‘ऑपरेशन सिंदूर’ से साबित हुआ कि आतंकियों और भारत के दुश्मनों के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं: मोदीके लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं: मोदी

गंगईकोंडा चोलपुरम/वडोदरा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को दिखाया कि अगर भारत की संप्रभुता पर हमला हुआ, तो वह किस तरह जवाब देगा और सीमा पार सैन्य कार्रवाई ने पूरे देश में एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने यहां चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह भी साबित कर दिया कि भारत को निशाना बनाने वाले दुश्मनों और आतंकवादियों के लिए कोई पनाहगाह नहीं है.

यह कार्यक्रम महान चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है, जिसे ‘आदि तिरुवथिरई’ (तमिल माह आदि में राजा का जन्म नक्षत्र तिरुवथिरई है) उत्सव के रूप में मनाया जाता है. यह उत्सव दक्षिण पूर्व एशिया में राजेंद्र चोल के समुद्री अभियान के 1,000 वर्ष पूरे होने और चोल वास्तुकला के एक शानदार उदाहरण गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर के निर्माण की शुरुआत का स्मरण कराता है. प्रधानमंत्री मोदी ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के चुनिंदा ठिकानों पर किए गए सैन्य हमलों के बारे में कहा, ”दुनिया ने देखा कि अगर कोई भारत की सुरक्षा और संप्रभुता पर हमला करता है तो वह किस तरह जवाब देता है.”

उन्होंने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत के दुश्मनों और आतंकवादियों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है. जब मैं हेलीपैड से यहां आया तो तीन-चार किलोमीटर की दूरी अचानक रोड शो में बदल गई और हर कोई ऑपरेशन सिंदूर की प्रशंसा कर रहा था.” मोदी ने कहा, ”इसने पूरे देश में एक नई जागृति, एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है. दुनिया को भारत की ताकत का एहसास होना चाहिए.” मोदी ने कहा कि सम्राट राजराज चोल और उनके पुत्र राजेंद्र चोल-प्रथम के नाम भारत की पहचान और गौरव के पर्याय हैं . उन्होंने घोषणा की कि तमिलनाडु में उनकी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और ये प्रतिमाएं ”हमारे ऐतिहासिक जागरण के आधुनिक स्तंभ” होंगी.

प्रतिष्ठित तमिल शासकों के प्रति यह सम्मान मोदी की कई तमिल-केंद्रित पहलों के बाद किया गया है, जिनमें काशी तमिल संगमम और तिरुक्कुरल, मणिमेकलाई तथा अन्य शास्त्रीय तमिल साहित्य का कई भाषाओं और ब्रेल लिपि में अनुवाद शामिल है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ”चोल सम्राटों ने भारत को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोया था. आज हमारी सरकार चोल युग के उसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रही है. काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम जैसी पहलों के माध्यम से, हम एकता के इन सदियों पुराने बंधनों को और मजबूत कर रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए कई लोग ब्रिटेन के मैग्नाकार्टा का जिक्र करते हैं, जबकि चोल कालीन ‘कुडवोलाई प्रणाली’ उससे भी पुरानी है. उन्होंने कहा कि चोल काल में अपनाई गई यह प्रणाली 1,000 साल से भी ज्यादा पुरानी है.

मैग्नाकार्टा एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो 1215 में इंग्लैंड के राजा जॉन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था. यह दस्तावेज राजा की शक्तियों पर अंकुश लगाने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाया गया था. प्रधानमंत्री ने चोल राजाओं की समृद्ध विरासत और शैव अध्यात्मवाद के संरक्षण का जिक्र करते हुए अपनी तमिल भाषा पर जोर देना जारी रखा.

मोदी ने कहा, ”हमारी शैव परंपरा ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. चोल सम्राट इस विरासत के प्रमुख सूत्रधार थे. आज भी, तमिलनाडु उन सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है जहां यह जीवंत परंपरा फल-फूल रही है.” उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के लोगों में एक नया आत्मविश्वास जगाया है और पूरी दुनिया इसे देख रही है. राजेंद्र चोल की विरासत का ज.क्रि करते हुए मोदी ने कहा कि पिता के प्रति सम्मान के कारण गंगईकोंडा चोलापुरम शिव मंदिर के गोपुरम की ऊंचाई पिता द्वारा तंजावुर में बनवाए गए बृहदेश्वर मंदिर के गोपुरम से कम रखी गयी थी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजेंद्र चोल प्रथम ने अपनी उपलब्धियों के बावजूद विनम्रता की मिसाल कायम की. उन्होंने कहा, ”आज का नया भारत इसी भावना का प्रतीक है, यह और भी मज.बूत होते हुए, वैश्विक कल्याण और एकता के मूल्यों में निहित है.” मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम की 27 जुलाई पुण्यतिथि होने का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का नेतृत्व करने के लिए देश को कलाम और चोल राजाओं जैसे लाखों युवाओं की जरूरत है.

