हर गांव में तेज इंटरनेट उपलब्ध कराने पर काम कर रही है सरकार : मोदी

बेंगलुरु. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार हर गांव को तेज गति वाला इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिये काम कर रही है. उन्होंने वैश्विक निवेशकों से डिजिटल और प्रौद्योगिकी खंड में अवसरों का उपयोग करने और भारत में निवेश के लिए आगे आने को भी कहा. मोदी ने मौजूदा समय को प्रौद्योगिकी का युग करार दिया और महामारी के दौरान तकनीक के लाभ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेष में आगे और निवेश करना महत्वपूर्ण है.

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी कंपनी बॉश इंडिया के नये ‘स्मार्ट’ परिसर का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वृद्धि करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और पिछले दो साल में निवेश बढ़ा है. मोदी ने कहा, ‘‘आज हमारा स्टार्टअप परिवेश दुनिया में सबसे बड़ा है. इसका श्रेय युवाओं को जाता है. प्रौद्योगिकी दुनिया में वास्तव में कई अवसर हैं.’’ उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक गांव में उच्च गति का इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है.

मोदी ने कहा, ‘‘डिजिटल इंडिया के हमारे दृष्टिकोण में सरकार के हर पहलू के साथ प्रौद्योगिकी को एकीकृत करना शामिल है. मैं दुनिया से इन अवसरों का उपयोग करने और हमारे देश में निवेश करने का आग्रह करूंगा.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत और बॉश इंडिया दोनों के लिये विशेष वर्ष है. भारत आजादी के 75 साल मना रहा है जबकि बॉश भारत में अपनी मौजूदगी का शताब्दी समारोह मना रहा है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह नया स्मार्ट परिसर निश्चित रूप से भविष्य के उत्पाद और समाधान तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.’’ उन्होंने इस मौके पर अक्टूबर, 2015 में जर्मनी की तत्कालीन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ बॉश कारखाने की अपनी यात्रा को भी याद किया.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सौ साल पहले, बॉश जर्मनी की कंपनी के रूप में भारत आई और वह जितनी जर्मन है, उतना ही भारतीय. यह जर्मन इंजीनियंिरग और भारतीय ऊर्जा का बेजोड़ उदाहरण है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बॉश से भारत में और अधिक करने के बारे में सोचने और अगले 25 साल के लिये लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह करता हूं….’’ बॉश इंडिया ने बयान में कहा कि वह भारत में अपनी एआईओटी (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऑफ ंिथग्स) गतिविधियों का विस्तार कर रही है. इसके लिये वह अदुगोडी में अपने मुख्यालय को स्पार्क नामक एक नये स्मार्ट परिसर में बदल रही है, जिसे स्पार्क एनएक्सटी कहा जा रहा है.

कंपनी ने कहा कि पिछले पांच साल में कंपनी ने परिसर के विकास में 800 करोड़ रुपये का निवेश किया है. इसमें 10,000 कर्मचारी काम कर सकते हैं. बयान के अनुसार, यह 76 एकड़ में फैला भारत में बॉश का पहला स्मार्ट परिसर है. इसमें सहयोगियों, आगंतुकों के लिये पर्यावरण और सुरक्षा आधारित कई स्मार्ट समाधान हैं.

सरकार निर्यात बढ़ाने को लेकर एमएसएमई की मदद के लिये उठा रही है कदम: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार निर्यात बढ़ाने के लिये छोटे उद्यमों की मदद को हर कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही उनकी क्षमताओं के पूर्ण उपयोग को लेकर नई नीतियां बनायी जा रही हैं. मोदी ने यहां ‘उद्यमी भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश के निर्यात को बढ़ाने और उत्पादों को नये बाजारों तक पहुंचाने के लिये भारत के एमएसएमई क्षेत्र का मजबूत होना महत्वपूर्ण है. उन्होंने इस मौके पर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिये कई पहल की भी शुरुआत की.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार आपकी काबिलियत और अपार क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय कर रही है और नई नीतियां बना रही हैं.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जो कदम उठाये गये हैं और उठाये जा रहे हैं, उनका उद्देश्य एमएसएमई को बढ़ावा देना और गुणवत्ता बढ़ाना है. इस मौके पर उन्होंने एमएसएमई के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उसे गति देने के लिए 6,000 करोड़ रुपये की योजना ‘रैंप’ (रेंिजग एंड एक्सिलेरेंिटग एमएसएमई परफार्मेन्स) की शुरुआत की. साथ ही उन्होंने वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिये ‘पहली बार निर्यात करने वाले एमएसएमई निर्यातकों के क्षमता निर्माण (सीबीएफटीई)’ की योजना शुरू की.
इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में नई विशेषताओं की घोषणा की.

