भारत में पेट्रोल ब्रिटेन, जर्मनी से सस्ता, पर अमेरिका, चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका से महंगा

नयी दिल्ली. भारत में पेट्रोल हांगकांग, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में सस्ता है लेकिन चीन, ब्राजील, जापान, अमेरिका, रूस, पाकिस्तान और श्रीलंका की तुलना में महंगा है. बैंक आॅफ बड़ौदा (बीओबी) की एक शोध रिपोर्ट में यह दावा किया गया है. भारत में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच इस पर बहस चल रही है कि राज्य या केंद्र में किसे अपने करों में कटौती करनी चाहिए. ईंधन की कीमतों में वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के कारण है. इसके अलावा डॉलर के मजबूत होने से भी कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है.

बीओबी की आर्थिक अनुसंधान रिपोर्ट में विभिन्न देशों में गत नौ मई को पेट्रोल की कीमतों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है. इसके लिए उस देश की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में पेट्रोल की कीमतों को आधार बनाया गया. दुनिया के 106 देशों से मिले आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि भारत में पेट्रोल की कीमत 1.35 डॉलर प्रति लीटर है और यह इस सूची में 42वें स्थान पर है. इस तरह 50 से भी ज्यादा देशों में पेट्रोल की कीमतें भारत से भी ज्यादा हैं.

रिपोर्ट कहती है, ‘‘इस आंकड़े को देखकर हमें कुछ राहत मिलती है कि सिर्फ भारत में ही पेट्रोल इतना महंगा नहीं है. इन देशों में पेट्रोल की औसत कीमत 1.22 डॉलर प्रति लीटर है.’’ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ईंधन की कीमतें आॅस्ट्रेलिया, तुर्की और दक्षिण कोरिया के बराबर हैं. यह कीमत हांगकांग, फिनलैंड, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, यूनान, फ्रांस, पुर्तगाल और नॉर्वे से कम है जहां यह प्रति लीटर दो डॉलर से ऊपर है.

प्रति व्यक्ति के संदर्भ में भारत में पेट्रोल की कीमत वियतनाम, केन्या, यूक्रेन, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और वेनेजुएला से अधिक हैं. प्रमुख तेल उत्पादक देशों में पेट्रोल की कीमतें तुलनात्मक रूप से काफी कम हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘भारत में पेट्रोल की कीमत अब हद से ज्यादा अधिक नहीं लगती है. हालांकि, जब इसे प्रति व्यक्ति आय के साथ जोड़कर देखें तो यही नजर आता है कि अधिक कीमत वाले ज्यादातर देशों में प्रति व्यक्ति आय भारत की तुलना में काफी अधिक है.’’ ऐसी स्थिति में कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों के लिए पेट्रोल के दाम बढ़ने का आर्थिक कष्ट बहुत अधिक है. इसकी वजह यह है कि मुद्रास्फीति पर इसका प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रभाव कहीं ज्यादा है जिससे निम्न-आय वाले समूहों पर सबसे ज्यादा मार पड़ती है.

रिपोर्ट में फिलिपीन का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वहां पर पेट्रोल की कीमत भारत के लगभग समान है लेकिन उसकी प्रति व्यक्ति आय भारत की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं केन्या, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान एवं वेनेजुएला जैसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में पेट्रोल की कीमतें बहुत कम हैं. बीओबी की शोध रिपोर्ट कहती है कि ऐसी स्थिति में लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को ईंधन पर करों में कटौती पर जरूर सोचना चाहिए.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता और आयातक देश है. यह अपनी तेल जरूरतों का 85 प्रतिशत आयात करता है और इसलिए आयात समता दरों पर खुदरा ईंधन की कीमतें रखता है. दिल्ली में पेट्रोल की मौजूदा कीमत 105.41 रुपये (1.35 डॉलर) प्रति लीटर है. इसकी तुलना में पड़ोसी देशों में पेट्रोल कहीं सस्ता है. बांग्लादेश में पेट्रोल की कीमत 1.05 डॉलर प्रति लीटर, पाकिस्तान में 77 सेंट प्रति लीटर और श्रीलंका में 67 सेंट प्रति लीटर है.

सीआईआई के अध्यक्ष बजाज ने पेट्रोल-डीजल पर कर घटाने की वकालत की

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने पेट्रोल और डीजल पर कर घटाने की वकालत की है. सीआईआई के अध्यक्ष संजीव बजाज ने मंगलवार को कहा कि केंद्र और राज्यों के आपसी सहयोग से वाहन ईंधन पर कर घटाना चाहिए. बढ़ती महंगाई की वजह से ऐसा करना जरूरी है. बजाज ने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में कहा कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कर ऐसे समय बढ़ाया था जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम निचले स्तर पर थे. इसे वापस लिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी तरह स्पष्ट है कि मुद्रास्फीति की एक प्रमुख वजह तेल है. हमने देखा है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोल महंगा हुआ है. हमने इसका मुद्रास्फीति पर असर देखा है और इसे पलटने की जरूरत है.’’ बजाज ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि केंद्र और राज्यों दोनों का कराधान काफी ऊंचा है. हमने देखा कि जब कच्चे तेल के दाम नीचे आए, उस समय इसकी दरें बढ़ा दी गईं. अब तेल के दाम चढ़ गए हैं, हमारा मानना है कि इसपर सहयोगपूर्ण तरीके से विचार-विमर्श की जरूरत है. अंतत: हम यह एक देश के लिए कर रहे हैं.’’ सीआईआई के अध्यक्ष ने कहा कि तीनों वापस लिए गए कृषि विधेयकों की उचित विचार-विमर्श के साथ समीक्षा की जानी चाहिए और उसके बाद इन्हें आगे बढ़ाना चाहिए.

उच्च संपदा वाले (एचएनआई) लोगों के भारत से जाने की खबरों पर बजाज ने कहा कि हमें यह ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें भारत समृद्ध हो सके, भारतीय उद्योग समृद्ध हों. हमें कुछ लोगों के देश से जाने को लेकर ंिचता करने की जरूरत नहीं है.’’ उन्होंने कहा कि इन लोगों द्वारा भारत छोड़ने के फैसले के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. बजाज ने कहा, ‘‘एक देश के रूप में हमें सही वातावरण बनाने की जरूरत है और मौजूदा सरकार ऐसा कर रही है. अनुकूल वातावरण बनाने के लिए हमें कंपनियों, निवेश को आर्किषत करना होगा. हमें ऐसा माहौल बनाना होगा कि लोग भारत छोड़ने के बजाय यहां आना चाहें.

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