कर्नाटक सरकार की रिपोर्ट में भगदड़ के लिए RCB, DNA नेटवर्क और KSCA को जिम्मेदार बताया गया

सरकार ने न्यायालय में कहा, पुलिस अधिकारियों ने 'आरसीबी के नौकरों' की तरह काम किया

बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में भगदड़ मचने से संबंधित मामले में पेश की गई स्थिति रिपोर्ट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी), कार्यक्रम के आयोजक मेसर्स डीएनए नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड और राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) पर पूर्व अनुमति के बगैर और शहर के अधिकारियों को अनिवार्य विवरण दिए बिना आरसीबी की विशाल विजय परेड निकालने का आरोप लगाया है.

चार जून को भगदड़ की घटना में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 33 अन्य घायल हो गये थे. रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंप दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में आरसीबी और पंजाब किंग्स (पीबीकेएस) के बीच आईपीएल के खिताबी मुकाबले से कुछ घंटे पहले, शाम लगभग 6:30 बजे, डीएनए नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की ओर से केएससीए ने कब्बन पार्क थाने को एक सूचना पत्र सौंपा.
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना पत्र में कहा गया, ”अगर आरसीबी टूर्नामेंट में विजयी होती है, तो आरसीबी/डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड का प्रबंधन एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास संभावित विजय परेड की योजना बनाना चाहता है, जिसका समापन स्टेडियम में विजय उत्सव के साथ होगा.” रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक सूचना मात्र थी और कानून के तहत अनुमति नहीं मांगी गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने, हालांकि अनुमानित भीड़ और कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के अभाव में अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसमें कहा गया है कि यह प्रस्ताव भी अल्प सूचना पर प्रस्तुत किया गया था, जिसके कारण उचित कार्यवाही नहीं हो सकी.
इसमें कहा गया है कि इसके बावजूद, आरसीबी ने चार जून को एकतरफा कार्यवाही करते हुए, सुबह 7:01 बजे से विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से विधान सौध से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक सार्वजनिक ‘विजय परेड’ निकालने की घोषणा कर दी.
रिपोर्ट के अनुसार, अपराह्न 3:14 बजे अंतिम पोस्ट में घोषणा की गई कि परेड शाम पांच बजे शुरू होगी और उसके बाद स्टेडियम में समारोह आयोजित किया जाएगा.

इसमें कहा गया है कि इस पोस्ट में पहली बार यह बताया गया था कि नि:शुल्क पास ऑनलाइन उपलब्ध हैं, हालांकि इस पोस्ट से पहले ही भारी संख्या में लोग एकत्र होने लगे थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट को लाखों लोगों ने देखा. इसके मुताबिक, बीएमआरसीएल के यात्रियों से संबंधित आंकड़ों से भीड़ जुटने की बात साबित होती है. रिपोर्ट में बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि चार जून को 9.66 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि आमतौर पर रोजाना यह संख्या छह लाख रहती है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ”इसलिए, चार जून को पैदल यात्रा करने वाले, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले और निजी साधनों के उपयोगकर्ताओं को मिलाकर, अनुमानित संख्या तीन लाख से अधिक हो गई.” रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि आयोजकों ने निर्दष्टि प्रारूप में कानून के अनुसार कभी भी औपचारिक रूप से पुलिस से अनुमति नहीं मांगी. इसमें स्पष्ट किया गया है कि विशेष रूप से मध्य बेंगलुरु में बड़े सार्वजनिक समारोहों वाले आयोजनों के लिए केवल सूचना देना अनुमति मांगने के समान नहीं है.

अधिकारियों ने दावा किया कि प्रतिभागियों की संख्या, कार्यक्रम स्थल, समय, आयोजकों के नाम, संपर्क विवरण, और यातायात व भीड़ नियंत्रण की योजनाएं जैसी जरूरी जानकारियां नहीं दी गईं. उन्होंने कहा कि इस जानकारी के अभाव के कारण पुलिस आयोजन के पैमाने का आकलन नहीं कर सकी और न ही पर्याप्त सुरक्षा उपाय कर पाई.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा, जनता को निर्देश देने के लिए कोई ‘साइनबोर्ड’ या लाउडस्पीकर नहीं थे, प्रवेश द्वारों और बैठने की जगहों पर भीड़ के प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं थे, और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल या पुलिस बंदोबस्त के लिए कोई पूर्व अनुरोध भी नहीं किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार आयोजकों ने 22 मई, 2019 के सरकारी आदेश के अनुसार पुलिस तैनाती के लिए भुगतान भी नहीं किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि समन्वय या अनुमोदन के अभाव के बावजूद, बेंगलुरु शहर पुलिस ने जमीनी स्तर पर स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए.

