
चंडीगढ/मुंबई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की कार्रवाई उस संदेश से प्रेरित थी जो भगवान कृष्ण ने पांडवों को दिया था कि युद्ध प्रतिशोध या महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि धर्म के शासन की स्थापना के लिए लड़ा जाना चाहिए.
रक्षा मंत्री ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र, 10वें अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा, “भगवान कृष्ण ने अर्जुन को यह भी सीख दी कि जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता है वह कभी नहीं डरता.” सिंह ने अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि जघन्य कृत्य अब भी राष्ट्रीय चेतना को परेशान करता है.
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने उस समय अमानवीय कृत्य किया जब निर्दोष पर्यटकों को उनका धर्म पूछने के बाद मार दिया गया.
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि वह घटना न केवल भारत के शांतिप्रिय स्वभाव को चुनौती दे रही थी; आतंकवादियों और उनके संरक्षकों ने यह मान लिया था कि भारत का शिष्टाचार उसकी कमजोरी है, लेकिन वे भूल गए कि भारत गीता का देश है, जहां करुणा है और युद्ध के मैदान पर ‘धर्म’ की रक्षा करने की प्रेरणा भी है.” रक्षा मंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत के जवाब के बारे में बात करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से, सशस्त्र बलों ने उन्हें ऐसा कड़ा जवाब दिया है जिसे वे आज तक भूल नहीं पाए हैं.
उन्होंने कहा, “हमने दुनिया को दिखाया कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर वह मजबूर होता है, तो वह भागता नहीं है और एक कड़ा जवाब देता है.” सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि भारत की आत्म-प्रतिबद्धता, आत्म-सम्मान और आत्म-विश्वास की घोषणा थी. रक्षा मंत्री ने कहा, “भगवान कृष्ण ने पांडवों को भी यही समझाया था कि युद्ध प्रतिशोध या महत्वाकांक्षा के लिए नहीं बल्कि धार्मिक शासन की स्थापना के लिए लड़ा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ” … ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, हमने भगवान कृष्ण के संदेश का पालन किया. और इस अभियान ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत न तो आतंकवाद के खिलाफ चुप रहेगा और न ही किसी भी परिस्थिति में कमजोर पड़ेगा. श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को समझाया था कि धर्म केवल उपदेशों से ही नहीं बचता; यह कर्मों से सुरक्षित रहता है, और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ वह धर्म-आधारित कर्म था जिसे हमने अपनाया.” हरियाणा के मंत्री अनिल विज और स्वामी ज्ञानानंद महाराज भी उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने सम्मेलन को संबोधित किया. इस सम्मेलन का संयुक्त रूप से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने आयोजन किया है.
सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है, ऑपरेशन सिंदूर इसका उपयुक्त उदाहरण : जनरल द्विवेदी
थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है और ऑपरेशन सिंदूर इसका उपयुक्त उदाहरण है. वह मुंबई में युद्धपोत आईएनएस माहे के जलावतरण के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. यह माहे श्रेणी के पनडुब्बी-रोधी उथले जल का प्रथम युद्धपोत है.
जनरल द्विवेदी ने कहा, ”हमारे सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है.” उन्होंने कहा कि समुद्र, भूमि और आकाश राष्ट्रीय सुरक्षा की एक सतत श्रृंखला बनाते हैं और थल सेना, नौसेना और वायु सेना मिलकर भारत की सामरिक शक्ति की त्रिमूर्ति हैं. उन्होंने कहा कि बहु-क्षेत्रीय परिचालन के युग में समुद्र की गहराई से लेकर ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों तक एक साथ मिलकर कार्य करने की देश की क्षमता भारतीय गणराज्य के सुरक्षा प्रभाव को निर्धारित करेगी.
उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लद्दाख से लेकर हिंद महासागर तक सूचना युद्ध से लेकर संयुक्त रसद तक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं.
जनरल द्विवेदी ने कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर सशस्त्र बलों के तालमेल का एक उपयुक्त उदाहरण था.” भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी. पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे.
जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने परिवर्तन के व्यापक ढांचे के तहत कई पहल शुरू की हैं, जिनमें संयुक्तता और एकीकरण महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने यह माना है कि आधुनिक संघर्ष बहु-क्षेत्रीय, ‘हाइब्रिड’ होंगे और इसके लिए राष्ट्रीय शक्ति की एकजुटता आवश्यक होगी. एक अधिकारी ने कहा कि यह पहला मौका था जब किसी नौसैन्य पोत के जलावतरण समारोह में सेना प्रमुख उपस्थित थे.
उन्होंने बताया कि आईएनएस माहे के बेड़े में शामिल होने के बाद जनरल द्विवेदी ने उन नौसेना र्किमयों को ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ’ (सीओएएस) प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया, जिन्होंने जहाज़ के जलावतरण में प्रमुख भूमिका निभाई थी. अधिकारी ने कहा कि यह एक असाधारण घटना है लेकिन आने वाले समय में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ रहे तालमेल के साथ यह अधिक सामान्य होती जाएगी.
भारतीय नौसेना पड़ोसी क्षेत्रों के साथ-साथ वैश्विक परिवेश में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहां सेना के प्रयास ‘सॉफ्ट’ और ‘हार्ड’ कूटनीति दोनों में सहायक और पूरक भूमिका निभा सकते हैं. जनरल द्विवेदी ने इसे बुद्धिमत्तापूर्ण कूटनीति बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और भारतीय नौसेना ने हमेशा विश्वभर में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है.



