RSS से जुड़े संगठन ने बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा की UNHRC टीम से जांच की अपील की

हसीना के अपदस्थ होने के बाद 278 स्थानों पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया : बीएनएचजीए

नयी दिल्ली/ढाका/इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक संगठन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से हिंसाग्रस्त बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों की कथित घटनाओं की जांच के लिए एक तथ्यान्वेषी मिशन तैनात करने की अपील की है. मानवाधिकार परिषद संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक अंतर-सरकारी निकाय है जो विश्व भर में मानवाधिकारों के संवर्द्धन और संरक्षण को मजबूती प्रदान करने के लिये उत्तरदायी है. हिंदू अधिकार संगठन प्रज्ञा प्रवाह ने सार्वजनिक समर्थन मांगने के लिए अपनी अपील के मसौदे के साथ एक सार्वजनिक ऑनलाइन लिंक भी जारी किया है.

संस्था ने यूएनएचआरसी से अपनी अपील में कहा, ”हम, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, वकीलों और चिंतित नागरिकों का एक समूह आपको पत्र लिख रहा है क्योंकि हम परेशान हैं.” उसने संयुक्त राष्ट्र निकाय से आग्रह किया कि वह जमीनी स्थिति का आकलन करने, पीड़ितों से बातचीत करने और हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन का दस्तावेजीकरण करने के लिए तुरंत एक टीम बांग्लादेश भेजे.

प्रज्ञा प्रवाह ने बांग्लादेशी अधिकारियों से ‘हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के जीवन, संपत्ति और गरिमा की रक्षा के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने’ का भी आग्रह किया है और यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि ‘हिंसा के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए’. इसने संयुक्त राष्ट्र निकाय से ‘शरण मांगने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग की सुविधा’ और आवश्यक मानवीय सहायता प्रदान करने की भी अपील की है. प्रज्ञा प्रवाह ने यूएनएचआरसी से अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और अपनी आजीविका खो चुके लोगों के जीवन के पुर्निनर्माण के लिए एक पहल शुरू करने की भी अपील की है.

हसीना के अपदस्थ होने के बाद 278 स्थानों पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया : बीएनएचजीए

बांग्लादेश में हिंदुओं के शीर्ष निकाय ने मंगलवार को कहा कि पांच अगस्त को शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को 48 जिलों में 278 स्थानों पर हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है. उसने इसे ”हिंदू धर्म पर हमला” करार दिया.

‘बांग्लादेश नेशनल हिंदू ग्रैंड अलायंस’ (बीएनएचजीए) के सदस्यों ने हाल के दिनों में हमलों में वृद्धि की ओर इशारा करते हुए कहा कि ”इस देश में हमारे भी अधिकार हैं, हम यहीं पैदा हुए हैं.” प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद से हटने के बाद कई दिनों तक जारी हिंसा में अल्पसंख्यक हिंदू आबादी को निशाना बनाया गया और उनके संपत्तियों की लूटपाट के साथ कई मंदिरों को भी नष्ट कर दिया गया. शेख हसीना पांच अगस्त को देश छोड़कर भारत चली गई थीं.

बीएनएचजीए की प्रेस वार्ता उसी दिन हुई जब नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने यहां प्रसिद्ध ढाकेश्वरी मंदिर में हिंदू समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की और लोगों से उनकी सरकार के प्रति धारणा बनाने से पहले ‘धैर्य रखने’ का आग्रह किया. यूनुस ने आठ अगस्त को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला.

बीएनएचजीए के प्रवक्ता और कार्यकारी सचिव पलाश कांति डे ने कहा, ”बदलते राजनीतिक परिदृश्य के कारण हिंदू समुदाय पर हमला, लूटपाट, आगजनी, भूमि हड़पने और देश छोड़ने की धमकियों की घटनाएं बार-बार हो रही हैं.” उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, ”यह सिर्फ व्यक्तियों पर हमला नहीं है बल्कि हिंदू धर्म पर हमला है.” डे ने ‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार में प्रकाशित खबर के हवाले से कहा, ”सोमवार तक 48 जिलों में 278 स्थानों पर हिंदू समुदाय के खिलाफ हमले और धमकी देने की घटनाएं हुई हैं. हमने गृह मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) एम सखावत हुसैन को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है, जिन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि इन मुद्दों को अगली कैबिनेट बैठक में उठाया जाएगा.”

