विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं हो वैश्विक न्यूनतम कर समझौता : सीतारमण

नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को जी-20 देशों से प्रस्तावित वैश्विक न्यूनतम कर समझौते से विकासशील देशों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते के ऐसे किसी भी अनचाहे परिणाम से रक्षा जरूरी है, जिसका विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष और समावेशी कर प्रणाली सुनिश्चित करने के लिये यह जरूरी है कि जी-20 के सभी सदस्य देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कर लगाने के प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने में सक्रिय रूप से भाग लें. उन्होंने कहा कि राजस्व के मामले में विकासशील देशों के लिये इस समझौते का परिणाम ‘सार्थक’ होना चाहिए.

भारत समेत 130 देशों ने पिछले साल जुलाई में वैश्विक कर नियमों में सुधारों पर सहमति जतायी थी. इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां न्यूनतम 15 प्रतिशत की दर से वहां कर दें, जहां वे काम कर रही हैं. उस समय वित्त मंत्रालय ने कहा था कि लाभ आवंटन में हिस्सेदारी और कर नियमों के दायरे सहित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान किया जाना बाकी है. प्रस्ताव के तकनीकी विवरण पर विचार-विमर्श के बाद एक ‘आम सहमति’ के आधार पर समझौता’ होगा.

प्रस्तावित समाधान में दो चीजें शामिल हैं…एक संबंधित बाजार क्षेत्र में लाभ के अतिरिक्त हिस्से का पुन: आवंटन और दूसरा न्यूनतम कर है, जो कर नियमों के अधीन है. उन्होंने इंडोनेशिया के बाली में कर और विकास विषय पर जी-20 मंत्री स्तरीय बैठक में कहा, ‘‘…ऐसे किसी भी अनचाहे परिणाम से रक्षा जरूरी है, जिसका विकासशील देशों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. हम निष्पक्ष, पारदर्शी, कुशल तथा प्रभावी वैश्विक कर प्रणाली के लिये वैश्विक सहयोग को मजबूत करने को लेकर निरंतर काम करेंगे, जो संसाधन जुटाने के विकासशील देशों के प्रयासों का समर्थन करता है और सशक्त बनाता है.’’

सीतारमण ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि विकासशील देश बातचीत में भी प्रभावी रूप से शामिल हों. संसाधनों की कमी और समावेशी समझौते पर चर्चा में भाग लेने की सीमित क्षमताओं को दूर करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकासशील देशों की जरूरतों और ंिचताओं को व्यक्त किया जा सके और उसे सुना जा सके. यह वास्तव में समावेशी ढांचा है.’’ सीतारमण ने समझौते के तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी का समर्थन करने के लिए जी-20 समावेशी व्यवस्था का आह्वान किया. उन्होंने कहा, ‘‘यह विकासशील देशों के लिये निष्पक्ष, भरोसेमंद और समावेशी कर प्रणाली सुनिश्चित करेगा. इसके परिणामस्वरूप ‘सार्थक राजस्व’ सुनिश्चित होगा.’’

सूचना के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था में क्रिप्टो जैसी संपत्ति भी शामिल हो

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि जी-20 को कर चोरी रोकने के लिये क्रिप्टो जैसे गैर-वित्तीय उत्पादों को सूचना के स्वत: आदान-प्रदान व्यवस्था के दायरे में लाने की व्यवहारिकता पर गौर करना चाहिए. सीतारमण ने इंडोनेशिया के बाली में कर और विकास पर जी-20 मंत्री स्तरीय संगोष्ठी में कहा कि हालांकि वित्तीय खातों के बारे में सूचना के स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था से जानकारी मिलती है, लेकिन जांच से पता चलता है कि कर चोरी करने वाले अक्सर अपनी बेहिसाबी संपत्ति छिपाने के लिये कई इकाइयां बनाते हैं.

उन्होंने कहा कि कर चोरी करने वाले ‘स्मार्ट’ हैं और गैर-वित्तीय संपत्तियों में निवेश के जरिये अपने बेहिसाबी संपत्ति को ठिकाने लगाने के लिये रास्ते तलाशते रहते हैं. सीतारमण ने कहा, ‘‘अभी जब क्रिप्टो संपत्ति की रिपोर्ट को लेकर व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया जारी है, मैं जी-20 देशों से कर चोरी रोकने के लिये क्रिप्टो जैसे गैर-वित्तीय उत्पादों को सूचना के स्वत: आदान-प्रदान व्यवस्था के दायरे में लाने की व्यवहार्यता पर गौर करने का आ’’ान करती हूं….’’ सीतारमण मनी लांंिड्रग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिये क्रिप्टो करेंसी के वैश्विक नियमन के लिये पुरजोर वकालत करती रही हैं.

उन्होंने कहा कि वित्तीय खातों के संदर्भ में सूचना के स्वत: आदान-प्रदान से कर पारर्दिशता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. सौ से अधिक देशों ने साझा रिपोर्टिंग मानदंडों (सीआरएस) के तहत वित्तीय खातों से जुड़ी सूचना के आदान-प्रदान की प्रतिबद्धता जतायी है.
वित्त मंत्री ने कहा कि कई अन्य देश जो इस रूपरेखा का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें इसके दायरे में लाया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उन क्षेत्रों को सूचना के स्वत: आदान-प्रदान का हिस्सा बनने को प्रोत्साहित करने में जी20 को भूमिका निभानी है.’’

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