
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के ”नकारात्मक आंकड़े” का हवाला देते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र की ‘शुतुरमुर्ग सरकार’ ने अर्थव्यवस्था से जुड़ी बुनियादी कमजोरी पर ध्यान देने के बजाय मनरेगा को खत्म करने का विकल्प चुना.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”इस तिमाही के नकारात्मक एफडीआई आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. लेकिन यह पूरी तरह से पूर्वानुमानित था. मोदी निर्मित अर्थव्यवस्था का बुनियादी दोष यह है कि उपभोक्ता मांग में सुस्ती आ चुकी है. कमजोर घरेलू निजी निवेश और एफडीआई इसका अपरिहार्य परिणाम हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि इस संरचनात्मक कमजोरी पर संज्ञान लेने के बजाय, इस ‘शुतुरमुर्ग सरकार’ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा मनरेगा को ध्वस्त करने का विकल्प चुना.
कुछ खबरों में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत विदेश जाने वाले धन में अक्टूबर 2025 में सालाना आधार पर 1.81 प्रतिशत की कमी आई है. यात्रा और शिक्षा पर धन खर्च घटने के कारण यह एक साल पहले के 2.40 अरब डॉलर की तुलना में घटकर 2.35 अरब डॉलर रह गया है. दूसरी ओर, इस महीने की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के दौरान 18 प्रतिशत बढ.कर 35.18 अरब डॉलर रहा.
सरकार ने अरावली पर ‘डैमेज कंट्रोल’ का फर्जी प्रयास किया: कांग्रेस
कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अरावली क्षेत्र में खनन के नए पट्टे देने पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए जाने के बाद बुधवार को आरोप लगाया कि यह ‘डैमेज कंट्रोल(नुकसान की भरपाई)’ का फर्जी प्रयास है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि अरावली पहाड़ों को बचाया नहीं, बेचा जा रहा है.
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “यह डैमेज कंट्रोल का एक फर्जी प्रयास है जो किसी को भी मूर्ख नहीं बना पाएगा.” उन्होंने कहा, “ये पवित्र उद्घोषणाएं हैं लेकिन अरावली की खतरनाक 100 मीटर से अधिक की पुनर्परिभाषा – जिसे भारतीय वन सर्वेक्षण, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर बनी केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और सर्वोच्च न्यायालय के न्याय मित्र द्वारा खारिज कर दिया गया है – अपरिर्वितत बनी हुई है.” रमेश ने आरोप लगाया कि अरावली पहाड़ों को बचाया नहीं, बेचा जा रहा है.
मोदी सरकार ने छोटे व्यापारियों को खराब नीतियों की जंजीरों में बांध दिया है: राहुल गांधी
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर व्यापारिक जगत में एकाधिकार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि इस समय सरकार ने छोटे व्यापारियों को अपनी खराब नीतियों की जंजीरों में बांध दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि देश का वैश्य समाज हताश है और वह इस समुदाय के साथ खड़े हैं जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने वैश्य समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात का एक वीडियो बुधवार को अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा किया.
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “जिस समाज ने देश की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक योगदान दिया, आज वही हताश है. यह खतरे की घंटी है.” उन्होंने दावा किया कि सरकार ने एकाधिकार को खुली छूट दे दी है, और छोटे-मध्यम व्यापारियों को नौकरशाही और गलत जीएसटी जैसी खराब नीतियों की जंजीरों में बांध दिया है.
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ नीति की गलती नहीं है बल्कि यह उत्पादन, रोजग़ार और भारत के भविष्य पर सीधा हमला है. भाजपा सरकार की इसी सामंतवादी सोच के खिलाफ लड़ाई है. और इस लड़ाई में देश के व्यापार की रीढ़ – वैश्य समाज के साथ मैं पूरी ताकत से खड़ा हूं.” इस वीडियो के मुताबिक, वैश्य समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं से राहुल गांधी को अवगत कराया. ये व्यापारी जूता निर्माण, कृषि उत्पाद, बिजली, पेपर व स्टेशनरी, ट्रैवल, स्टोन कटिंग, केमिकल्स और हार्डवेयर जैसे विविध उद्योगों से जुड़े हैं.



