पश्चाताप करने से अजीत पवार को बारामती से चुनाव जीतने में मदद नहीं मिलेगी: संजय

मुंबई: शिव सेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का अपने कुछ राजनीतिक कदमों पर पश्चाताप करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता को आगामी विधानसभा चुनाव में अपने गृह क्षेत्र बारामती से हार का सामना करना पड़ेगा।

राउत की टिप्पणी तब आई है जब अजित पवार ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में अपनी चचेरी बहन और राकांपा (शरद पवार) नेता सुप्रिया सुले के खिलाफ अपनी पत्नी सुनेत्रा को मैदान में उतारकर गलती की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीति घर में नहीं घुसनी चाहिए। सुले उनके चाचा शरद पवार की बेटी हैं।

अजित पवार के नेतृत्व में राकांपा के एक धड़े ने शरद पवार के खिलाफ एक अलग गुट बना लिया था और फिर वह शिव सेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए थे। अजित पवार ने रविवार को कहा था कि वह एक विधायक के रूप में किए गए विकास कार्यों से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा था कि बारामती के लोगों को एक बार उनके अलावा कोई अन्य विधायक मिलना चाहिए ताकि वे उनके किए गए कामों से नए विधायक के कामों की तुलना कर सकें।

अजीत पवार 1991 से बारामती से विधायक हैं। 2019 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने भाजपा के गोपीचंद पडलकर के खिलाफ 1.65 लाख मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी। राज्य में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं।

उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर राउत ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘शरद पवार और उनकी पार्टी के साथ उन्होंने जो किया, उसका पश्चाताप करने का कोई मतलब नहीं है। अजित पवार निश्चित रूप से बारामती विधानसभा चुनाव हारेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अजित पवार ने राकांपा और पवार परिवार के भीतर ही फूट पैदा कर दी। यहां तक कि उन्होंने उनकी (शरद पवार की) पार्टी और चुनाव चिह्न भी छीन लिया। उन्होंने अपने चाचा की पीठ में छुरा घोंपा जो उसके लिए पिता तुल्य हुआ करते थे।’’ राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा, जो मुंबई के दौरे पर हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें डर है कि ये भाजपा नेता राजनीतिक और वित्तीय रूप से मुंबई को कमजोर करना जारी रखेंगे। संगठनों और संस्थानों जैसी अच्छी चीजों को मुंबई से गुजरात स्थानांतरित करने का लगातार प्रयास किया जाता रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, जो मुंबई में होना था, उसे गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया है।’’ शिवसेना नेता ने कहा, ‘‘हम इन भाजपा नेताओं की ऐसी नीतियों के खिलाफ हैं।’’

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