ब्रासीलिया/नयी दिल्ली/मोनरोविया. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत करने में समस्या भाषा नहीं है, बल्कि सभ्यता और शांति के लिए एक साझा दृष्टिकोण खोजने की जरूरत है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर पाकिस्तान देश में मौजूद हर आतंकवादी बुनियादी ढांचे के खिलाफ उल्लेखनीय कार्रवाई करता है, तो भारत उसके साथ बातचीत कर सकता है.
ब्राजील में एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थरूर ने यह भी कहा कि उनकी टीम ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के संदेश को लातिन अमेरिकी देशों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया, जिनमें वे देश भी शामिल हैं जिन्हें कुछ गलतफहमियां हो सकती हैं.
थरूर ने पीटीआई की वीडियो सेवा से कहा, ”हम अपने वार्ताकारों से यही कहते हैं कि अगर पाकिस्तान इतना ही निर्दोष है जितना वह दावा करता है, तो वह वांछित आतंकवादियों को पनाह क्यों देता है?… आखिर (आतंकवादी) वे (पाकिस्तान में) सुकून से रहने, प्रशिक्षण शिविर चलाने… और लोगों को कट्टरपंथी बनाने, हथियारों से लैस करने तथा लोगों को अपने हथियारों और कलाश्निकोव (राइफल) का अभ्यास करने के लिए प्रेरित कैसे कर पाते हैं…?” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत करने में समस्या भाषा नहीं है, बल्कि सभ्यता और शांति के लिए एक साझा दृष्टिकोण खोजने की जरूरत है.
थरूर ने कहा, ”आप आतंकवाद के बुनियादी ढांचे पर नकेल कसें जो आपके देश में हर जगह दिखाई देता है. फिर निश्चित रूप से हम बातचीत कर सकते हैं.” उन्होंने कहा, ”हम उनसे हिंदुस्तानी में बात कर सकते हैं. हम उनसे पंजाबी में बात कर सकते हैं. हम उनसे अंग्रेजी में बात कर सकते हैं. पाकिस्तान के साथ साझा आधार तलाशने में कोई समस्या नहीं है. समस्या सभ्यता और शांति के लिए साझा दृष्टिकोण तलाशने की है. हम शांति चाहते हैं, विकास करना चाहते हैं. वे हमें अकेला नहीं छोड़ना चाहते. वे हमें परेशान करना चाहते हैं. वे हमें कमजोर करना चाहते हैं.” थरूर ने कहा, ”वे भारत को हजारों जख्म देकर खत्म करना चाहते हैं. वे इतनी आसानी से खत्म नहीं कर पाएंगे. बेहतर होगा कि वे इस विचार को भूल जाएं.” ‘ब्रिक्स’, पांच अग्रणी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह है. ब्राजील 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच की मेजबानी कर रहा है.
इस प्रश्न पर कि क्या भारत को उम्मीद है कि ब्राजील भारतीय नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद के इस्तेमाल पर एक बयान जारी कर सकता है, थरूर ने कहा, ”ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि ब्रिक्स का एक अलग एजेंडा है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वे एकजुटता व्यक्त नहीं करना चाहते हैं…. मुझे नहीं पता और मुझे यह भी नहीं पता कि यह उस मसौदे में है या नहीं जिस पर वे पहले से काम कर रहे हैं”.
उन्होंने कहा, ”जहां तक अन्य मुद्दों का सवाल है, तो आप जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमारा ध्यान नहीं है. ईमानदारी से कहूं तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों और पाकिस्तान में आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने में उसकी पूरी तरह विफलता पर है.” इस सवाल पर कि क्या देश आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को मान्यता दे रहे हैं, थरूर ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल अब तक चार देशों – गुयाना, पनामा, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा कर चुका है और ”हम जिन देशों में गए हैं, वहां यह बात बहुत स्पष्ट रही है.”
उन्होंने कोलंबिया का जिक्र करते हुए कहा, ”और मैं कहूंगा कि सभी चार देशों में हमें बहुत स्पष्ट सफलता मिली है, अगर यही शब्द है, तो मैं सफलता का बखान करना पसंद नहीं करता. इसका फैसला दूसरों को करना है. लेकिन हमने अपना संदेश बहुत स्पष्ट रूप से पहुंचा दिया है, यहां तक ??कि उन तक भी जिन्हें कुछ गलतफहमी हो सकती है.” इससे पहले, थरूर ने कहा था कि कोलंबिया ने पहलगाम हमले के जवाब में भारत के सैन्य हमलों के बाद जानमाल के नुकसान पर पाकिस्तान के प्रति संवेदना व्यक्त करने वाला बयान वापस ले लिया है.
उन्होंने कहा, ”और अपना संदेश पहुंचाने के परिणामस्वरूप, मेरे विचार से, हम यह महसूस करते हुए वापस आ पाए हैं कि ये देश हमारी स्थिति को बेहतर ढंग से समझते हैं तथा आतंकवाद के खिलाफ हमारे संघर्ष के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हैं, जो हमारी यात्रा का मुख्य उद्देश्य है.” थरूर के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल ब्राजील से अमेरिका जाएगा.
वाशिंगटन डीसी की यात्रा से प्रतिनिधिमंडल की अपेक्षाओं के बारे में पूछे गए एक प्रश्न पर थरूर ने कहा, ”मेरी अपेक्षाएं हैं कि यह एक चुनौतीपूर्ण यात्रा होगी. हमारे समक्ष विभिन्न प्रकार के दर्शक होंगे.” उन्होंने कहा, ”चारों ओर फैली कुछ सूचनाओं को देखते हुए, हमें कुछ दिलचस्प और संभवत? चुनौतीपूर्ण प्रश्न मिले हैं, जिनका उत्तर देने में हमें बहुत खुशी होगी.” थरूर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील में गहन बैठकें कीं, जिससे ”हमें प्रसन्नता के लिए बहुत कुछ मिला – सरकार के उच्चतम स्तरों और विधायिका दोनों से, सभी स्तरों पर भारत के लिए एकजुटता और सद्भावना की पुष्टि हुई.” प्रतिनिधिमंडल ने भारत-ब्राजील मैत्री मोर्चे के अध्यक्ष और सीनेट की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष सीनेटर नेल्सिन्हो ट्रैड के साथ एक शानदार और अत्यधिक सार्थक बैठक की.
