दारेसलाम. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को तंजानिया स्थित राष्ट्रमंडल युद्ध स्मारक में उन भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिनका यहां अंतिम संस्कार किया गया था. जयशंकर जंजीबार की यात्रा के बाद बृहस्पतिवार को तंजानिया पहुंचे. भारत और तंजानिया के बीच पारंपरिक रूप से मित्रवत संबंध रहे हैं और विदेश मंत्री की इस यात्रा से दोनों देशों के संबंधों के और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है. तंजानिया यात्रा के दूसरे दिन जयशंकर ने भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की.
जयशंकर ने ट्वीट किया, ”दारेसलाम स्थित राष्ट्रमंडल युद्ध स्मारक जाकर आज भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की. युद्ध के विभिन्न मोर्चों पर उनका बलिदान हमारे इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वे भारत के वैश्विक प्रभाव की याद दिलाते हैं.” दारेसलाम इस समय तंजानिया की राजधानी है और पहले विश्व युद्ध के दौरान वह जर्मनी के पूर्वी अफ्रीकी उपनिवेश की राजधानी थी.
जनवरी 1917 में पूर्वी अफ्रीका में मारे गए 1500 से अधिक अधिकारियों और सैनिकों के नाम युद्ध स्मारक पर अंकित हैं. परिसर में ही एक हिंदू स्मारक भी है जो 14 भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया है. वहां हिंदू परंपराओं के अनुसार उनका दाह संस्कार किया गया था. जयशंकर ने भारत-तंजानिया संसदीय मित्रता समूह के सदस्यों से भी मुलाकात की और भारत के साथ मजबूत संसदीय, आर्थिक और लोगों से लोगों के बीच संपर्क की प्रशंसा की.
विदेश मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ”आज सुबह की शुरुआत भारत-तंजानिया संसदीय मित्रता समूह के सदस्यों से मुलाकात के साथ की. भारत के साथ मजबूत संसदीय, राजनीति, आर्थिक और लोगों के बीच संपर्क के प्रति उनकी गर्मजोशी की प्रशंसा करता हूं. भरोसा है कि हमारे दो संसदीय लोकतांत्रिक देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत संबंध आगे भी ऐसे ही बढ़ते रहेंगे.” जयशंकर ने किबाम्बा प्रशासनिक क्षेत्र स्थित भारतीय सहयोग से चल रही जल परियोजना का भी निरीक्षण किया जिससे दारेसलाम में जलापूर्ति होती है.
उन्होंने ट्वीट किया,”जल मंत्री जूमा अवेसो की साथ आने के लिए प्रशंसा करता हूं. भारतीय विशेषज्ञों, अहम अनुभव एवं बेहतरीन चलन हमारी विकास भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है.” जयशंकर ने कहा,”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने पर ध्यान केंद्रित किया जैसा हमारे जल जीवन मिशन में दिखता है और इसका प्रतिबिंब विदेश में भी दिखाई पड़ रहा है. अफ्रीका की प्राथमिकताओं पर काम कर रहे हैं और भारत अलग तरह का साझेदार है.”
जयशंकर ने बृहस्पतिवार को किदुथानी परियोजना का भी दौरा किया था जिसके जरिये जांजीबार के करीब 30 हजार घरों तक पेयजल आपूर्ति की जाएगी. यह भारत द्वारा स्थानीय आबादी को पेयजल मुहैया कराने के लिए शुरू की गई छह परियोजनाओं में से एक है. उन्होंने कहा कि यह भारत की ‘जल जीवन मिशन’ योजना की तरह है जिसका मकसद भारत के ग्रामीण इलाके में वर्ष 2024 तक सभी घरों को नल से जोड़ना और साफ एवं पर्याप्त जल की आपूर्ति करना है.
