
नयी दिल्ली. अडाणी समूह और एनडीटीवी की प्रवर्तक इकाई आरआरपीआर होंिल्डग लि. ने सेबी से संपर्क साधा है. दोनों ने बाजार नियामक से पिछले आदेश के वॉरंट को शेयर में बदलने पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया है. इस अधिग्रहण की लड़ाई में सेबी की टिप्पणी काफी महत्वपूर्ण है.
उल्लेखनीय है कि अडाणी समूह ने 23 अगस्त को वीसीपीएल के अधिग्रहण के जरिये एनडीटीवी में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण की घोषणा की थी. वीसीपीएल की आरआरपीआर होंिल्डग में 99.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. मीडिया समूह की प्रवर्तक कंपनी ने कहा है कि सौदा सेबी की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ सकता है.
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 27 नवंबर, 2020 को जारी आदेश में एनडीटीवी के संस्थापकों…राधिका रॉय और प्रणय रॉय पर प्रतिभूति बाजार में पहुंच को लेकर दो साल के लिये प्रतिबंध लगा दिया था. यह अवधि 26 नवंबर को समाप्त हो रही है.
एनडीटीवी के संस्थापकों का कहना है कि चूंकि पाबंदी अभी जारी है, ऐसे में वीसीपीएल (विश्वप्रधान कर्मिशयल प्राइवेट लि.) के लिये वॉरंट को इक्विटी में बदलने के विकल्प के उपयोग को लेकर सेबी से मंजूरी की जरूरत है.
इस अधिग्रहण के बीच दोनों पक्षों ने सेबी से चीजें स्पष्ट करने की मांग की है. इसमें नियामक की टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी. एनडीटीवी की शेयर बाजार को दी गयी सूचना के अनुसार उसके संस्थापकों ने बताया है कि आरआरपीआर होंिल्डग ने 28 अगस्त, 2022 को सेबी को पत्र लिखकर यह स्पष्ट करने को कहा है क्या नियामक के 27 नवंबर, 2020 के आदेश वीवीसीपीएल को जारी वॉरंट को प्रवर्तक समूह आरआरपीआरएच के इक्विटी शेयर में बदलने पर पाबंदी लगाते हैं.
उसके कुछ घंटों बाद अडाणी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को बताया कि वीसीपीएल ने भी वॉरंट को इक्विटी में बदलने के बारे में सेबी से चीजें स्पष्ट करने का आग्रह किया है. वीसीपीएल ने 29 अगस्त को सेबी को पत्र लिखकर चीजें स्पष्ट करने और एनडीटीवी के शेयरधारकों में भ्रम की स्थिति दूर करने को कहा है.



