
नयी दिल्ली/चंडीगढ़. कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस बयान को लेकर केंद्र सरकार पर रविवार को निशाना साधा कि उसका संसद के शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ पर प्रस्तावित विधेयक लाने का कोई इरादा नहीं है. पार्टी ने दावा किया कि यह बयान शासन के प्रति उसके “पहले घोषणा करो, फिर सोचो” वाले रवैये का एक और उदाहरण है.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कल ही आगामी शीतकालीन सत्र के लिए संसद बुलेटिन में चंडीगढ़ के लिए पूर्णकालिक उपराज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की बात कही गई थी. रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा कि कांग्रेस और पंजाब के अन्य दलों ने इसका तुरंत और आक्रामक तरीके से विरोध किया. पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय अब कह रहा है कि उसका शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करने का कोई इरादा नहीं है.
रमेश ने कहा, “यह शासन के प्रति मोदी सरकार के ‘पहले घोषणा करना, फिर सोचना’ वाले दृष्टिकोण का एक और उदाहरण है.” केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसका संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में चंडीगढ़ पर प्रस्तावित विधेयक लाने का कोई इरादा नहीं है, जिसका उद्देश्य केंद्र के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाना है. मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव का उद्देश्य चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्था को बदलना नहीं है. एक दिन पहले जारी लोकसभा और राज्यसभा बुलेटिन के अनुसार, केंद्र सरकार एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश करेगी.
विधेयक में चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के तहत शामिल करने का प्रावधान है, जिससे राष्ट्रपति को केंद्र-शासित प्रदेश के लिए सीधे नियम-कानून बनाने का अधिकार मिल सकेगा. इसे लेकर पंजाब के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए, सभी हितधारकों के साथ पर्याप्त परामर्श के बाद ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा. इस मामले में किसी भी चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है. केंद्र सरकार का संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इस संबंध में विधेयक पेश करने का कोई इरादा नहीं है.” गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “प्रस्ताव केवल केंद्र-शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए केंद्र सरकार के कानून बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने से संबंधित है और यह अब भी केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है. इस प्रस्ताव पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है.”
चंडीगढ़ पर केंद्र का कदम संघवाद पर हमला : कांग्रेस नेता सुरजेवाला
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविवार को चंडीगढ़ प्रशासन पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध करते हुए संविधान के अनुच्छेद 240 में संशोधन के कदम को ”संघवाद पर हमला” करार दिया. सुरजेवाला ने कहा कि यह प्रस्ताव ”चंडीगढ़ पर पूर्ण नियंत्रण करने की निरंकुश इच्छा” और हरियाणा तथा पंजाब के लोगों की भावनाओं की अनदेखी को दर्शाता है.
इस कदम पर पंजाब के राजनीतिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया आई है, जिसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप)और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई है. केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में चंडीगढ़ को शामिल करने के लिए एक विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में लाने की योजना बनाई है, जिसके तहत राष्ट्रपति को संघ शासित क्षेत्र के लिए सीधे विनियम और कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होता है. चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है.
केंद्र की ओर से इस संबंध में पेश विधेयक अगर पारित होता है तो चंडीगढ़ में एक स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा, जैसा कि पहले यहां स्वतंत्र मुख्य सचिव होता था. लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन के अनुसार, सरकार एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद सत्र में इस संबंध में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 पेश करेगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केंद्र के लिए ‘कानून निर्माण की प्रक्रिया को सरल’ बनाने वाले चंडीगढ़ संबंधी प्रस्तावित विधेयक को लाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है.
मंत्रालय ने साथ ही कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्थाओं को बदलना नहीं है.
सुरजेवाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”संविधान के अनुच्छेद 240 में बदलाव करने का भारत सरकार का कदम संघीय ढांचे को कमजोर करने की एक इरादतन साजिश है. यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत चंडीगढ़ को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी रखने के हरियाणा और पंजाब के अधिकारों पर भी सीधे-सीधे हमला है.” कांग्रेस नेता ने एक स्पष्ट ‘पैटर्न’ का जिक्र करते हुए कहा, ”सवाल यह है कि नरेन्द्र मोदी सरकार व भाजपा हरियाणा और पंजाब राज्यों के साथ दुश्मन जैसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं?” उन्होंने आरोप लगाया, ”भारत सरकार ने बदनीयत से भाखड़ा बांध पर पंजाब पुलिस को कब्जा करने देने और उसके द्वार बंद करने की इजाजत देकर और बांध पर हरियाणा के पानी के अधिकारों से छेड़छाड़ करके दोनों भाइयों, यानी हरियाणा और पंजाब के बीच फूट के बीज बोने का काम किया.”



