सरकार ने जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी की गुगली डाली है : सचिन पायलट

नयी दिल्ली. देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने कहा है कि बिना किसी ठोस प्रस्ताव के इस पर बात करना ‘हवा में तीर चलाने’ जैसा है और सरकार ने जनता से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह ‘गुगली’ डाली है. पायलट ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में यह आरोप भी लगाया कि सरकार यूसीसी को लेकर अब तक कोई प्रस्ताव या खाका लेकर सामने नहीं आई है, लेकिन वह इसका राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल कर रही है.

उन्होंने यूसीसी पर छिड़ी बहस और इस पर कांग्रेस के रुख के बारे में पूछे जाने पर कहा, “समान नागरिक संहिता क्या है, क्या कोई विधेयक आया है, क्या कोई प्रस्ताव आया है, क्या कोई खाका तैयार किया गया है, पता ही नहीं है. यूसीसी के नाम पर अलग-अलग लोग, अलग-अलग दल, अलग-अलग धर्मगुरु अपनी राय दे रहे हैं.” राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने सवाल किया, “सरकार का प्रस्ताव क्या है, संसद की स्थाई समिति क्या बोल रही है, क्या संसद में कोई विधेयक आया है, यूसीसी की परिभाषा क्या है?” पायलट ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रस्ताव के यूसीसी पर बात करना ‘हवा में तीर चलाने’ जैसा है.

कांग्रेस नेता ने कहा, “इन्होंने (सरकार) एक गुगली डाल दी है, अब इस पर चर्चा करते रहिए, बहस करते रहिए. किसी प्रस्ताव के बारे में किसी को कुछ पता नहीं है.” पायलट ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर ध्यान भटकाने का काम करती है, ताकि महंगाई और जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर पर चर्चा नहीं हो.

उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं कि अगर किसी वंचित, चाहे वह पुरुष हो या महिला, को अधिकार देना है या मान-सम्मान देना है, संपत्ति का अधिकार देना है, सशक्त बनाना है, तो फिर किसे आपत्ति हो सकती है, लेकिन इसे लेकर कोई खाका ही नहीं है, सिर्फ राजनीतिक टूल का इस्तेमाल किया गया है.” यूसीसी विवाह, तलाक और उत्तराधिकार पर समान कानून लागू करने के लिए है. अमल में आने पर यह देश के सभी नागरिकों पर लागू होगा. धर्म, जाति, समुदाय या स्थानीय परंपराओं के आधार पर कानून में भेदभाव नहीं किया जाएगा. विधि आयोग ने यूसीसी पर लोगों से राय मांगी है.

पायलट ने मणिपुर को लेकर भाजपा नीत केंद्र की आलोचना की, कहा- स्थिति को बिगड़ने दिया गया
हिंसा प्रभावित मणिपुर में हालात से निपटने के तरीके को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि राज्य में स्थिति को ”बिगड़ने” दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पर ”वास्तविक” सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं कर रहे हैं. कांग्रेस नेता ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह राज्य पर शासन करने का नैतिक और राजनीतिक अधिकार खो चुके हैं.

पायलट ने कहा, ”मणिपुर जैसा छोटा राज्य जिसे सावधानी, सहानुभूति और करुणा के साथ संभाला जाना चाहिए था, वहां कोई जवाबदेही नहीं है. इसलिए इतने सारे लोगों ने अपनी जान गंवाई है.” उन्होंने कहा, ”सरकार ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है. कोई भी जिम्मेदार नहीं है, कोई भी इसमें शामिल नहीं है राज्य, सत्तारूढ़ दल, दिल्ली में कोई भी सवालों का जवाब नहीं दे रहा है.”

पायलट ने एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”राहुल गांधी लोगों से मिलने के लिए मणिपुर गए थे. यह एक प्रयास था. यह राजनीतिक लाभ लेने के इरादे से नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास था कि लोगों को यह महसूस हो कि धर्म के आधार पर बांटने और समाज को विभाजित करने के बावजूद भी ऐसे लोग हैं जो जख्मों को भरने, पीड़ा घटाने और चिंता साझा करने जाना चाहते हैं.” मणिपुर में दो महीनों में हिंसा में कई लोगों की मौत होने का जिक्र करते हुए पायलट ने कहा कि इसे लेकर कोई जवाबदेही नहीं है. उन्होंने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और यहां एक ऐसी सरकार है जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है.

पायलट ने कहा, ”क्या मणिपुर हमारे देश का हिस्सा नहीं है? जो नागरिक प्रभावित हुए हैं, उनकी गलती क्या है. मेरी चिंता यह है कि इसे (स्थिति को) बिगड़ने दिया गया है. मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री (एन बीरेन सिंह) ने राज्य पर शासन करने का राजनीतिक अधिकार, नैतिकता खो दी है.” उन्होंने कहा कि मणिपुर में नागरिक पीड़ा में हैं, लोग पलायन कर रहे, हत्याएं और क्रूरता हो रही है. पायलट ने कहा, ”दुर्भाग्य से, प्रधानमंत्री (मोदी) ने एक शब्द भी नहीं कहा. आप दिन भर जन्मदिन और उत्सवों के बारे में ट्वीट कर सकते हैं, लेकिन आप वास्तविक सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं कर रहे हैं?”

उन्होंने कहा, ”सरकार पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, दैनिक आधार पर हो रहे अत्याचारों के लिए कोई जवाब क्यों नहीं दे रहा है? यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही खत्म हो जाएगा.” कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह मणिपुर की दो दिवसीय यात्रा की थी और शांति की अपील करते हुए कहा था कि ”हिंसा कोई समाधान नहीं है.” कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य की मौजूदा स्थिति के लिए भाजपा और उसकी ‘विभाजनकारी राजनीति’ जिम्मेदार है. मणिपुर में तीन मई से अब तक हुई जातीय हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं.

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