कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ”नैतिक हार स्वीकार करते हुए” तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने लोकसभा चुनाव में यह दावा करते हुए प्रचार किया था कि भाजपा 400 से अधिक सीटें जीतेगी लेकिन वास्तव में वह अपने दम पर बहुमत तक हासिल करने में विफल रही. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगी कि मोदी केंद्र से सत्ता से बाहर हो जाएं और ‘इंडिया’ गठबंधन सत्ता में आए.
उन्होंने कहा, ह्लप्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सारी विश्वसनीयता खो दी है, उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. ‘इंडिया’ जीत गया है, मोदी हार गए हैं. प्रधानमंत्री ने कई पार्टियों को तोड़ा और अब जनता ने उनका मनोबल भी तोड़ दिया है. मोदी अब सरकार बनाने के लिए तेदेपा और नीतीश (कुमार) के पैरों पर गिर रहे हैं.ह्व उन्होंने कहा, ह्लकेंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और अत्याचार आज परास्त हो चुके हैं. केंद्रीय एजेंसियों और संसद में दो तिहाई बहुमत का इस्तेमाल करके हमें डराने वाली भाजपा को हम नहीं छोड़ेंगे. न तो हम उन्हें माफ करेंगे और न ही इंडिया के अन्य दल करेंगे.ह्व
उन्होंने कहा कि उनके भतीजे एवं तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी बुधवार को नयी दिल्ली में ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल होंगे, लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि उनकी पार्टी को अभी तक इस बारे में सूचित नहीं किया गया है. उन्होंने कहा, ह्लमैंने राहुल को बधाई संदेश भेजा है, हो सकता है कि वे व्यस्त हों. उन्होंने अभी तक हमसे संपर्क नहीं किया है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे संपर्क करते हैं या नहीं.ह्व
प्रधानमंत्री की राजनीतिक और नैतिक हार हुई, जनादेश उनके खिलाफ: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को कहा कि इस लोकसभा चुनाव का जनादेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ है तथा यह उनकी राजनीतिक एवं नैतिक हार हुई है. खरगे ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि इस चुनाव में लोकतंत्र और जनता की जीत हुई है.
खरगे का कहना था, ”अठारहवीं लोकसभा के चुनाव में हम विनम्रता से जनमत को स्वीकार करते हैं. ये जनता की जीत है. ये लोकतंत्र की जीत है. इस बार जनता ने किसी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं दिया. ख.ासकर, सत्ताधारी दल भाजपा ने एक व्यक्ति-एक चेहरे के नाम पर वोट मांगा था.” उन्होंने कहा, ”अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह मोदीजी के ख.लिाफ. है. यह उनकी राजनैतिक और नैतिक हार है.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”आप जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी और हमारे ‘इंडिया’ गठबंधन ने बहुत प्रतिकूल माहौल में चुनाव लड़ा. सरकारी मशनरी ने कदम-कदम पर अवरोध डाला. बैंक खाते सीज करने से लेकर तमाम नेताओं के खिलाफ अभियान चला.”
उन्होंने कहा, ”फिर भी शुरू से आखिर तक कांग्रेस पार्टी का अभियान सकारात्मक था. हमने महंगाई, बेरोजग़ारी, किसानों और मजदूरों की बदहाली, संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग जैसे विषयों को केंद्रीय मुद्दा बनाया. इन मुद्दों पर बड़ी संख्या में लोग हमसे जुड़े, हमारा समर्थन किया. प्रधानमंत्री जी ने जिस तरह का चुनाव प्रचार किया, वो इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा.” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के घोषणापत्र के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने जो झूठ फैलाया, जनता ने उसे समझ लिया.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”मैं इस मौके पर कहना चाहूंगा कि राहुल गांधी जी की दोनों यात्राओं- ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’- के दौरान लाखों-करोड़ों लोगों को मिलना, लोगों की समस्याओं को सुनना और आगे चलकर उन समस्याओं का हल ढूंढना, हमारे चुनाव अभियान का आधार बना. हमने इसी को पांच न्याय और 25 गारंटी का नाम दिया.” खरगे ने दावा किया, ”भाजपा नेतृत्व ने धीरे-धीरे सारे सांविधानिक संस्थाओं के ऊपर ग.ैर-क.ानूनी तरीक.े से क.ब्ज.ा करने की कोशिश की. फिर इनका उपयोग विरोधी दल के ख.लिाफ. करने लगे. जो दब गया, उसे दबाकर अपने तरफ. कर लिया. जो नहीं दबे उसकी पार्टी को तोड़ दिया, नहीं तो फिर जेल में डाल दिया.”
उनके मुताबिक, ”लोगों को ये विश्वास हो गया था कि मोदीजी को एक मौक.ा और मिला तो अगला हमला संविधान पर होगा. लोगों को इसके प्रमाण नए संसद सत्र के साथ ही दिखेगा. ख.ुशी इस बात की है कि भाजपा इस षड्यंत्र में अब सफल नहीं हो पाएगी.” खरगे ने ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों का आभार जताते हुए कहा, ”सभी एक साथ मिलकर एक स्वर में रहे. सभी ने मिलकर प्रचार किया और एक दूसरे की मदद की. हमारे हज.ारों-लाखों कार्यकर्ताओं ने अच्छे तालमेल के साथ काम किया.” उन्होंने कहा, ”हम सबको आनेवाले दिनों में इसी तरह लोगों के अधिकारों के लिए, संविधान की रक्षा के लिए, देश की तरक़्क.ी के लिए, सीमाओं पर सुरक्षा के लिए लड़ते रहना होगा. हमें सुनिश्चित करना होगा कि संसद सुचारू रूप से चले. विपक्ष के मुद्दों को प्राथमिकता मिले. संसद में उनपर बहस हो.”