पुणे. र्चिचत पोर्श कार हादसे से जुड़े मामले में गिरफ्तार ससून अस्पताल के दो चिकित्सकों और एक कर्मी को यहां की स्थानीय अदालत ने 30 मई तक पुलिस की हिरासत में भेज दिया. पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (छोटे मामलों) ए.ए.पांडे की अदालत में पेश किया और 10 दिन तक पुलिस हिरासत में भेजने का अनुरोध किया.
एक अधिकारी ने बताया कि दिन में पुलिस ने सरकारी अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसीन विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय तावड़े और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.श्रीहरि हलनोर को खून के नमूने में बदलाव करने और सबूत को नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया था.
तीसरे गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान अतुल घाटकाम्बले के तौर पर की गई है जो डॉ.तावड़े के अधीन काम करता है. पुलिस ने अदालत को बताया कि खून के नमूनों को बदलने के एवज में पैसों की लेनदेन हुई है और उसे इस मामले में आरोपियों के घरों की तलाशी लेनी है. इसके बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को 30 मई तक के लिए पुलिस की हिरासत में भेज दिया.
पुलिस के मुताबिक 19 मई को एक तेज रफ्तार लग्जरी पोर्श कार ने मोटरसाइकिल सवार दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था जिससे उनकी मौत हो गई थी. पुलिस के मुताबिक कार कथित तौर पर बिल्डर विशाल अग्रवाल का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था और उसने हादसे के समय शराब पी रखी थी. पुलिस ने बताया कि घटना के बाद जांच के वास्ते लिए गए किशोर के रक्त नमूनों को डॉ.तावड़े के निर्देश पर नमूने को कूड़ेदान में डाल दिया गया था और दूसरे व्यक्ति के नमूनों की जांच की गई.
चिकित्सक के निर्देश पर नाबालिग आरोपी के रक्त के नमूने किसी और के नमूनों से बदले गए : पुलिस
पुणे पुलिस ने सोमवार को दावा किया कि कार हादसे में कथित रूप से शामिल 17 वर्षीय लड़के के रक्त के नमूनों को ससून अस्पताल के एक चिकित्सक के कहने पर कूड़ेदान में फेंक दिया गया था और किसी अन्य व्यक्ति के नमूनों को उसके रक्त का नमूना बता दिया गया था. पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि किशोर के पिता ने चिकित्सक से बात की थी और उसे कोई लालच देकर रक्त का नमूने बदलने को कहा था.
पुणे में 19 मई की सुबह तेज रफ्तार से जा रही ‘पोर्श’ कार की टक्कर लगने से दो आईटी पेशेवरों की मौत हो गई थी. यह कार कथित रूप से नाबालिग चला रहा था. पुलिस का दावा है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय किशोर नशे में था. कुमार ने बताया कि उन्होंने ससून अस्पताल के फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. अजय तावड़े और सरकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हालनोर को गिरफ्तार किया है.
उन्होंने कहा, ”जांच में पता चला है कि किशोर के रक्त के नमूनों को किसी अन्य व्यक्ति के नमूनों से बदल दिया गया था और ऐसा डॉ. तावड़े के निर्देश पर किया गया था.” उन्होंने कहा कि डॉ. तावड़े के निर्देश पर किशोर के रक्त के नमूनों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया था और उसकी जगह किसी अन्य व्यक्ति के रक्त के नमूने लिए गए थे. कुमार ने कहा, ”जांच में यह भी पता चला कि किशोर के पिता ने ही डॉ. अजय तावड़े से बात की थी और उन्हें कोई लालच देकर रक्त के नमूने बदलने को कहा था.” अपराध शाखा के एक अन्य अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि किशोर के पिता ने डा तावड़े को कई बार फोन किया .
कुमार ने पुलिस अधिकारी ने कहा कि अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उन्होंने किशोर का एक और नमूना लिया था और इसे किसी अन्य अस्पताल में भेजा गया है. उन्होंने कहा, ”दूसरे अस्पताल की रिपोर्ट से पता चला कि ससून अस्पताल में किशोर के रक्त की रिपोर्ट में हेरफेर किया गया था क्योंकि दोनों रिपोर्ट के डीएनए (रक्त के नमूने) मेल नहीं खाते.” उन्होंने बताया कि दोनों चिकित्सकों को इस बात का अंदाजा नहीं था कि पुलिस ने (आरोपी किशोर का) एक और नमूना लिया होगा. कुमार ने कहा, ”इस बात की जांच की जा रही है कि किसके रक्त के नमूने एकत्र कर किशोर के रक्त के नमूने से बदले गए. हमने ससून अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज बरामद कर लिए हैं और आगे की जांच जारी है.”