
नयी दिल्ली. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने मणिपुर में शांति बहाल नहीं होने पर चिंता व्यक्त करने वाले मोहन भागवत के बयान को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष किया और कहा कि विपक्ष की बातें सुनना ”उनके डीएनए में नहीं” है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक की सलाह माननी चाहिए. सिब्बल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को आगाह किया कि वह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले 10 वर्षों में जो हुआ उसे न दोहराए.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”मैं यह बात कई महीनों से कह रहा हूं, बयानों से ‘हम बनाम वो’ का माहौल बनाया जा रहा है. हमें देश को आगे ले जाने की जरूरत है. मैं मोहन भागवत के बयान का स्वागत करता हूं.” भागवत ने मणिपुर में एक वर्ष बाद भी शांति स्थापित नहीं होने पर सोमवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि संघर्ष प्रभावित पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति पर प्राथमिकता के साथ विचार किया जाना चाहिए.
नागपुर में रेशमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मृति भवन परिसर में संगठन के ‘कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय’ के समापन कार्यक्रम में आरएसएस प्रशिक्षुओं की एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विभिन्न स्थानों और समाज में संघर्ष अच्छा नहीं है.
सिब्बल ने कहा, ”मैं कई महीनों से यह बात दोहरा रहा हूं. जब मैं 1998-2004 में राज्यसभा में था, तब (अटल बिहारी) वाजपेयी सरकार थी. मैंने कई बार उनके भाषण सुने, वह विपक्ष को ‘प्रतिपक्ष’ कहते थे, वो कहते थे आप हमारे विरोधी नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को ‘विरोधी’ बना दिया.”
उनका कहना था, ”हमने मणिपुर के बारे में चिंता जताई, भागवत जी ने भी अब वही कहा है. आप हमारी बात नहीं सुनते क्योंकि आपको हमारी बात सुनने की आदत नहीं है, बल्कि उनकी बात सुनने की आदत है. हमारी बात सुनना आपके डीएनए में नहीं है. मणिपुर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी. ‘ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष की आवाज सुनने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा होने पर ही देश आगे बढ़ेगा.



