
तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के इस बयान से राज्य में हिंदू संगठन नाराज हो गए हैं कि छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई नन किसी मानव तस्करी या जबरन धर्मांतरण के प्रयास में शामिल नहीं थीं.
केरल में प्रमुख हिंदू संगठन ‘हिंदू ऐक्य वेदी’ ने मंगलवार को धर्मांतरण का कड़ा विरोध करने का संकल्प जताया और कहा कि केवल उचित जांच से ही पता चलेगा कि नन की गतिविधियां मानव तस्करी या धर्मांतरण से संबंधित थीं. संगठन ने कहा, “पुलिस जांच पूरी होने से पहले ही आरोपियों को निर्दोष घोषित करना इस मामले की पीड़ित तीन लड़कियों के साथ अन्याय है.” ‘हिंदू ऐक्य वेदी’ के प्रदेश अध्यक्ष आर वी बाबू ने एक बयान में कहा कि संगठन “सेवा और प्रेम की आड़ में” हिंदुओं के धर्मांतरण के किसी भी प्रयास का “कड़ा विरोध” करेगा. उन्होंने इस मामले में भाजपा नीत छत्तीसगढ़ सरकार के रुख का समर्थन किया.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल में नन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए दावा किया था कि “नारायणपुर की तीन बेटियों को र्निसंग प्रशिक्षण और उसके बाद नौकरी का वादा किया गया था” और मानव तस्करी के माध्यम से उनका धर्म परिवर्तन करने का प्रयास किया गया था.
हालांकि भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने मंगलवार को साय के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि वे (नन) वहां धर्मांतरण के लिए नहीं गई हैं.” उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें रिहा कराने और सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी. चंद्रशेखर ने कहा कि पार्टी के प्रदेश महासचिव अनूप एंटनी अधिकारियों के साथ समन्वय के लिए पहले ही छत्तीसगढ़ पहुंच चुके हैं. चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि नन के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोपी बजरंग दल एक “स्वतंत्र संगठन” है और भाजपा का हिस्सा नहीं है.
विहिप ने छत्तीसगढ़ में नन की गिरफ्तारी पर कांग्रेस के विरोध की निंदा की
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में छत्तीसगढ़ में दो नन की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं की बुधवार को आलोचना की और आरोप लगाया कि सांसद कानून तोड़ने वालों को बचाने के लिए उनके साथ खड़े हैं.
केरल के कांग्रेस सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान लोकसभा में यह मुद्दा उठाया और दो नन की रिहाई के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की. उन्होंने उनकी गिरफ्तारी को ”बेहद परेशान करने वाला और चौंकाने वाला” बताया. रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के सदस्य एन के प्रेमचंद्रन और अन्य विपक्षी सांसदों ने भी गिरफ्तारी की निंदा करने में कांग्रेस का साथ दिया. उन्होंने दो नन की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया.
कांग्रेस की आलोचना करते हुए विहिप के राष्ट्रीय महासचिव सुरेन्द्र जैन ने कहा, ”जिस तरह से कांग्रेस-ईसाई तंत्र सक्रिय हो गया है और मानव तस्करी में शामिल दो नन और उनके साथी को कानून के चंगुल से छुड़ाने के लिए उनका बचाव कर रहा है, वह बेहद निंदनीय और चिंताजनक है.” उन्होंने कहा, ”छत्तीसगढ़ के नारायणगढ़ में तीन आदिवासी लड़कियों के साथ दो नन मिलीं. संदिग्ध गतिविधियों के चलते स्थानीय नागरिकों ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पुलिस को सूचना दी और दोनों नन को मानव तस्करी और अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया.”
उन्होंने आरोप लगाया, ”जब भी कोई चर्च गैरकानूनी गतिविधियों में पकड़ा जाता है, तो पूरा हिंदू-विरोधी तंत्र उनके पक्ष में खड़ा हो जाता है. राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल जैसे कांग्रेस नेता उनके साथ खड़े रहे हैं.” जैन ने आरोप लगाया कि केरल के कुछ सांसद और नेता मंगलवार को रायपुर गए थे ताकि छत्तीसगढ़ सरकार पर राज्य में अवैध धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोपियों की रिहाई के लिए दबाव बनाया जा सके.
उन्होंने कहा, ”सांसद कानून को अपना काम करने देने के बजाय, कानून तोड़ने वालों को बचाने के लिए उनके साथ खड़े हैं.” उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए एक सख्त कानून बनाए. बजरंग दल के एक पदाधिकारी की शिकायत पर नन प्रीति मेरी और वंदना फ्रांसिस तथा सुकमन मंडावी नामक एक व्यक्ति को 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था. बजरंग दल के पदाधिकारी ने उन पर नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और उनकी तस्करी करने का आरोप लगाया था.



