आरएसएस एक संगठन नहीं बल्कि नव उत्थान का अभियान: होसबाले

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 25 Sep 2024 09:45 PM
आरएसएस एक संगठन नहीं बल्कि नव उत्थान का अभियान: होसबाले
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जैसलमेर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को कहा कि आरएसएस केवल एक संगठन मात्र नहीं बल्कि भारत के ‘नवउत्थान का एक अभियान’ है. राष्ट्र जीवन का महत्वपूर्ण आंदोलन है. उन्होंने कहा कि ”उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रहे के. टी. थॉमस ने पिछले दिनों आरएसएस को परिभाषित करते हुए कहा कि यह भारत में लोकतंत्र की सुरक्षा की गारंटी है. सेना और पुलिस के समकक्ष आरएसएस देश का सुरक्षा कवच है.” उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति थॉमस के शब्दों से आरएसएस की भूमिका को आसानी से समझा जा सकता है.

जैसलमेर प्रवास के दौरान बुधवार को शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में आयोजित आरएसएस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबाले ने कहा कि 1925 में नागपुर के छोटे से स्थान से शुरू हुआ संघ कार्य देश के सभी राज्यों, जिलों में पहुंच चुका है और इसे देश के प्रत्येक मंडल व बस्ती तक पहुंचाने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में आमजन आरएसएस का मखौल उड़ाते थे लेकिन स्वयंसेवकों के त्याग और समर्पण से निर्मित यह संगठन विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहा है.

होसबाले ने ‘हिन्दू राष्ट्र’ की अवधारणा पर कहा कि ”हिंदू केवल एक धर्म नहीं अपितु जीवन पद्धति है. यही संगठित विचार लेकर स्वामी विवेकानंद ने धर्म का प्रचार किया. ऐसे महापुरुषों की प्रेरणा से आरएसएस ने देश के आमजन में विश्वास जगाया कि हिंदू एक हो सकता है.” आरएसएस द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक होसबाले ने कहा, ”हिंदुत्व को लेकर शुरू में लोग कहते थे कि यह साम्प्रदायिक है. संकुचित भाव है. परंतु आरएसएस ने समझाया कि हिंदू सम्प्रदाय नहीं एक जीवन दर्शन है. हिंदुत्व मानवता के उद्धार के लिए देश के ऋषि-मुनियों, साधु-संतों ने कठोर तप कर मानव कल्याण के कार्य किये.”

संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि मनुष्य को कैसे जीना चाहिए. प्रकृति व जीव-जंतुओं को संरक्षण हिंदुत्व में ही निहित है और यह सनातनी व्यवस्था है. यही वजह है कि आज हिंदू जीवन दर्शन की कई बातों को विश्वभर में मान्यता मिल रही है. योग और आयुर्वेद के विचार को विदेशी भी अपनाने लगे हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस अपने कार्यकर्ताओं की मेहनत से लोगों का विश्वास जीत रहा है. संघ के सरकार्यवाह ने अपने संबोधन की शुरुआत पंडित दीन दयाल उपाध्याय को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए की.

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