
भोपाल/नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 अगस्त को राजधानी दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत करेंगे. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को यहां जानकारी दी.
राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बैठक करने के बाद चौहान ने यहां अपने आवास पर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि आगामी रबी की फसल के दौरान तीन से 18 अक्टूबर तक देशभर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की शुरुआत की जाएगी और राजधानी दिल्ली में 15-16 सितंबर को ‘रबी सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ”बैठक में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन पर भी चर्चा हुई. प्रधानमंत्री मोदी 23 अगस्त को पूसा स्थित आईसीएआर में प्राकृतिक खेती मिशन शुरू करेंगे.” उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 को केंद्र सरकार ने केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएम) शुरू करने को मंजूरी दी थी. इस योजना का 15वें वित्त आयोग (2025-26) तक कुल परिव्यय 2481 करोड़ रुपये है. इसमें भारत सरकार का हिस्सा 1584 करोड़ रुपये जबकि राज्य का हिस्सा 897 करोड़ रुपये है.
चौहान ने खरीफ फसलों के लिए चलाए गए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का उल्लेख करते हुए रबी की फसलों के लिए भी ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ शुरू किए जाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि तीन से 18 अक्टूबर तक देशभर में विजय पर्व के रूप में यह अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बार फसल बंपर रही है, देश ने गेहूं और धान के उत्पादन में नए रिकॉर्ड बने हैं और सोयाबीन तथा मूंगफली के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
उन्होंने कहा, ”चिंता अब रबी के फसलों की है, इसलिए राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ इसकी व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा की गई.” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी के मद्देनजर 15-16 सितंबर को दिल्ली में दो दिवसीय रबी सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा जबकि पहले यह सम्मेलन आधे दिन का हुआ करता था. उन्होंने कहा कि केंद्र के अधिकारी राज्यों के साथ मिलकर इस सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करेंगे और फिर उसके दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री इसमें सम्मिलित होंगे.
उन्होंने कहा, ”रबी के फसल में इस बार हम नया रिकॉर्ड बनाएंगे.” शिवराज ने कहा कि दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए राज्यों से कहा गया है कि वे भी इसे एक अभियान के रूप में लें और मजबूती से इस दिशा में काम करें. उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के दौरान आगामी पांच सालों के लिए कृषि क्षेत्र की कार्ययोजना बनाई जाएगी और इसमें प्रगतिशील किसानों और विशेषज्ञों से सुझाव भी लिए जाएंगे.
चौहान ने राज्यों से यूरिया का दुरुपयोग रोकने, नकली उर्वरकों की बिक्री पर अंकुश लगाने को कहा
चालू खरीफ बुवाई सत्र में यूरिया की बढ़ती मांग को देखते हुए, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकारों से इस प्रमुख उर्वरक का गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग रोकने तथा नकली उर्वरकों की बिक्री पर अंकुश लगाने को कहा. राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए, चौहान ने उन्हें यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि बाजार में केवल 600 प्रमाणित जैव-उत्तेजक ही बेचे जाएं, जबकि पहले लगभग 30,000 अप्रमाणित उत्पाद बेचे जाते थे.
एक सरकारी बयान में कहा गया, ”चौहान ने सभी राज्य कृषि मंत्रियों से निगरानी समितियां बनाकर और निगरानी तंत्र को मजबूत करके यूरिया का उचित उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया.” मंत्री ने यूरिया की बढ़ती मांग के दो मुख्य कारणों की पहचान की. पहला, अच्छी बारिश के कारण चावल, मक्का और अन्य फसलों की अधिक बुवाई, और दूसरा, गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए यूरिया का संभावित दुरुपयोग.
चौहान ने आगाह किया, ”अगर मांग वाकई कृषि ज़रूरतों के लिए है, तो यूरिया की आपूर्ति ज़रूर की जाएगी और मंत्रालय इस पर तेज़ी से काम कर रहा है. हालांकि, अगर दुरुपयोग का कोई संदेह है, तो इसे एक गंभीर मामला माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.” जैव-उत्तेजक पदार्थों के बारे में उन्होंने कहा कि पहले लगभग 30,000 ऐसे उत्पाद बेचे जा रहे थे, जिनमें से कई बिना उचित प्रमाणीकरण के थे. बयान में कहा गया, ”अबतक केवल 600 जैव-उत्तेजक पदार्थों को ही प्रमाणित किया गया है. उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि केवल ये प्रमाणित उत्पाद ही किसानों तक पहुंचें.” बैठक में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 23 अगस्त को करेंगे. चौहान ने अधिकारियों को मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और 100 ज़लिों में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत प्रगति पर चर्चा की.
मंत्री ने दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया और राज्य के कृषि मंत्रियों से इन मिशन और योजनाओं का व्यक्तिगत रूप से नेतृत्व और प्रचार करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, ”देश को अपनी राष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए दलहन और तिलहन का उत्पादन मज़बूत करना होगा.” चौहान ने बताया कि रबी फसल के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ पर दो दिवसीय सम्मेलन 15-16 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसका औपचारिक शुभारंभ तीन अक्टूबर को होगा, जो विजय पर्व के साथ मेल खाता है. यह अभियान तीन अक्टूबर से 18 अक्टूबर को धनतेरस तक चलेगा.