इसके अनुसार चार जून को सुबह 10 बजे संयुक्त पुलिस आयुक्त के कार्यालय में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें यातायात और कानून प्रवर्तन योजना को अंतिम रूप दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक कुल 654 यातायात र्किमयों को तैनात किया गया, जिनमें चार डीसीपी, छह एसीपी, 23 पुलिस निरीक्षक, 57 पुलिस उपनिरीक्षक, 104 सहायक उपनिरीक्षक और 462 कांस्टेबल शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि एचएएल से ताज वेस्ट एंड, विधान सौध और अंत में चिन्नास्वामी स्टेडियम तक व्यवधान को कम करने के लिए आरसीबी टीम के मार्ग को नियंत्रित किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार प्रेस, सोशल मीडिया और एफएम रेडियो के माध्यम से यातायात परामर्श और मानचित्र जारी किया गया, जिसमें लोगों को सीमित पार्किंग के कारण मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक एहतियात के तौर पर नौ ‘डायवर्जन पॉइंट’ बनाए गए और 125 ‘बैरिकेड’ लगाए गए, साथ ही 11 अतिरिक्त ‘बैरिकेडिंग जोन’ भी बनाए गए. स्थानीय स्कूलों को दोपहर तक बंद कर देने का अनुरोध किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘बीएमटीसी’ ने अपनी सारथी टीमें तैनात कीं और एम्बुलेंस प्रबंधन के लिए ई-पथ ऐप सक्रिय किया गया. इसके अलावा एक विशिष्ट नियंत्रण कक्ष ने पूरे कार्यक्रम के दौरान यातायात की गतिविधियों पर नजर रखी जबकि आठ प्रमुख सेक्टर की पहचान की गई जहां भीड़ के नियंत्रण व प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरसीबी, डीएनए नेटवर्क्स और केएससीए ने मानक प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की, जिसके परिणामस्वरूप उल्लंघन व संभावित सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम पैदा हुए. रिपोर्ट के अनुसार समय से पहले अनुमति नहीं लेने और अधिकारियों के साथ समन्वय नहीं करने के कारण नगर प्रशासन के पास उस घटना के दौरान कोई विकल्प नहीं बचा. रिपोर्ट में कहा गया है, “कानून प्रवर्तन के प्रति जवाबदेही की आवश्यकता को समझते हुए सरकार ने पांच जून, 2025 को पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की.” इसके अनुसार एक सरकारी आदेश के तहत पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.

कर्नाटक सरकार ने उच्च न्यायालय में कहा, पुलिस अधिकारियों ने ‘आरसीबी के नौकरों’ की तरह काम किया

कर्नाटक सरकार ने आईपीएस अधिकारी विकास कुमार विकास के निलंबन को उच्च न्यायालय में उचित ठहराते हुए बृहस्पतिवार को दलील दी कि पुलिस अधिकारी और उनके सहर्किमयों ने आईपीएल जीत के जश्न की तैयारियों के दौरान ”आरसीबी के नौकरों” की तरह काम किया.

राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी एस राजगोपाल ने अदालत को बताया कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का फाइनल मैच खेले जाने से पहले ही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने अपनी जीत के जश्न के संबंध में पुलिस अधिकारियों को एक प्रस्ताव सौंपा था. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति वाले आयोजन के लिए अनुमति लेने के बजाय, अधिकारियों ने अपने वरिष्ठों से परामर्श किए बिना या आवश्यक अनुमति की पुष्टि किए बिना ही सुरक्षा इंतजाम शुरू कर दिए.

राजगोपाल ने कहा, ”आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी की ओर से सबसे स्पष्ट प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए थी: आपने अनुमति नहीं ली है.” उन्होंने कहा, ”तब, आरसीबी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता और कानून अपना काम करता.” उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी से काम न करने की इस विफलता के कारण संचालन संबंधी खामियां और कर्तव्य की गंभीर अवहेलना हुई.
यह दलील देते हुए कि 12 घंटे से कम समय में भारी भीड़ के लिए व्यवस्था करना अव्यावहारिक था, राजगोपाल ने सवाल किया कि निलंबित अधिकारी ने उस दौरान क्या कदम उठाए थे.

उन्होंने कर्नाटक राज्य पुलिस अधिनियम की धारा 35 का हवाला दिया, जो पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार देती है तथा अधिकारियों द्वारा उस अधिकार का उपयोग न करने की आलोचना की. राजगोपाल ने कहा कि वरिष्ठ स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया था.

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