
नयी दिल्ली. देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. वहीं समूचे वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर विनिर्माण, खनन एवं निर्माण क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से 8.7 प्रतिशत पर रही. राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी. एक साल पहले जनवरी-मार्च 2021 की तिमाही में वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रही थी.
चौथी तिमाही में 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर वर्ष 2021-22 में सबसे कम रही है. पहली तिमाही में यह 20.1 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत रही थी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 के पूरे साल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही. इसके पहले कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 6.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी. एनएसओ के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी 147.36 लाख करोड़ रुपये हो गई जबकि एक साल पहले यह 135.58 लाख करोड़ रुपये रही थी.
हालांकि मार्च 2022 में समाप्त वित्त वर्ष का वृद्धि आंकड़ा एनएसओ के पूर्वानुमान से कम रहा है. एनएसओ ने अपने दूसरे अग्रिम अनुमान में इसके 8.9 प्रतिशत रहने की संभावना जताई थी. भारत की तुलना में चीन की अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च 2022 की तिमाही में 4.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. वित्त वर्ष 2021-22 में सकल मूल्य वर्द्धन (जीवीए) 8.1 प्रतिशत का दर से बढ़ा. इसके पहले वर्ष 2020-21 में जीवीए 4.8 प्रतिशत घट गया था.
विनिर्माण क्षेत्र में जीवीए वृद्धि 9.9 प्रतिशत रही जबकि एक साल पहले इसमें 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई थी. वहीं खनन एवं निर्माण दोनों ही क्षेत्रों में जीवीए 11.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा. इन दोनों ही क्षेत्रों में एक साल पहले संकुचन आया था. हालांकि देश की बड़ी आबादी से जुड़े कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर वर्ष 2021-22 में घटकर तीन प्रतिशत रह गई जो एक साल पहले 3.3 प्रतिशत पर थी.
बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य सेवा क्षेत्रों की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रही जो एक साल पहले 3.6 प्रतिशत की दर से घट गई थी.
आंकड़ों के अनुसार व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से संबंधित सेवाओं की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 में 11.1 प्रतिशत रही. एक साल पहले इन क्षेत्रों में 20.2 प्रतिशत का संकुचन आया था. वहीं वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवा खंड की वृद्धि दर एक साल पहले के 2.2 प्रतिशत की तुलना में 4.2 प्रतिशत पर रही. लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाओं ने 12.6 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की जो एक साल पहले 2020-21 में 5.5 प्रतिशत गिर गई थी.
एनएसओ ने कहा, “वर्ष 2011-12 के स्थिर मूल्य पर वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी 147.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि वर्ष 2020-21 के लिए पहला संशोधित अनुमान 135.58 लाख करोड़ रुपये का है.” इसके साथ ही वर्ष 2021-22 में वर्तमान मूल्य पर जीडीपी का आकार 236.65 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो एक साल पहले 198.01 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह मौजूदा मूल्य पर जीडीपी में 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में प्रति व्यक्ति आय मौजूदा मूल्य पर 18.3 प्रतिशत बढ़कर 1.5 लाख रुपये सालाना रही. एक साल पहले यह 1,26,855 रुपये थी. हालांकि स्थिर मूल्य पर प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 7.5 प्रतिशत बढ़कर 91,481 रुपये हो गई. एक साल पहले प्रति व्यक्ति आय 85,110 रुपये आंकी गई थी. वर्ष 2021-22 में सकल स्थिर पूंजी निर्माण के 47.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि एक साल पहले यह 41.31 लाख करोड़ रुपये रहा था.
भारत की प्रति व्यक्ति आय 2021-22 में कोविड से पहले के स्तर से नीचे
देश की वार्षिक प्रति व्यक्ति आय 2021-22 में स्थिर कीमतों पर 91,481 रुपये रही, जो कोविड से पहले के स्तर से नीचे है. मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली. हालांकि, स्थिर मूल्य पर शुद्ध राष्ट्रीय आय (एनएनआई) के आधार पर प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2021-22 में इससे पिछले वर्ष के मुकाबले 7.5 प्रतिशत बढ़ी.
कोविड-19 महामारी और उसके बाद लगाए गए लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित हुईं थीं. इस कारण स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2019-20 में 94,270 रुपये से घटकर 2020-21 में 85,110 रुपये रह गई. मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 18.3 प्रतिशत बढ़कर 1.5 लाख रुपये हो गई. मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 2020-21 में घटकर 1.27 लाख करोड़ रुपये पर आ गई थी जो 2019-20 में 1.32 लाख करोड़ रुपये थी.



