केरल के कैथोलिक चर्च ने दो नन की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा की तीखी आलोचना की

छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी कानून का घोर दुरुपयोग : माकपा सांसद ब्रिटास

तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली/कोच्चि. केरल में कैथोलिक चर्च ने छत्तीसगढ़ में राज्य की दो नन की हालिया गिरफ्तारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघ परिवार की सोमवार को तीखी आलोचना की और आरोप लगाया कि सिर्फ नन को ही नहीं, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान को ही बंधक बना लिया गया है.

चर्च ने अपने मुखपत्र ‘दीपिका डेली’ में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा कि देश को हिंदुत्व राष्ट्र के तौर पर परिभाषित किया जा रहा है और यह सब केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की शह से हो रहा है. संपादकीय में कहा गया है, ”इसे रोकने वाला कोई नहीं है.” लेख में कहा गया है, ”जो देश स्थापित किया जा रहा है, वह न्याय, निष्पक्षता या संवैधानिक मूल्यों से संचालित नहीं है, बल्कि यह भाजपा सरकार के आशीर्वाद से, पक्षपाती कानूनी ढांचे की सीमाओं में और अल्पसंख्यकों के नाम पर सौदेबाजी करने वाले संगठनों की मिलीभगत से तैयार हो रहा है.” संपादकीय में कहा गया है, ”साम्प्रदायिक ताकतों ने सिर्फ दो नन को ही नहीं, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ढांचे को बंधक बना लिया है.” चर्च द्वारा संचालित दैनिक अखबार के अनुसार, केरल को छोड़कर पूरे देश में अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित महसूस करते हैं और अगर भाजपा चाहे तो सांप्रदायिकता को नियंत्रित कर सकती है.

संपादकीय में भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा गया है, ”हिंदुओं, ईसाइयों और मुसलमानों समेत धर्मनिरपेक्ष समुदाय छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नन को आरोप पत्र जारी किए जाने जबकि केरल में प्रशंसा पत्र जारी करने के पीछे की राजनीति से अच्छी तरह वाकिफ है.” संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि वैध दस्तावेजों के बावजूद छत्तीसगढ़ पुलिस ने सांप्रदायिक ताकतों के इशारे पर दो नन को गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस दक्षिणी राज्य में कांग्रेस ने भी छत्तीसगढ़ में पुलिस द्वारा दो कैथोलिक नन की कथित गिरफ्तारी पर भाजपा और संघ परिवार की तीखी आलोचना की.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव केसी वेणुगोपाल और विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीसन ने रविवार को इसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले का नवीनतम उदाहरण बताया. मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, केरल की दो नन को हाल ही में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में छत्तीसगढ़ के एक रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था. इस बीच, गिरफ्तार नन में से एक के परिवार ने सोमवार को उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की.

छत्तीसगढ़ में ननों की गिरफ्तारी कानून का घोर दुरुपयोग : माकपा सांसद ब्रिटास

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने सोमवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग में केरल की दो ननों की गिरफ्तारी ‘कानून का घोर दुरुपयोग है और उन्होंने दोनों ननों को रिहा करने की मांग की. ब्रिटास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में ननों की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने 25 जुलाई की सुबह दुर्ग रेलवे स्टेशन से राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) द्वारा केरल की दो कैथोलिक ननों – सिस्टर वंदना फ्रांसिस और सिस्टर प्रीति – की गिरफ्तारी और मानव तस्करी तथा जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों में उनकी न्यायिक हिरासत पर तत्काल हस्तक्षेप करने की छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई से मांग की. ब्रिटास ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को लिखा एक पत्र भी ‘एक्स’ पर साझा किया.

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”केरल की ननों सिस्टर वंदना फ्रांसिस और सिस्टर प्रीति की दुर्ग में निराधार आरोपों में गिरफ्तारी शर्मनाक है. यह अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए कानून का घोर दुरुपयोग है. ननों को रिहा करें और समाज की सेवा करने वालों के खिलाफ नफरत का अभियान बंद करें!” छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को 27 जुलाई को लिखे पत्र में ब्रिटास ने कहा कि नवीनतम खबरों से संकेत मिलता है कि अधिकारियों ने एक प्राथमिकी दर्ज कर ली है और दोनों ननों सहित तीन वयस्कों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

उन्होंने इसे चौंकाने वाला घटनाक्रम बताया और कहा कि यह ”तुच्छ और सांप्रदायिक आरोपों के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति” को दर्शाता है. माकपा सांसद ने कहा, ”इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उन लोगों की अपने परिवारों से कोई बातचीत नहीं हुई.” उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर केरल और पूरे देश में गहरी पीड़ा है. उन्होंने शिकायत की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई को प्रभावित करने में दक्षिणपंथी समूहों की भूमिका की ‘स्वतंत्र जांच’ की भी मांग की.

राहुल गांधी, यूडीएफ सांसदों ने छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार दो ननों की तत्काल रिहाई की मांग की

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को दावा किया कि छत्तीसगढ़ में दो ननों को उनकी आस्था के चलते गिरफ्तार किया गया है. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जिन जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां अल्पसंख्यकों का ‘सुनियोजित तरीके से उत्पीड़न’ किया जा रहा है.

