राजनाथ सिंह ने आईसीजी के प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को सेवा में शामिल किया

Author: navabharat digital
UPDATED: Mon, 05 Jan 2026 12:08 PM
राजनाथ सिंह ने आईसीजी के प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को सेवा में शामिल किया
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पणजी: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए देश में ही डिजाइन और निर्मित पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को सोमवार को यहां बल की सेवा में शामिल किया। अधिकारियों ने बताया कि यह पोता ‘गोवा शिपयार्ड लिमिटेड’ द्वारा निर्मित है। कुल 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है, पोत का वजन 4,200 टन है और इसकी गति 22 नॉट से अधिक की है।

यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज और बचाव अभियानों और भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पोत को औपचारिक रूप से दिसंबर में जीएसएल में तटरक्षक बल को सौंप दिया गया था।
रक्षा मंत्री सिंह ने सोमवार को दक्षिण गोवा के वास्को स्थित जीएसएल में इस पोत को सेवा में शामिल किया।

इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार ंिसह और आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि उपस्थित थे।
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा, ‘‘ भारत का मानना ??है कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की संपत्ति नहीं हैं बल्कि मानवता की साझा विरासत हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब विरासत साझा होती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी साझा होती है। यही कारण है कि भारत आज एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बन गया है।’’

रक्षा मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना उनकी सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे खुशी है कि इस दिशा में आगे बढ़ते हुए तटरक्षक बल ने महिला सशक्तीकरण पर पूरा ध्यान दिया है और यह हमारे लिए गर्व की बात है।’’ उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों को पायलट, आॅब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और लॉजिस्टिक्स आॅफिसर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर नियुक्त किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ इतना ही नहीं, उन्हें ‘होवरक्राफ्ट’ संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें अग्रिम मोर्चे के अभियानों में सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है। आज महिलाएं न केवल सहायक भूमिकाओं में हैं, बल्कि अग्रिम पंक्ति की योद्धाओं के रूप में भी सेवा में हैं।’’ आईसीजी ने एक बयान में कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का सेवा में शामिल होना पोत एवं समुद्री क्षमता विकास में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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