नयी दिल्ली. न्यायिक प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास कम होने का दावा करते हुए राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा है कि विकल्प तभी मिल सकते हैं जब सरकार और न्यायपालिका दोनों यह स्वीकार करें कि न्यायाधीशों की नियुक्ति सहित मौजूदा प्रणालियां कारगर नहीं रह गई हैं.
सिब्बल ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में न्यायिक प्रणाली की ”खामियों” के बारे में बात की. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह जिला और सत्र न्यायालयों द्वारा ज्यादातर मामलों में जमानत नहीं दी जा रही है. वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल ने पिछले साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव द्वारा दिए गए विवादास्पद बयान के मुद्दे का भी हवाला दिया. हालांकि, सिब्बल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले पर टिप्पणी करने से परहेज किया.
उन्होंने इस मुद्दे पर कहा, ”इस मामले से निपटने के लिए एक आंतरिक प्रक्रिया है. अब, तथ्यों के अभाव में मुझे नहीं लगता कि इस देश के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में मुझे इस पर टिप्पणी करनी चाहिए.” यह पूछे जाने पर कि क्या वह न्यायिक प्रणाली के बारे में चिंतित हैं, सिब्बल ने कहा, ”पिछले कई वर्षों से न्यायपालिका के बारे में विभिन्न पहलुओं पर चिंताएं रही हैं, एक चिंता भ्रष्टाचार के बारे में है, और भ्रष्टाचार के कई अर्थ हैं. एक अर्थ यह है कि कोई न्यायाधीश किसी आर्थिक लाभ के कारण निर्णय देता है. भ्रष्टाचार का दूसरा रूप अपने पद की शपथ के विपरीत काम करना है, जो यह है कि वह बिना किसी भय या पक्षपात के निर्णय देगा.”
निर्वाचन आयोग ‘नि्क्रिरय’, ‘विफल संस्था’ है: कपिल सिब्बल
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग को ”नि्क्रिरय” और ”विफल” संस्था करार देते हुए दावा किया है कि लोगों के एक बड़े वर्ग को आयोग पर भरोसा नहीं है क्योंकि उसने ”अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुसार अपने कार्यों का निर्वहन नहीं किया.” सिब्बल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक साक्षात्कार में कहा कि निर्वाचन आयोग पर अविश्वास के मुद्दे से जितनी जल्दी निपटा जाएगा, लोकतंत्र के बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.
उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस द्वारा लगाए गए मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”निर्वाचन आयोग एक नि्क्रिरय निकाय है. निर्वाचन आयोग ने अपने उन दायित्वों के अनुसार अपने कार्यों का निर्वहन नहीं किया है, जिसकी संविधान के तहत उससे अपेक्षा की जाती है.” राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य सिब्बल ने कहा कि निर्वाचन आयोग आज एक ”विफल संस्था” है और इस देश के लोगों के एक बड़े वर्ग को इस पर कोई भरोसा नहीं है.
सिब्बल ने कहा, ”इसलिए, हम जितनी जल्दी इस मुद्दे से निपटेंगे, लोकतंत्र के बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी.” उन्होंने कहा, ”विपक्ष को संदेश यह है कि ईवीएम के अलावा भी कुछ ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जो वास्तव में यह दर्शाते हैं कि चुनाव की प्रक्रिया में गड़बड़ी है.” सिब्बल ने दावा किया कि जो नतीजे आए हैं, वे कई स्तरों पर हेरफेर का नतीजा हो सकते हैं. कांग्रेस के पूर्व नेता ने कहा, ”हमें इस मुद्दे का मिलकर समाधान करने की जरूरत है.” कांग्रेस और ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन में शामिल अन्य दल मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी का लगातार आरोप लगाते रहे हैं.
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को सार्वजनिक तौर पर एकजुट नजर आना चाहिए, न कि बिखरा हुआ: सिब्बल
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को सार्वजनिक तौर पर ‘एकजुट’ दिखना चाहिए, न कि बिखरा हुआ जैसा कि वह आम तौर पर दिखाई देता है. सिब्बल ने साथ ही विपक्षी गठबंधन के लिए एक औपचारिक ढांचे की वकालत की जिसमें प्रवक्ता हों जो गठबंधन के विचारों को सामने रख सकें.
सिब्बल ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल दलों को भविष्य के लिए एक सुसंगत नीति, वैचारिक ढांचे और कार्यक्रम की आवश्यकता है. हाल में राज्य विधानसभा चुनावों में ‘इंडिया’ के सहयोगी दलों के बीच हुई तकरार के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा, ”मेरा मानना ??है कि इसे (इंडिया) एकजुट दिखना चाहिए, न कि बिखरा हुआ जैसा कि यह आम तौर पर दिखाई देता है.” सिब्बल ने कहा, ” इन्हें (‘इंडिया’ में शामिल दलों को) एक सुसंगत नीति, एक सुसंगत वैचारिक ढांचा और भविष्य के लिए एक सुसंगत कार्यक्रम की आवश्यकता है.”
राज्यसभा सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मैं राज्य स्तर या राष्ट्रीय स्तर की बात नहीं कर रहा हूं. राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सोचने के तरीके में एकरूपता होनी चाहिए और जब तक वह तंत्र स्थापित नहीं हो जाता और जब तक गठबंधन के प्रवक्ता नहीं होंगे जो इसके विचारों को सामने रख सकें, मुझे नहीं लगता कि यह बहुत प्रभावी ढंग से आगे बढ. सकता है.” यह पूछे जाने पर कि क्या ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए एक औपचारिक राजनीतिक ढांचा होना चाहिए, सिब्बल ने कहा कि वह लंबे समय से यह बात कहते आ रहे हैं. सिब्बल ने हालांकि विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर भरोसा जताया.