धार्मिक स्वतंत्रता को संवैधानिक अधिकार बताते हुए गांधी ने दोनों ननों की तत्काल रिहाई और उनके खिलाफ हुए कथित अन्याय के लिए जवाबदेही तय किए जाने की मांग की. छत्तीसगढ़ के दुर्ग में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल समेत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की. दोनों नन केरल की रहने वाली हैं.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कथित मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में दो ननों सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. एक सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी थी. अधिकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई बजरंग दल के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ये तीनों व्यक्ति नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और तस्करी कर रहे थे.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया ”छत्तीसगढ़ में दो ननों को उनकी आस्था के लिए निशाना बनाने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. यह न्याय नहीं है बल्कि यह भाजपा-आरएसएस का भीड़ नियम है. यह एक खतरनाक चल का परिचायक है , यह इस शासन के तहत सुनियोजित तरीके से उत्पीड़न है.” लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा ”यूडीएफ सांसदों ने आज संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. हम चुप नहीं रहेंगे. धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है. हम दोनों नन की तत्काल रिहाई और इस अन्याय के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं.” संसद परिसर में, कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल, आरएसपी के एन. के. प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल के ई. टी. मोहम्मद बशीर सहित यूडीएफ सांसदों ने संसद भवन परिसर के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन किया. इस दौरान वे पोस्टर लिए हुए थे जिन पर ‘अल्पसंख्यकों पर हमले बंद करो’ लिखा था. विरोध प्रदर्शन कर रहे सांसदों ने ननों की गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “यूडीएफ सांसदों ने दुर्ग (छत्तीसगढ़) में कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न के खिलाफ आज संसद के बाहर प्रदर्शन किया. इन निर्दोष महिलाओं ने कुछ भी गलत नहीं किया लेकिन फिर भी हिंसक भीड़ ने उन्हें निशाना बनाया.” उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा-आरएसएस के परिवेशी तंत्र के तहत सभी अल्पसंख्यकों को अपराधी समझा जाता है और असामाजिक तत्वों को उनकी आस्था का पालन कर रहे नागरिकों को डराने के लिए छोड़ दिया जाता है. छत्तीसगढ़ में बजरंग दल के गुंडों और पुलिस के बीच की यह जुगलबंदी भाजपा की धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति वास्तविक मंशा को दर्शाती है.” कांग्रेस नेता ने कहा कि वे ननों की तत्काल रिहाई और उनके लिए न्याय की मांग करते हैं.

इससे पहले रविवार को कांग्रेस की केरल इकाई ने भी इस घटना को लेकर भाजपा और संघ परिवार की तीखी आलोचना की थी.
वेणुगोपाल और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीसन ने इसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमलों का एक और उदाहरण बताया.

एक अन्य पोस्ट में वेणुगोपाल ने लिखा, “छत्तीसगढ़, ओडिशा या मध्य प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है. दुर्ग की घटना शासन व्यवस्था की ओर से ऐसे अपराधों के लिए परोक्ष समर्थन का संकेत देती है.” उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि संविधान को बनाए रखने की तत्काल जरूरत है ताकि अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके.

सीबीसीआई ने अल्पसंख्यकों के प्रति ‘ द्वेष के माहौल’ पर दुख व्यक्त किया
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने हाल में छत्तीसगढ़ में केरल की दो नन की गिरफ्तारी को रेखांकित करते हुए सोमवार को देश में अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति व्याप्त ”शत्रुता और हिंसा” के माहौल पर ”गहरी पीड़ा और चिंता” व्यक्त की.

आर्चबिशप ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चेतावनी दी कि संवैधानिक राज्य का विघटन और भारतीय लोकतंत्र की स्वतंत्र संस्थाओं का सांप्रदायीकरण इतना गंभीर है कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
आर्चबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कॉउटो ने संवाददाता सम्मेलन में सीबीसीआई के बयान को पढ़ते हुए कहा, ”कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया देश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते द्वेष और हिंसा के माहौल पर अपनी गहरी पीड़ा और चिंता व्यक्त करता है.”

उन्होंने कहा, ”सांप्रदायिक तत्वों के बढ़ते हमलों और कानून लागू करने तथा संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वालों की चिंताजनक उदासीनता के बीच, अल्पसंख्यक भय और पीड़ा से ग्रस्त होकर खुद को लगातार असुरक्षित पा रहे हैं. इन गंभीर घटनाक्रमों के मद्देनज.र, सीबीसीआई राष्ट्र से यह आह्वान कर रहा है.”

आर्चबिशप ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक गोपीचंद पडलकर के एक बयान को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि गांवों में धर्मांतरण के लिए आने वाले की जो भी पिटाई करेगा, उसे वह नकद पुरस्कार देंगे.

आर्चबिशप ने कहा कि विधायक के खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की गई, जबकि ”इसके विपरीत सोशल मीडिया पोस्ट या शांतिपूर्ण असहमति जैसी कम गंभीर अभिव्यक्तियों के लिए छात्रों, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं के खिलाफ अक्सर त्वरित कानूनी कार्रवाई देखी जाती है.” उन्होंने छत्तीसगढ़ की घटना को ”परेशान करने वाली” बताते हुए कहा कि नन को कथित तौर पर ”सांप्रदायिक तत्वों” के इशारे पर गिरफ्तार किया गया.

यह पूछे जाने पर क्या सीबीसीआई बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की मांग करेगा तो उन्होंने कहा, ”जो भी संगठन इन राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होता है, हम उसे नहीं छोड़ते… हम चुपचाप बैठकर यह नहीं कहते कि उन्हें अनुमति दी जाए… यदि आवश्यक हो तो हम मांग कर सकते हैं कि उन पर प्रतिबंध लगाया जाए. हम यह कहने से डरते नहीं हैं.”

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