ओधुवमूर्ति (शैव गुरु) द्वारा आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति और संगीतकार इलैयाराजा द्वारा शिव-मंत्र संगीत कार्यक्रम को सुनकर, प्रधानमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक वातावरण ने आत्मा को गहराई से प्रभावित किया. वैदिक और शैव तिरुमुराई (शैव संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ)के मंत्रोच्चार के बीच मोदी ने यहां भगवान शिव मंदिर में प्रार्थना की, जिसका निर्माण राजेंद्र चोल प्रथम ने अपनी विजयों और एक नए शहर गंगईकोंडा चोलपुरम की स्थापना के उपलक्ष्य में करवाया था.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को राजेंद्र चोल की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता करने के लिए यहां पहुंचने के तुरंत बाद एक रोड शो किया. रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने वाहन के रनिंग बोर्ड पर खड़े होकर सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के कार्यकर्ता सड़कों के किनारे खड़े थे और उन्होंने तीन किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर फूल और पंखुड़ियां बरसाईं. कार्यकर्ता दोनों दलों का झंडा भी लिये हुए थे.

प्रधानमंत्री ने राजेंद्र चोल प्रथम के सम्मान में एक स्मारक सिक्का जारी किया और वह चिन्मय मिशन द्वारा संचालित तमिल गीता एल्बम के विमोचन समारोह में भी शामिल हुए. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल देश की अपनी विरासत को संरक्षित करने के संकल्प को ऊर्जा प्रदान करती है. प्रधानमंत्री ने ‘तिरुमुराई गायन’ (शैव भजनों का गायन) पर एक पुस्तिका का भी विमोचन किया.

प्रधानमंत्री 26 जुलाई की रात तूतीकोरिन पहुंचे और लगभग 4,900 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया.
मोदी ने रविवार को ‘आदि तिरुवथिरई महोत्सव’ के भव्य समापन समारोह की अध्यक्षता की, जो 23 जुलाई को शुरू हुआ था. यह आयोजन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय/भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक पहल है, जो यहां चोल युग के भगवान शिव मंदिर का रखरखाव करता है. अरियालुर जिले में गंगईकोंडा चोलपुरम कस्बा तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कुंभकोणम के पास है. तमिलनाडु में अपने दो दिवसीय कार्यक्रम पूरे करने के बाद प्रधानमंत्री 27 जुलाई को तिरुचिरापल्ली से दिल्ली के लिए रवाना हुए.

संसाधन प्रबंधन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में एक निर्णायक कारक था : राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाकर भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से मई में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में विभिन्न एजेंसियों द्वारा संसाधनों (लॉजिस्टिक) का प्रबंधन एक निर्णायक कारक था. राजनाथ वडोदरा में रेल मंत्रालय के तहत आने वाले गति शक्ति विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और अध्यापकों को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा, ”दुनिया जिस तेजी से बदल रही है, वह प्रभावी एवं चौंकाने वाली भी है. रक्षा क्षेत्र भी बदल रहा है और युद्ध के तरीकों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. आज के दौर में युद्ध सिर्फ बंदूकों और गोलियों से नहीं, बल्कि समयबद्ध तरीके (चीजों का प्रंधन करने) से जीते जाते हैं.” राजनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि संसाधनों का प्रबंधन युद्ध के मैदान में देश का भाग्य तय करता है. उन्होंने कहा कि जीत और हार जरूरी संसाधनों से तय होती है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पूरी दुनिया ने इसे देखा.

राजनाथ ने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में संसाधनों का प्रबंधन एक निर्णायक कारक था. विभिन्न एजेंसियों ने हमारे सशस्त्र बलों को जुटाने से लेकर सही समय पर सही जगह पर आवश्यक सामग्री पहुंचाने तक, जिस तरह से जरूरी संसाधनों का प्रबंधन किया, वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में एक निर्णायक कारक साबित हुआ.” उन्होंने कहा कि ‘लॉजिस्टिक’ को केवल सामान पहुंचाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाना चाहिए.

रक्षा मंत्री ने कहा, ”संसाधन ही युद्धक्षेत्र को युद्धक्षेत्र बनाते हैं. संसाधनों के बिना, यह एक असमंजस का क्षेत्र बन जाएगा. युद्ध के दौरान अगर हथियार और गोला-बारूद सही समय पर सही जगह न पहुंचें, तो इसका कोई मतलब नहीं है. हमारा संसाधन प्रबंधन जितना मजबूत होगा, हमारी सीमाएं भी उतनी ही सुरक्षित होंगी.” उन्होंने कहा, ”आज हम ऐसे दौर में हैं, जहां ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि समय पर संसाधन प्रबंधन से मापी जाती है. चाहे युद्ध हो, आपदा हो या वैश्विक महामारी, यह सिद्ध हो चुका है कि जो राष्ट्र अपनी आपूर्ति शृंखला को मजबूत रखता है, वह सबसे स्थिर, सुरक्षित और सक्षम होता है.” राजनाथ ने कहा कि सेना के लिए संसाधन प्रबंधन का मतलब है कि हथियार, ईंधन, राशन और दवाइयां बिना किसी देरी के दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचें, जबकि नौसेना के मामले में इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों को समय पर कलपुर्जे और अन्य उपकरण उपलब्ध हों.

रक्षा मंत्री ने कहा, ”और हमारी वायु सेना के लिए इसका मतलब यह सुनिश्चित करना है कि जमीनी सहायता और निर्बाध ईंधन आपूर्ति की मदद से जेट विमान बिना किसी बाधा के उड़ान भरना जारी रखें. जरा सोचिए, अगर हमारे पास उन्नत मिसाइल प्रणालियां हैं, लेकिन उन्हें प्रक्षेपित करने के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समय पर नहीं पहुंचते, तो उस तकनीकी का कोई फायदा नहीं है.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘पीएम गति शक्ति’ पहल, ‘लॉजिस्टिक’ एकीकरण के विचार का ही विस्तार है.

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