जयशंकर ने बाद में दारेसलाम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी स्थित इंडिया-तंजानिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया. उन्होंने ट्वीट किया, ” मंत्री एडोल्फ मकेंडा (तंजानिया के शिक्षा मंत्री) साथ आने के लिए धन्यवाद. अरुशा में परम सुपरकंप्यूटर है जो प्रतिभाशाली पीढ़ी को सशक्त कर रहा है. अफ्रीका को डिजिटल बनाने में हमारा योगदान आगे भी जारी रहेगा.” जयशंकर ने कहा, ”दारेसलाम के प्रसिद्ध मंदिर मार्ग पर चला और स्थानीय खुशबू को महसूस किया. यह तंजानिया की राजधानी में ‘लघु भारत’ है जो हमारे ऐतिहासिक संबंध और आधुनिक संपर्क को प्रतिबिंबित करता है.”
भारत ‘दोहन करने वाली अर्थव्यवस्था’ नहीं: जयशंकर
चीन पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत ”दोहन करने वाली अर्थव्यवस्था” नहीं है और यह संसाधन-समृद्ध अफ्रीका महाद्वीप में ”संकीर्ण आर्थिक गतिविधियां”नहीं कर रहा है. जांजीबार की यात्रा के बाद बृहस्पतिवार को यहां पहुंचे जयशंकर ने तंजानिया के दार अस सलाम शहर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की.
विदंश मंत्री ने ट्वीट किया, ”दार अस सलाम में भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ जीवंत संवाद हुआ. मिशन ‘आईटी’ (भारत और तंजानिया) की महत्ता पर जोर दिया. मजबूत भारत-अफ्रीका संबंध, विशेषकर पूर्वी अफ्रीका के साथ हमारे प्रगाढ. संबंधों पर प्रकाश डाला. भारत और तंजानिया के रिश्ते पारस्परिक हितों पर आधारित हैं.” भारतीय समुदाय के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”भारत और तंजानिया की मित्रता तंजानिया के नागरिकों के जीवन में बदलाव ला रही है. हमारी जल परियोजनाओं से 80 लाख लोगों को फायदा पहुंचेगा.” उन्होंने कहा कि तंजानिया प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भारत का सबसे बड़ा अफ्रीकी भागीदार है.
भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, ”आज हम अफ्रीका और इसकी अर्थव्यवस्था को प्रगति करते देखना चाहते हैं. आज अफ्रीका के प्रति हमारा दृष्टिकोण अफ्रीका के साथ अधिक व्यापार करना, अफ्रीका में निवेश करना, अफ्रीका के साथ काम करना, अफ्रीका में क्षमता को बढ.ाना है, ताकि अफ्रीका का भी उसी तरह उत्थान हो, जिस तरह भारत जैसे देश एशिया में बढ. रहे हैं.” अफ्रीका में चीनी मौजूदगी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ”हम यहां दोहन करने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में मौजूद नहीं हैं. हम यहां उस तरह से नहीं हैं जिस तरह बहुत से अन्य देश बहुत ही संकीर्ण आर्थिक उद्देश्यों के लिए यहां हैं. हमारे लिए, यह एक व्यापक और गहरी साझेदारी है.” एशिया-प्रशांत से परे अपनी सैन्य शक्ति को प्रर्दिशत करने की बीजिंग की योजना के हिस्से के रूप में चीन ने 2015 में अफ्रीका के जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य सहायता आधार स्थापित किया. चीनी कंपनियां भी कथित तौर पर अफ्रीका के बहुमूल्य खनिज संसाधनों के दोहन में लगी हुई हैं.
जयशंकर ने कहा, ”आज दुनिया, भारत को एक योगदानकर्ता के रूप में देखती है. दुनिया भारत, भारतीय कंपनियों, भारतीय प्रौद्योगिकियों, भारतीय क्षमताओं को उनके लिए बेहतर जीवन बनाने में मदद करने वाले के रूप में देखती है.” भाषा
शफीक पवनेश
पवनेश
0707 1558 दारअससलाम
जसजस
आवश्यक
.रायपुर प्रादे 66
छत्तीसगढ. मोदी बघेल