सरकार की नीतियों ने युवाओं को हताशा के गर्त में धकेला: कांग्रेस

सरकार का ध्यान छोटे कारोबार के बजाय बड़े कारोबारी समूहों पर केंद्रित: कांग्रेस

नयी दिल्ली. कांग्रेस ने सोमवार को बेरोजगारी के विषय को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में सरकार की नीतियों ने देश के युवाओं को सिर्फ और सिर्फ हताशा के गर्त में धकेला है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने केंद्र के सांख्यिकी विभाग की एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देकर यह दावा भी किया कि सप्ताह में एक घंटे के काम को भी रोजगार मानने वाली सरकार में उसके पैमाने के अनुसार केवल 51.7 फीसदी लोगों को ही काम मिला है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”बेरोजगारी कम करने के लिए मोदी सरकार का नया तरीका. अगर आप हफ्ते में सिर्फ एक घंटे भी काम करते हैं, तो सरकार आपको कामकाजी मान सकती है! मोदी सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने अपनी हालिया सर्वेक्षण रिपोर्ट इसी पैमाने पर तैयार की है.” उन्होंने दावा किया कि सरकार के लिए सबसे शर्मनाक बात यह है कि बेरोजगारी की परिभाषा को इतना ढीला करने के बावजूद केवल 51.7 फीसदी लोगों को ही काम मिला.

रमेश ने कहा, ”इसी सरकारी सर्वे में यह भी सामने आया कि आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है, शहरों में 70.5 प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले सिर्फ 23 प्रतिशत महिलाएं ही किसी भी आर्थिक गतिविधि में शामिल पाई गईं. यह तस्वीर दिखाती है कि हालात कितने गंभीर हैं. महंगी होती शिक्षा, घटते रोजगार के अवसर.” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार की नीतियों ने देश के युवाओं को सिर्फ और सिर्फ हताशा के गर्त में धकेला है और अब पूरी बेशर्मी से आंकड़ों की कारीगरी करके इस विकराल होती समस्या को ढकने की कोशिश की जा रही है.

सरकार का ध्यान छोटे कारोबार के बजाय बड़े कारोबारी समूहों पर केंद्रित: कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान छोटे एवं मझोले उद्यमों के बजाय बड़े कारोबारों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक लेख का हवाला देते हुए यह भी कहा कि बड़े व्यापारिक समूह और भी बड़े हो रहे हैं लेकिन इससे आर्थिक विकास में तेजी नहीं आ रही है.

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”प्रधानमंत्री और उनकी जयकारा मंडली द्वारा औद्योगिक विकास पर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहते हैं, लेकिन तीन तथ्य निर्विवाद हैं.” उन्होंने कहा कि पहला तथ्य यह है कि सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग की हिस्सेदारी घट रही है और इससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ी हैं तथा यह मुद्रास्फीति के मुख्य स्रोतों में से एक है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”दूसरा तथ्य यह है कि भारतीय कारोबार में ‘जी25’ के भीतर एक ‘जी5’ है जिसकी बढ़ती हिस्सेदारी शेष ‘जी20’ की कीमत पर आ रही है. तीसरा तथ्य यह है कि बड़े व्यापारिक समूह और भी बड़े हो रहे हैं लेकिन इससे आर्थिक विकास में तेजी नहीं आ रही है, जबकि वास्तव में, यह उल्टा हो सकता है.” रमेश ने दावा किया, ”सरकारों को छोटे और मध्यम कारोबार पर बड़ा दांव लगाना चाहिए. इसके बजाय, मोदी सरकार बड़े कारोबारों पर केंद्रित है.”

सरकार ने समानता वाले समाज का भ्रामक दावा किया, यह बौद्धिक बेईमानी : कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार ने विश्व बैंक की रिपोर्ट के आधार पर भ्रामक और दुष्प्रचार वाला दावा किया है कि भारत दुनिया में चौथा सबसे समानता वाला समाज बन गया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने जानबूझकर बौद्धिक बेईमानी की है, जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय समाज दुनिया का 40वां सबसे असमानता वाला समाज है. उनका यह भी कहना है कि पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) को संबंधित विज्ञप्ति वापस लेनी चाहिए.

