अमेरिका ने जानबूझकर खुद को बनाया अकेली ताकत : विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान, चीन को लेकर कही ये बात

Author: Navabharat News Group
UPDATED: Sun, 04 Oct 2026 06:18 PM
अमेरिका ने जानबूझकर खुद को बनाया अकेली ताकत : विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान, चीन को लेकर कही ये बात

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों पर बात की। एस जयशंकर ने कहा कि अमेरिका का बदला हुआ रुख और चीन का उभार आज के अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के दो मुख्य स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने विभिन्न देशों के पास मौजूद प्रभाव और साधनों के इस्तेमाल को भी एक नए रूप में ला दिया है।

म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए जयशंकर ने अमेरिका के “बड़े बदलाव वाले रुख” का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह उसकी अपनी पसंद का रुख है और एक तरह से अमेरिका “जानबूझकर खुद को अधिक अकेली शक्ति बना चुका है।”

अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा का दुनिया पर क्या पड़ा असर?
जयशंकर ने कहा, “आज के परिदृश्य की पहली प्रमुख विशेषता अमेरिका का अपने रुख में बड़ा बदलाव है। यह बदलाव उसकी पसंद का है और एक तरह से उसने जानबूझकर खुद को अधिक अकेली शक्ति बनाया है।” उन्होंने कहा कि दूसरी प्रमुख विशेषता चीन का उभार है। जयशंकर के अनुसार, चीन खुद को एक विशिष्ट देश के रूप में देखता है और वैश्विक स्तर पर दोनों के बीच काफी तीखी प्रतिस्पर्धा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, इसने “किसी भी देश के पास मौजूद किसी भी प्रभाव या साधन के इस्तेमाल को एक हथियार के रूप में बदल दिया है।” उन्होंने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा आपसी निर्भरता की जटिलता के साथ-साथ चल रही है।

उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग पर जोर

जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियों के बीच जहां उनके हितों का सीधा टकराव नहीं है, वहां वे आपसी सहयोग को मजबूत करने में रुचि रखती हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों का अमेरिका और चीन के साथ सहयोग करना भी स्वाभाविक है। उन्होंने इसके उदाहरण के तौर पर क्वाड का जिक्र किया। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और नॉर्दर्न सी रूट का जिक्र किया।

जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स भी इसका एक उदाहरण है, जहां विभिन्न पक्षों को लगता है कि उनकी सामूहिक आवाज अलग-अलग आवाजों की तुलना में अधिक प्रभावी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि इन दोनों पहलों की शुरुआत भारत ने की और वे सफल रही हैं।

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