेष्ठ पर्यटन गांव धुड़मारास

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 10 Jul 2025 07:18 PM
सौर ऊर्जा से जगमगाया बस्तर का सवश्रेष्ठ पर्यटन गांव धुड़मारास
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के एक गांव धुड़मारास ने पिछले वर्ष विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बनाने के बाद अब एक और उपलब्धि हासिल की है. यह गांव सौर ऊर्जा की मदद से जगमगा रहा है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के 20 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया जा चुका यह गांव अब पर्यावरणीय संरक्षण और सतत विकास का मॉडल बनकर उभरा है. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवनशैली से परिपूर्ण यह गांव, अब सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर है.

अधिकारियों ने बताया कि बस्तर अंचल में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ स्थानीय सुविधाओं का विकास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि धुड़मारास गांव में क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) ने सौर ऊर्जा आधारित विभिन्न परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर स्वच्छ पेयजल, रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की है.

राजधानी रायपुर से लगभग 350 किलोमीटर दूर स्थित धुड़मारास अपनी रोमांचक साहसिक गतिविधियों के लिए पर्यटकों को आर्किषत करता है. उन्होंने बताया कि क्रेडा के माध्यम से गांव में तीन सोलर ड्यूल पम्प की स्थापना कर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है तथा दो सोलर हाईमास्ट संयंत्र की स्थापना कर रात्रिकालीन प्रकाश की व्यवस्था की गई है. अधिकारियों ने बताया कि गांव की गलियों में सोलर पावर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं तथा प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है.

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस गांव में बिजली की लाइनें तो हैं, लेकिन बिजली कनेक्शन कुछ ही घरों में हैं तथा बिजली आपूर्ति असमान और अपर्याप्त है. अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने बस्तर जिले के धुड़मारास गांव और चित्रकोट गांव को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ गांव के रूप में पुरस्कृत किया है. उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से समृद्ध धुड़मारास गांव में कांगेर नदी की सुरम्य धारा, हरियाली, जैव विविधता और पारंपरिक बस्तरिया संस्कृति पर्यटकों को आर्किषत करती है.

उन्होंने बताया कि प्रशासन यहां ट्रैकिंग ट्रेल, कैंपिंग साइट और होम-स्टे की सुविधाएं विकसित कर रहा है, स्थानीय शिल्पकारों व कलाकारों को प्रोत्साहन देकर पारंपरिक हस्तशिल्प को बाजार से जोड़ा जा रहा है तथा सड़क एवं परिवहन सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि धुड़मारास गांव में ईको-पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बांस राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियां संचालित कर रही है, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर मिल रहे हैं. पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास भी किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का वन एवं पर्यटन विभाग धुड़मारास को ‘ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध कार्य कर रहा है जिसके चलते नागलसर और नेतानार जैसे गांवों में ईको पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है.

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