चीन के साथ पूर्वी सीमा पर हालात स्थिर, लेकिन सीमा अपरिभाषित होने के चलते पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता : कालिता

कोलकाता. पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल आर पी कालिता ने कहा कि चीन के साथ पूर्वी सीमा पर हालात “स्थिर” हैं, लेकिन सीमा के बारे में अपरिभाषित धारणाओं के कारण उसको लेकर पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है. अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की निगरानी का जिम्मा पूर्वी कमान पर है. लेफ्टिनेंट जनरल कालिता ने यह भी कहा कि सेना सीमा पार गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रही है और किसी भी उभरती चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

उन्होंने कहा, ‘‘पूरी समस्या इस तथ्य से उत्पन्न होती है कि भारत और चीन की सीमा अपरिभाषित है. वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में अलग-अलग धारणाएं हैं, जिनसे समस्याएं पैदा होती हैं.’’ उन्होंने कहा, “हालांकि, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पूर्वी सीमा पर स्थिति स्थिर है, लेकिन उसको लेकर पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है और इसका कारण सीमाओं का निर्धारण नहीं होना है.” लेफ्टिनेंट जनरल कालिता प्रेस क्लब (कोलकाता) में ‘‘मीट द प्रेस’’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
नौ दिसंबर को तवांग सेक्टर के यांग्त्से में एलएसी पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प के बाद भारत व चीन के बीच तनाव बढ़ गया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 दिसंबर को संसद में कहा था कि चीनी सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति बदलने का एकतरफा प्रयास किया, जिसका भारतीय जवानों ने दृढ़ता से जवाब दिया और उन्हें लौटने के लिए मजबूर कर दिया. पूर्वी कमान के प्रमुख कहा, “हमने उन खबरों को पढ़ा है, जिसमें कहा गया है कि हमारे सेक्टर के सामने (चीन द्वारा) सैनिकों की तैनाती में वृद्धि की गई है….” उन्होंने कहा कि एलएसी पर भारतीय सेना की तैयारी का स्तर “उच्च स्तर पर” बना हुआ है, और किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रत्येक सेक्टर में पर्याप्त बल हैं.

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