खुदरा विक्रेताओं का वित्त मंत्री, GST परिषद से 35% की कर दर लागू नहीं करने का आग्रह

नयी दिल्ली. देश भर के व्यापार संघों तथा विक्रेताओं के संगठन इंडियन सेलर्स कलेक्टिव ने वित्त मंत्री और जीएसटी परिषद से जीएसटी दर को युक्तिसंगत बनाने के कुछ सुझावों को स्वीकार नहीं करने का आग्रह किया है. इसमें कुछ उत्पादों पर 35 प्रतिशत की विशेष दर शामिल करने का प्रस्ताव भी शामिल है. विक्रेताओं के संगठन का मानना है कि ऐरेटिड पेय, सिगरेट तथा तंबाकू जैसी अहितकर वस्तुओं पर 35 प्रतिशत कर देश के जीएसटी ढांचे को भौतिक और मौलिक रूप से बदल देगी, जिसके परिणाम विनाशकारी होंगे.

इंडियन सेलर्स कलेक्टिव ने 21 दिसंबर, 2024 को राजस्थान के जैसलमेर में होने वाली 55वीं जीएसटी परिषद की बैठक से पहले बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि ये सिफारिशें इस बात का उल्लंघन करती हैं कि यह एक ”अच्छा और सरल कर” होगा.
इसमें कहा गया, ” इसके विपरीत इससे खुदरा विक्रेताओं का लाभ प्रभावित होगा, अनुपालन संबंधी खतरा उत्पन्न होगा और समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. इस कदम से मुख्य रूप से चीन के उत्पादकों को लाभ होगा जो सस्ते उत्पादों के बाजारों पर पहले ही हावी हैं…” इंडियन सेलर्स कलेक्टिव के सदस्य एवं राष्ट्रीय समन्वयक अभय राज मिश्रा ने कहा कि यदि आगामी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में मंत्री समूह की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है तो जीएसटी व्यवस्था के सभी लाभ समाप्त हो जाएंगे और भारत के विशाल पुराने खुदरा विक्रेता नेटवर्क को स्थायी नुकसान पहुंचेगा.

उन्होंने कहा, ” तंबाकू और ऐरेटिड पेय जैसी वस्तुओं पर 35 प्रतिशत कर लगाने से उनका अवैध बाजार तेजी से बढ़ेगा और बड़ी संख्या में विक्रेता औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर चले जाएंगे. मूल्य निर्धारण आधारित दर संरचना व्यवस्था से बचने के लिए या तो हेरफेर बढ़ेगा या व्यापार मॉडल फिर से तैयार करना पड़ेगा. छोटे तथा मझोले स्तर के विक्रेताओं के लिए इसका मतलब होगा अनुपालन संबंधी परेशानी और मुकदमेबाजी में फंसने का अधिक जोखिम.”

मिश्रा ने कहा, ” परंपरागत भारतीय खुदरा व्यापार पहले से ही ई-कॉमर्स और क्यू-कॉमर्स (त्वरित-वाणिज्य) के कारण नष्ट हो रहा है और जीएसटी में इतना बड़ा बदलाव इसके ताबूत में आखिरी कील होगा. मंत्री समूह को निहित स्वार्थों द्वारा गुमराह किया गया है, जो चाहते हैं कि भारतीय खुदरा विक्रेता कमजोर हो जाएं और उनके एजेंडा के तहत काम करें.” इसमें कहा गया है कि 35 प्रतिशत कर लगाने से ये उत्पाद आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएंगे, जिससे उन्हें तस्करी वाले और नकली बोतलबंद पेय तथा सिगरेट जैसे अवैध, घटिया और असुरक्षित विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. साथ ही, इन वस्तुओं के बाजार पर अवैध तथा तस्करी करने वालों का कब्जा हो जाएगा. इससे छोटे खुदरा विक्रेता उनपर निर्भर हो जाएंगे.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button