
नयी दिल्ली. बेंगलुरु के ऋण वसूली अधिकरण के वसूली अधिकारी ने उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया है कि न तो उद्योगपति विजय माल्या ने, और न ही फंड ट्रांसफर मामले के अन्य लाभार्थियों में से किसी ने 18 अगस्त तक वसूली अधिकारी के पास कोई राशि जमा कराई है.
शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई को माल्या को अदालत की अवमानना ??के लिए चार महीने जेल की सजा सुनाई थी और शराब कारोबारी माल्या एवं अन्य लाभार्थियों को चार करोड़ अमरीकी डालर से संबंधित उक्त लेनदेन के तहत प्राप्त राशि को आठ प्रतिशत प्रति वर्ष की बयाज दर के साथ चार सप्ताह के भीतर संबंधित वसूली अधिकारी के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया था.
पीठ ने भगोड़े व्यवसायी की भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए भी केंद्र को निर्देश दिया था, ताकि वह जेल की सजा काट सके. माल्या 2016 से ब्रिटेन में है. प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ भारतीय स्टेट बैंक की कंसोर्टियम वाले बैंकों के साथ 2016 में की गयी धोखाधड़ी के संदर्भ में केंद्र सरकार की रिपोर्ट पर भी विचार करेगी.
शीर्ष अदालत सोमवार को मामले में आगे के घटनाक्रम के बारे में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत पत्रों पर भी विचार कर सकती है. इससे पहले, 66 वर्षीय माल्या को सजा सुनाते हुए, पीठ ने कहा था कि शराब व्यवसायी ने अपने आचरण के लिए कभी कोई पछतावा नहीं दिखाया और न ही कोई माफी मांगी, ऐसे में कानून का महत्व बनाये रखने के लिए पर्याप्त सजा दी जानी चाहिए.
शीर्ष अदालत ने आदेश की अवहेलना करते हुए अपने बच्चों के नाम चार करोड़ अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित करने के लिए नौ मई 2017 को माल्या को अवमानना का दोषी ठहराया था. न्यायालय ने इस मामले में माल्या के खिलाफ 2,000 रुपये अर्थदंड भी लगाया था.
इसने कहा था कि यदि राशि जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित वसूली अधिकारी धन की वसूली के लिए उचित कार्यवाही करने का हकदार होगा, और भारत सरकार तथा अन्य सभी संबंधित एजेंसियां अधिकारी को ??सहायता और पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगी.
अदालत ने कहा था कि अगर तय समय के भीतर 2,000 रुपये का जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो माल्या को दो महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.