सरकार ने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि भारत अब दुनिया के सबसे अधिक समानता वाले समाज में से एक बन गया है. अब भारत से ऊपर केवल स्लोवाक रिपब्लिक, स्लोवेनिया और बेलारूस हैं. रमेश ने एक बयान में कहा, ”आप क्रोनोलॉजी समझिए. अप्रैल, 2025 में विश्व बैंक ने भारत के लिए अपनी “पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ” जारी की. इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने एक बयान जारी कर उस रिपोर्ट में शामिल कई चेतावनी के संकेतों की ओर ध्यान दिलाया जिनमें यह भी शामिल था कि भारत में गरीबी और असमानता को लेकर सरकारी आंकड़े वास्तविक स्थिति से कम दिखाते हैं.”

उन्होंने कहा कि उस रिपोर्ट के जारी होने के तीन महीने बाद, बीती पांच जुलाई को मोदी सरकार की “जयकारा मंडली” और “प्रेस (मिस) इन्फॉर्मेशन ब्यूरो” (पीआईबी) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह चौंकाने वाला और ज.मीनी हकीकत से कटा हुआ दावा कर डाला कि भारतीय समाज दुनिया के सबसे समानता वाले समाजों में से एक है. कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अब यह सामने आया है कि मोदी सरकार न सिर्फ विश्व बैंक की रिपोर्ट के विश्लेषण में लापरवाह थी, बल्कि उसने जानबूझकर बौद्धिक बेईमानी भी की.

रमेश ने कहा, ”अपने निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए मोदी सरकार ने जानबूझकर दो अलग-अलग मापदंडों का इस्तेमाल किया- भारत के लिए ‘उपभोग आधारित असमानता’ और अन्य देशों के लिए ‘आय आधारित असमानता’.” उनका कहना है कि दो चीजों की तुलना करने के लिए जरूरी होता है कि उन्हें एक ही मानक से परखा जाए तथा यह केवल आर्थिक विश्लेषण का मूल सिद्धांत नहीं है, बल्कि सामान्य समझ की बात भी है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”भारत में ‘उपभोग आधारित असमानता’ को मापने का चुनाव भी पूरी तरह जानबूझकर किया गया. दरअसल, उपभोग आधारित असमानता हमेशा ‘आय आधारित असमानता’ से कम होती है, क्योंकि अमीर लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा बचा लेते हैं और खर्च नहीं करते.” रमेश ने कहा, ”जब हम भारत की आय आधारित समानता की तुलना दुनिया के बाकी देशों से करते हैं, तो भारत का प्रदर्शन बेहद खराब नजर आता है. 2019 में भारत 216 देशों में से 176वें स्थान पर था. दूसरे तरह से कहें तो भारतीय समाज दुनिया का चौथा सबसे समानता वाला समाज नहीं, बल्कि 40वां सबसे असमानता वाला समाज है.” उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी राज में पिछले कुछ वर्षों में भारत में आमदनी की असमानता और बढ़कर बदतर हुई है.

विशेष पुनरीक्षण की ‘जनविरोधी’ कवायद के खिलाफ संपूर्ण विपक्ष एकजुट: कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि बहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की ”जनविरोधी” कवायद के खिलाफ संपूर्ण विपक्ष एकजुट है और 10 विपक्षी दलों ने इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है. उच्चतम न्यायालय निर्वाचन आयोग के बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 जुलाई को सुनवाई करने के लिए सोमवार को राजी हो गया.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”आज, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 9 अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे त्रुटिपूर्ण और विनाशकारी विशेष गहन पुनरीक्षण को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी. यह एक ऐसा अभ्यास है जिसकी दुर्भावनापूर्ण और मनमानी प्रक्रिया के कारण भारी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की पूरी आशंका है.” उन्होंने कहा कि संपूर्ण विपक्ष इस जनविरोधी कवायद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा है.
खेड़ा का कहना था, ”इस मामले को सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार, 10 जुलाई, 2025 को सूचीबद्ध किया गया है. सत्यमेव जयते!”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button