उन्होंने पीएमईजीपी लाभार्थियों को 2022-23 के लिये डिजिटल तरीके से सहायता का भी हस्तांतरण किया. साथ ही एमएसएमई आइडिया हैकॉथन, 2022 के परिणामों की घोषणा की और एमएसएमई पुरस्कार, 2022 वितरित किए. इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत कोष में 75 एमएसएमई को ‘डिजिटल इक्विटी’ प्रमाणपत्र भी दिये. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार निर्यात बढ़ाने के लिये एमएसएमई की मदद के लिये कदम उठा रही है. भारतीय दूतावासों को भी इस पर काम करने को कहा गया है.

उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर तबके के लिये उद्यमिता अपनाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बिना किसी गारंटी के कर्ज लेने को लेकर थी. वर्ष 2014 के बाद सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के साथ उद्यमशीलता का दायरा बढ़ाने का निर्णय किया गया है.

उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय के लिये उद्यमिता को सुगम बनाने में मुद्रा योजना को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बिना गारंटी के बैंक ऋण की इस योजना ने देश में महिला उद्यमियों, दलित, पिछड़े, आदिवासी उद्यमियों का एक बड़ा वर्ग तैयार किया है. इस योजना के तहत अबतक करीब 19 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया जा चुका है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कर्ज लेने वालों में करीब सात करोड़ ऐसे उद्यमी हैं, जिन्होंने पहली बार उद्यम शुरू किये हैं और नए उद्यमी बने हैं.’’ मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों को दिये गये 36 करोड़ रुपये कर्ज में से 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को दिये गये हैं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को 2014 के बाद नया रूप दिया गया था क्योंकि यह 2008-2012 के बीच की अवधि में अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाया. वर्ष 2014 से अबतक इस कार्यक्रम के तहत 40 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई हैं.
समावेशी विकास की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ट्रांसजेंडर’ उद्यमियों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि खादी और ग्रामोद्योग का कारोबार पहली बार एक लाख करोड़ रुपये के पार हो गया है. मोदी ने कहा, ‘‘यह इसलिए संभव हुआ है क्योंकि गांवों में हमारे छोटे उद्यमियों और हमारी बहनों ने बहुत मेहनत की है. खादी की बिक्री पिछले आठ साल में चार गुना बढ़ी है.’’ प्रधानमंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र को भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसी नीतियां बनाने के लिये प्रतिबद्ध है जो उनकी जरूरतों को पूरा करती हैं और उनके साथ सक्रिय रूप से चलती हैं.

छह हजार करोड़ रुपये की ‘रैंप’ (रेंिजग एंड एक्सिलेरेंिटग एमएसएमई परफॉर्मेन्स) योजना का उद्देश्य मौजूदा एमएसएमई योजनाओं के प्रभाव में वृद्धि के साथ राज्यों में छोटे उद्यमों की क्षमता और दायरे को बढ़ाना है. वहीं वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिये ‘पहली बार निर्यात करने वाले एमएसएमई निर्यातकों के क्षमता निर्माण (सीबीएफटीई)’ की योजना का मकसद छोटे उद्यमों को वैश्विक बाजार के लिये अंतरराष्ट्रीय मानकों के उत्पादों और सेवाओं की पेशकश को लेकर प्रोत्साहित करना है. इससे वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ेगी. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की नई विशेषताओं में विनिर्माण क्षेत्र के लिये अधिकतम परियोजना लागत 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करना शामिल है.

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