प्रवक्ता ने कहा कि बीएनएचजीए ने पिछले 24 वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं, लेकिन वे पूरी नहीं हुईं. उन्होंने कहा, ”अब हमें उम्मीद है कि अंतरिम सरकार हमारी पुरानी मांगों पर ध्यान देगी. इसके अलावा, हम अपने छात्रों के नेतृत्व में चल रहे देशव्यापी आंदोलन का समर्थन करते हैं.” बीएनएचजीए के अध्यक्ष प्रभास चंद्र रॉय ने राजनीतिक बदलाव के समय हिंदू समुदाय के खिलाफ बार-बार होने वाली हिंसा पर दुख व्यक्त किया और कहा, ”जब भी सरकार बदलती है, तो सबसे पहले हिंदुओं पर हमला होता है.”

उन्होंने कहा, ”पहले ऐसी घटनाएं कम होती थीं, लेकिन हाल में इनमें वृद्धि हुई है. हम इस देश में सुरक्षा के साथ रहना चाहते हैं. हम यहीं पैदा हुए हैं और इस देश में हमारे अधिकार हैं.” बीएनएचजीए द्वारा यह संवाददाता सम्मेलन सरकार के समक्ष सात मांगें रखने के एक दिन बाद बुलाया गया. बीएनएचजीए ने सरकार से हिंदू समुदायों पर हाल के हमलों की न्यायिक जांच कराने, अल्पसंख्यक संरक्षण अधिनियम और आयोग का गठन करने तथा सार्वजनिक खर्च पर मंदिरों और घरों का जीर्णोद्धार कराने की मांग की है. ‘ढाका ट्रिब्यून’ की खबर के मुताबिक संगठन ने दोषियों के लिए शीघ्र सुनवाई और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, वर्ष 2000 से अब तक अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार की रिपोर्ट जारी करने, दुर्गा पूजा के दौरान तीन दिन की छुट्टी और अल्पसंख्यक मंत्रालय की स्थापना की भी मांग की है.

मप्र के मुख्यमंत्री ने ”बेताल पच्चीसी” के हवाले से बांग्लादेश के हालात पर टिप्पणी की

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्राचीन कहानियों की मशहूर पुस्तक ”बेताल पच्चीसी” की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए तख्तापलट से गुजरे बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर मंगलवार को टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अव्यवस्था फैलने पर विद्वान अपनी जगह छोड़कर एकांत में चले जाते हैं. ”बेताल पच्चीसी” उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य और बेताल नाम के किरदार की 25 कहानियों पर आधारित किताब है.

यादव ने इंदौर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा,”बेताल पच्चीसी की कुल 25 कहानियों का सार यही है कि बेताल बहुत बुद्धिमान है, लेकिन जब आक्रांताओं के कारण विक्रमादित्य के पिता का राज-पाट चला जाता है, तो बेताल उनका राज्य छोड़कर एकांत में रहने चला जाता है.”

उन्होंने कहा,”जैसे हम आज बांग्लादेश या अफगानिस्तान में हालात देख रहे हैं. जब अव्यवस्था फैलती है, तब विद्वान लोग अपनी जगह छोड़कर एकांत में चले जाते हैं. उस दौर में बेताल भी अपनी जगह छोड़कर एकांत में चला गया था.” उज्जैन, यादव का गृहनगर है. वह अपने भाषणों में प्राचीन उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य की गाथाओं का अक्सर जिक्र करते हैं. मुख्यमंत्री ने ”बेताल पच्चीसी” की शिक्षाओं के हवाले से यह भी कहा कि कोई राज्य विकास की राह पर तब आगे बढ़ता है, जब वह अलग-अलग स्थानों पर बिखरी उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमताओं को एक जगह जमा करता है.

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