
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमले और उससे जुड़े सीबीआई मामलों के प्रमुख गवाहों में शामिल भोलानाथ घोष ने अपने बेटे और कार चालक की मौत के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को ‘सुनियोजित हत्या’ का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिससे साजिश की अटकलें तेज हो गईं.
घोष ने अपनी शिकायत में आठ लोगों का नाम लिया है और अपने वकील कालीचरण मंडल के साथ पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के नाज़ात स्थित राजबारी पुलिस चौकी पर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की, लेकिन आरोपियों के नाम बताने से इनकार कर दिया. वहीं, इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जेल में बंद तृणमूल नेता शेख शाहजहां का नाम भी इसमें शामिल है.
वरिष्ठ जिला पुलिस अधिकारियों ने इस संभावना को सिरे से खारिज नहीं किया और केवल इतना कहा कि “सभी विवरण जांच का हिस्सा होंगे.” इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय जांच की मांग की.
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि इस घटना ने जेल के अंदर की स्थिति की “वास्तविकता को उजागर” कर दिया है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “इससे साबित होता है कि शाहजहां जेल में होने के बावजूद बेहद सक्रिय है. उन्हें जेल के अंदर वीआईपी देखभाल मिल रही है. यह हादसा दर्शाता है कि बंगाल में कानून व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है.’’ वहीं तृणमूल ने इन आरोपों को खारिज किया है.
पार्टी नेता बैसवानोर चट्टोपाध्याय ने कहा, ‘‘ये आरोप निराधार हैं. विपक्ष एक त्रासदी का राजनीतिकरण कर रहा है. निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी.’’ बुधवार सुबह, घोष अपने छोटे बेटे सत्यजीत (32) के साथ बसीरहाट अदालत जा रहे थे, जहां उन्हें संदेशखाली से जुड़े सीबीआई मामले की कार्यवाही में गवाही देने के लिए बुलाया गया था.
बशीरहाट के नाजत थाना क्षेत्र में बोयरमारी पेट्रोल पंप के पास बसंती राजमार्ग पर 16 पहियों वाले ट्रक ने घोष की कार को अपनी चपेट में ले लिया. ट्रक घोष की कार को कुछ दूर तक घसीटता ले गया, जिसके बाद वह राजमार्ग के किनारे स्थित जलाशय में जा गिरी. इस हादसे में घोष के छोटे बेटे सत्यजीत (32) और उनकी कार के चालक साहनूर मोल्ला (27) की मौत हो गई.
अधिकारी के अनुसार, ट्रक को राजमार्ग के किनारे जलाशय के ऊपर खतरनाक तरीके से लटका हुआ पाया गया, जबकि दोषी चालक मौके से फरार हो गया. घटना के लगभग 24 घंटे बाद बृहस्पतिवार को परिवार ने औपचारिक रूप से पुलिस से संपर्क किया. देरी के बारे में पूछे जाने पर वकील मंडल ने कहा, “भोलानाथ शोक में डूबे थे. उन्होंने अपने बेटे को खो दिया था, वे घायल भी हुए थे. इसीलिए आज प्राथमिकी दर्ज की गई.’’ पुलिस ने मामला दर्ज होने की पुष्टि की.
बंगाल में संदेशखाली मामले के गवाह से संबंधित सड़क हादसा लक्षित हमला था: भाजपा
भाजपा ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि वर्तमान में जेल में बंद तृणमूल कांग्रेस नेता शेख शाहजहां ने उस ‘‘लक्षित हमले’’ की साजिश रची थी, जिसमें उनके खिलाफ मामले का एक प्रमुख गवाह घायल हो गया और उनकी बेटे की मौत हो गई. बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर शाहजहां को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए, भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तत्काल इस्तीफे की मांग की. पार्टी ने यह भी मांग की कि मामले के सभी गवाहों को उच्चतम न्यायालय की निगरानी में केंद्रीय बलों द्वारा तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए. भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों पर तृणमूल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
पुलिस के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में बुधवार को एक ट्रक की टक्कर में भोलानाथ घोष घायल हो गए. घोष संदेशखाली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए हमले और शाहजहां के खिलाफ सीबीआई के एक मामले में प्रमुख गवाहों में से एक हैं. पुलिस ने बताया कि बसीरहाट के नाज़त पुलिस थाना क्षेत्र में बोयरमारी पेट्रोल पंप के पास बसंती राजमार्ग पर हुए हादसे में घोष के छोटे बेटे सत्यजीत (32) और उनकी कार के चालक सहानुर मोल्ला (27) की मौत हो गई.
यहां भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘‘यह कोई हादसा नहीं था, बल्कि शेख शाहजहां के इशारे पर किया गया एक सुनियोजित और लक्षित हमला था.’’ पूनावाला ने कहा कि शाहजहां, जो वर्तमान में जेल में बंद हैं, संदेशखाली मामले सहित 40 आपराधिक मामलों में आरोपी हैं.
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल सरकार ऐसे अपराधी को इस हद तक संरक्षण दे रही है कि उन्होंने जेल में बंद रहने के दौरान भी उस गवाह पर हमले की साजिश रची जो मामले में गवाही देने के लिए अदालत जा रहा था.’’ भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ उच्चतम न्यायालय की निगरानी में घटना की विस्तृत जांच की जानी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि शेख शाहजहां का तृणमूल के साथ आर्थिक, कानूनी और राजनीतिक रूप से अभी भी क्या संबंध है.’’



