कर्नाटक कांग्रेस ने हिंदुत्व की तुलना आरएसएस से करने पर मोहन भागवत की आलोचना की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 10 Nov 2025 10:32 PM
कर्नाटक कांग्रेस ने हिंदुत्व की तुलना आरएसएस से करने पर मोहन भागवत की आलोचना की
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मंगलूरू. कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और विधान परिषद के सदस्य मंजूनाथ भंडारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख के हाल के उस बयान की आलोचना की है जिसमें भागवत ने कहा था कि “हिंदू धर्म स्वयं में पंजीकृत नहीं है.” भंडारी ने कहा कि हिंदू धर्म और आरएसएस के बीच तुलना “भ्रामक और अस्वीकार्य” है.

यहां सोमवार को जारी एक बयान में भंडारी ने कहा कि हिंदू धर्म एक सभ्यतागत और सांस्कृतिक परंपरा है जिसका उद्भव हजारों वर्षों में हुआ है, जबकि आरएसएस एक ऐसा संगठन है जो एक शताब्दी से भी कम समय में बना है. उन्होंने कहा कि इन दोनों को समान मानना, हिंदू विचार और व्यवस्था के तत्व और निरंतरता को कमजोर करना है.

भंडारी ने कहा कि हिंदू धर्म एक संरचित या संहिताबद्ध संस्था नहीं है, बल्कि सामूहिक ज्ञान, आध्यात्मिक परंपराओं और पीढि.यों के बाद सांस्कृतिक विकास के जरिए आकार लिए जीवन जीने का एक तरीका है और यह मूल रूप से इसी भूमि पर विकसित हुआ है और इसकी वैधता के लिए सत्यापन या पंजीकरण की जरूरत नहीं है.

भंडारी ने हिंदू धर्म को स्वभाव में वैश्विक और समावेशी बताया और कहा कि हिंदू धर्म उन सभी का है जो इसे जीते और व्यवहार में लाते हैं, जबकि आरएसएस की विचारधारा केवल उन्हीं लोगों पर लागू होती है जो इसके सैद्धांतिक ढांचे को स्वीकार करते हैं.
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से तीन मौकों पर आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया गया था और संवैधानिक जवाबदेही के अधीन हुए बिना यह राजनीति, शासन, शिक्षा और धार्मिक चर्चाओं को निरंतर प्रभावित करता रहा है.

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