भारत का पड़ोसी पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने बीते साल पहलगाम हमले के बाद सिंधु संधि को निलंबित करने का ऐलान किया था। इसके बाद से पाकिस्तान इस मामले को लगातार वैश्विक मंचों पर उठा रहा है। अब पाकिस्तान ने हेग के कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में भारत के खिलाफ केस में कथित तौर पर 6 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इसमें वह रकम भी शामिल है, जो इस संस्था को भारत से लेना था। भारत के छह दशक पुरानी सिंधु संधि (IWT) को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को आर्टिबेशन कोर्ट ले गया था। यह खर्च ऐसे समय में किया गया है जब इस्लामाबाद आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है और सरकारी विभागों में कटौती लागू कर रहा है।
पाकिस्तान के दस्तावेजों के अनुसार 7.2 मिलियन डॉलर की राशि सामान्य परिचालन खर्च के तहत दिखाई गई है। यह साफ नहीं किया गया है कि इस प्रावधान का कितना हिस्सा अंतरराष्ट्रीय मुकदमेबाजी पर खर्च होगा। पाकिस्तान ने रतले और किशनगंगा पनबिजली परियोजनाओं पर अपनी आपत्तियों के सिलसिले में हेग में ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ की कार्यवाही के लिए करीब 6 मिलियन डॉलर भुगतान किया है। उधर पाकिस्तान सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेजों से पता चलता है कि जल संसाधन विभाग के 15.3 मिलियन डॉलर (पाकिस्तानी 4.241 अरब रुपए) के मौजूदा खर्च बजट में से आधे से ज्यादा 7.9 मिलियन डॉलर (पाकिस्तानी 2.187 अरब रुपए सिंधु जल के लिए पाकिस्तान मिशन को दिए गए हैं।
शोधपूर्ण डाक्यूमेंट बताते हैं कि मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि इस राशि में वह हिस्सा भी शामिल है जो कोर्ट ने भारत से मांगा था। एक सूत्र के मुताबिक, ‘पाकिस्तान भारत का खर्च भी उठा रहा है। कोर्ट के रिकॉर्ड से पता चलता है कि भारत ना तो मध्यस्थता की कार्यवाही में शामिल हुआ है और ना कोर्ट की ओर से मांगे गए फंड दिए हैं। ऐसे में पाकिस्तान इस संस्था को भुगतान कर रहा है।
जानते चलें कि ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब पाकिस्तान सरकार के हालिया मितव्ययिता अभियान (खर्च में कटौती के अभियान) के तहत आधिकारिक वाहनों के लिए ईंधन आवंटन आधा कर दिया गया है। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर रोक लगाई गई है। साथ ही विदेश यात्राओं और आधिकारिक डिनर पर प्रतिबंध लगा दिया गया और कर्मचारियों से संबंधित खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों में 5 फीसदी की कटौती की गई।
ज्ञात होवे कि पूर्व में हेग में केस लड़ने के लिए पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय कानूनी टीम पर किए गए खर्चों में पारदर्शिता की कमी है। उसकी टीम में लंदन स्थित प्रमुख बैरिस्टर चैंबर और लॉ फर्मों के वकील शामिल हैं। केस के बारे में परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस टीम में ट्वेंटी एसेक्स के डैनियल बेथलहम और फिलिप्पा वेब, वेरुलम बिल्डिंग्स के कैमरन माइल्स और दूसरे वकील शामिल हैं।