थरूर ने कहा, ”हाल की घटनाओं पर भारत के दृष्टिकोण की उनकी गहन समझ और मजबूत समर्थन के लिए मैं उनकी सराहना करता हूं. इस तरह की एकजुटता हमारे लोकतंत्रों, ब्राजील और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करती है.” प्रतिनिधिमंडल ने ब्राजील में भारत के नए राजदूत दिनेश भाटिया से भी मुलाकात की.
थरूर ने कहा, ”राजदूत द्वारा दिए गए भोज के दौरान मुझे दो प्रतिष्ठित अकादमिक दंपतियों से मिलकर बहुत खुशी हुई, जिन्होंने आधी सदी से भी अधिक समय से ब्राजील की राजधानी में भारत का झंडा बुलंद रखा है: प्रोफेसर विजयेंद्र कुमार और उनकी पत्नी देवी, जिन्होंने स्वयं ब्राजील के लोगों को हिंदी पढ़ाई है; और प्रोफेसर हरिदास तथा उनकी पत्नी पद्मजा, जो पलक्कड़ जिले से हैं और कोलेनगोड़े की यात्रा के दौरान मेरे पैतृक घर को देख चुके हैं!” उन्होंने कहा, ”प्रोफेसर कुमार ने बताया कि राजनयिकों के अलावा, ब्रासीलिया की 40 लाख की आबादी में केवल पांच भारतीय परिवार हैं, जिस पर मुझे विश्वास करना असंभव लगता है!”
आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर अमल करता है भारत: बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि भारत आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति का सख्ती से पालन करता है और सभी देशों को इस वैश्विक लड़ाई में एकजुट होना चाहिए. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आतंकवाद वैश्विक शांति, स्थिरता और मानवाधिकारों के लिए सबसे बड़ा खतरा है, ऐसे में इस खतरे को समाप्त करने के लिए सभी प्रगतिशील देशों को मिलकर संयुक्त रणनीति बनानी होगी.
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बिरला ने ये टिप्पणियां पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में वहां की असेंबली के अध्यक्ष जोस पेड्रो अगुइर-ब्रैंको के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कीं. इसके बाद बिरला ब्राजील पहुंचेंगे जहां वह 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक में भाग लेने वाले भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व करेंगे.
बिरला ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए कहा, “यह हमला भारत की प्रगति और सामाजिक सद्भाव में बाधा डालने के उद्देश्य से किया गया था. लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने अपने साहस, शौर्य और बुद्धिमत्ता से इन दुर्भावनापूर्ण इरादों को विफल कर दिया.” उन्होंने यह भी कहा “ऑपरेशन सिंदूर’ सैन्य अभियान के अंतर्गत भारत ने आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट कर इस खतरे का सफलतापूर्वक मुकाबला किया.
शिंदे नीत प्रतिनिधिमंडल की यात्रा, भारत-लाइबेरिया ने आतंकवाद मुक्त दुनिया बनाने का संकल्प लिया
शिवसेना सांसद श्रीकांत एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की लाइबेरिया यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई. इस दौरान, दोनों देशों ने शांतिपूर्ण, सुरक्षित और आतंकवाद-मुक्त दुनिया के निर्माण की दिशा में मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की.
शिंदे नीत प्रतिनिधिमंडल शनिवार को लाइबेरिया की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंचा था. यह प्रतिनिधिमंडल उन सात सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक है, जिन्हें भारत ने दुनिया के 33 देशों की राजधानी की यात्रा कर आतंकवाद से पाकिस्तान के संबंधों को उजागर करने का जिम्मा सौंपा है. प्रतिनिधिमंडल चार देशों (संयुक्त अरब अमीरात, कांगो गणराज्य, सियेरा लियोन, लाइबेरिया) की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव के तहत मोनरोविया में था.
मोनरोविया स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “इस यात्रा ने न केवल भारत और लाइबेरिया के बीच स्थायी दोस्ती पर प्रकाश डाला, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के साझा, अडिग रुख को भी उजागर किया. दोनों पक्षों के शांतिपूर्ण, सुरक्षित और आतंकवाद-मुक्त दुनिया को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के साथ यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई.” विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ भारत के कतई बर्दाश्त न करने के दृढ़ रुख को दोहराया.
इसमें बताया गया है कि प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को लाइबेरिया की सीनेट (संसद का उच्च सदन) और प्रतिनिधि सभा (संसद का निचला सदन) के सदस्यों से मुलाकात की. विज्ञप्ति के अनुसार, सीनेट की अस्थायी अध्यक्ष न्योनब्ली करंगा-लॉरेंस और प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष रिचर्ड नागबे कून ने “एकजुटता के संकेत के रूप में” सदस्यों के साथ पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों की याद में कुछ देर मौन रखा. इसमें कहा गया है, “करंगा-लॉरेंस ने शिंदे को सीनेट को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया. यह पहली बार है, जब किसी भारतीय सांसद को ऐसा करने का अवसर मिला.” विज्ञप्ति के मुताबिक, शिंदे ने अपने संबोधन में सीमापार आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख का जिक्र किया और इस वैश्विक खतरे से निपटने में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला.