
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने कुछ प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में छात्रों के प्लेसमेंट और वेतन में गिरावट संबंधी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोमवार को दावा किया कि बड़े पैमाने पर बेरोजग़ारी और वेतन में स्थिरता की जद में अब भारत के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र भी आ गए हैं.
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कैंपस प्लेसमेंट के ज.रिये अंतिम वर्ष के बी . टेक छात्रों को मिलने वाले प्लेसमेंट के प्रतिशत और औसत वेतन पैकेज में काफी गिरावट आई है. रमेश ने ‘ एक्स ‘ पर पोस्ट किया , ” आईआईटी संस्थानों के नए आंकड़े हैं , जिन्हें मोदी सरकार ने संकलित तो किया , लेकिन प्रकाशित नहीं किया. कैंपस प्लेसमेंट के ज.रिये अंतिम वर्ष के बी . टेक छात्रों को मिलने वाले प्लेसमेंट के प्रतिशत और औसत वेतन पैकेज में काफी गिरावट दर्शाते हैं. ” उन्होंने कहा कि 2021-22 और 2023-24 के बीच सात सबसे पुराने आईआईटी संस्थानों से प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या में 11 प्रतिशत की गिरावट और वेतन में 0.2 लाख रुपये की गिरावट देखी गई.
कांग्रेस महासचिव के अनुसार , ” आठ सबसे पुराने आईआईटी संस्थानों में प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या में नौ प्रतिशत अंकों की गिरावट और वेतन पैकेज में 2.2 लाख रुपये की गिरावट देखी गई. आठ सबसे नए आईआईटी संस्थानों में प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या में 7.3 प्रतिशत अंकों की गिरावट और वेतन पैकेज में एक लाख रुपये की गिरावट देखी गई. ” रमेश ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर बेरोजग़ारी और वेतन में स्थिरता की दोहरी समस्याएं स्पष्ट रूप से भारत के सबसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों तक भी पहुंच गई हैं.
जब प्रदूषण पर सरकार खुद विफल है तो लोगों को अपना फर्ज निभाना पड़ता है: कांग्रेस
कांग्रेस ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि जब सरकार अपने कर्तव्य में बुरी तरह विफल हो रही है, तो लोगों को अपना फर्ज निभाना ही होगा. दिल्ली पुलिस ने रविवार को इंडिया गेट के निकट ऐसे कई लोगों को हिरासत में ले लिया था जो प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “प्रतिष्ठित इंडिया गेट कर्तव्य पथ पर है. इस पथ का नया नाम स्वयं प्रधानमंत्री ने रखा है. दिल्ली के नागरिक जो बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए विरोध कर रहे हैं, वे केवल भारत के संविधान के उस अनुच्छेद 51-ए (जी) के तहत अपना कर्तव्य निभाना चाहते हैं जो उन्हें “पर्यावरण की रक्षा और सुधार” का अधिकार देता है.” उन्होंने सवाल किया कि दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें भयावह वायु गुणवत्ता पर अपनी चिंता दर्ज करने से क्यों रोका जा रहा है? रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा, “जब सरकार अपने कर्तव्य में बुरी तरह विफल हो रही है, तो लोगों को अपना फर्ज निभाना ही होगा.”



