सरकार ने देश के लोगों का मजाक उड़ाया है: महुआ मोइत्रा

मोइत्रा ने सरकार पर तंज कसा: 'आप कुर्सी बचाने में मस्त हैं, देश को भी देखिए'

नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट में जो भी छोटे-मोटे बदलाव किए गए हैं, वे बिना सोचे-विचारे और प्रतिगामी हैं. लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मोइत्रा ने बजट की आलोचना की और कहा कि सरकार आम लोगों की जरूरतें पूरी करने में विफल रही है.

तृणमूल सदस्य ने कहा, “लोग सुधार चाहते थे, लेकिन आपने (सरकार ने) बिल्कुल उल्टा किया. आपने वही कैबिनेट, वही वित्त मंत्री रखा, जिन्होंने वही घटिया बजट दिया है.” उन्होंने कहा, “वित्त मंत्री ने बजट में ज्यादातर प्रावधानों को बरकरार रखते हुए भारत के लोगों का मजाक उड़ाया है. (इतना ही नहीं) जो भी छोटे-मोटे बदलाव हैं, वे प्रतिगामी और बिना सोचे-समझे किए गए हैं.” मोइत्रा ने मध्यम वर्ग और गरीबों पर बजट के प्रतिकूल प्रभाव को उजागर करते हुए इसके उद्देश्य पर सवाल उठाया.

उन्होंने पूछा, ”यह बजट किसके लिए है? मध्यम वर्ग भारत का 31 प्रतिशत हिस्सा है और गरीबों की संख्या 60-65 प्रतिशत है. यह बजट व्यवस्थित रूप से दोनों समूहों का गला घोंट रहा है.” उन्होंने कहा, “यह इस सरकार के लिए ‘कुर्सी बचाने’ वाला बजट है और इसमें भी सरकार बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है.” मोइत्रा ने कर प्रणाली में असंतुलन को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्यक्ष कर प्रगतिशील होते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर प्रतिगामी.

उन्होंने कहा, “भारत में यह बिल्कुल विपरीत है (क्योंकि) कर संग्रह का 65 प्रतिशत अप्रत्यक्ष करों से आता है, जहां अरबपति सबसे गरीब मजदूरों के बराबर भुगतान करते हैं और केवल 35 प्रतिशत हिस्सा प्रत्यक्ष करों से आता है.” उन्होंने कहा, ”हमारे देश के इतिहास में पहली बार वेतनभोगी वर्ग अमीर कॉरपोरेट घरानों की तुलना में अधिक कर का बोझ साझा कर रहा है. मध्यम वर्ग इस सरकार के तहत प्रत्यक्ष आयकर में 55 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जबकि सबसे अमीर वर्ग केवल 45 प्रतिशत का योगदान देता है.” उन्होंने कहा कि इस बजट के जरिये न केवल मध्यम वर्ग पर कर लगाया जा रहा है, बल्कि उनकी बचत पर भी कर लगाया गया है, जिसमें ‘इंडेक्सेशन’ को हटा दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस की सांसद ने जीवन और चिकित्सा बीमा पर उच्च जीएसटी दरों की भी निंदा की.

उन्होंने कहा, ”जीवन और चिकित्सा बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है. वित्त राज्य मंत्री ने इस सदन को बताया कि सरकार ने 2023-24 में स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी के रूप में 8,263 करोड़ रुपये एकत्र किए. इसे हटा दिया जाना चाहिए.” मोइत्रा ने सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए सरकार के कम बजटीय प्रावधान की आलोचना करते हुए कहा कि मुद्रास्फीति को यदि समायोजित कर दिया जाए तो उस लिहाज से पिछले एक दशक में बजट में 25 प्रतिशत की कमी आई है.

उन्होंने कहा, ”सर्व शिक्षा अभियान में 18 प्रतिशत की कमी आई है, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में नौ प्रतिशत, आईसीडीएस में 34 प्रतिशत, मिशन आंगनवाड़ी में पांच प्रतिशत और पीएम पोषण आहार योजना में 45 प्रतिशत की कमी आई है.” मोइत्रा ने चेतावनी दी कि सरकार अपनी स्थिति सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रही है. मोइत्रा ने रक्षा बजट में कटौती को लेकर सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार कुर्सी बचाने में मस्त है. उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में अपने ”देश की सीमा की ओर” ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा बजट में व्यापक कटौती की है, साथ ही इसने चीन के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल करने के लिए भी कुछ नहीं किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से भी सीमा पर समान स्थिति है. उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ”आप कुर्सी बचाने में मस्त हैं, देश को भी देखिए.” मोइत्रा ने कहा कि केंद्र सरकार की कर प्रणाली प्रतिगामी है और मौजूदा वित्त वर्ष के लिए किये गये कर प्रावधान मध्यम वर्ग के लिए नुकसानदायक और अमीरों एवं कॉरपोरेट घरानों के लिए लाभदायक हैं.

उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को ‘युक्तिपूर्ण’ बनाने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में संतुलन बनाये रखना जरूरी है, लेकिन सरकार इस मामले में चूक गई है. उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स में की गयी कटौती को गलत निर्णय करार देते हुए कहा कि देश का मध्यम वर्ग कर के बोझ तले कराह रहा है, लेकिन सरकार इसी वर्ग का अधिक शोषण कर रही है, जबकि कॉरपोरेट कंपनियों को छूट दी जा रही है. तृणमूल सांसद ने मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के तहत कृषि उपकरणों एवं संबंधित चीजों पर कर लगाने को प्रतिगामी फैसला करार देते हुए कहा कि जनता केंद्र की कर नीतियों से परेशान है और इसे खत्म किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का बहुत ही खराब रिकॉर्ड रहा है. उन्होंने कहा कि वास्तविक समस्या यह है कि युवा इतने निरुत्साहित हो गये हैं कि उन्होंने नौकरियों की तलाश ही छोड़ दी है. कांग्रेस के तनुज पुनिया ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ.ती जा रही है तथा अमीर आदमी और अधिक अमीर बनता जा रहा है एवं गरीब और अधिक गरीबी में धंस रहा है. उन्होंने नयी कर व्यवस्था की आलोचना की.

वाईएसआरसीपी के सांसद वाई एस अविनाश रेड्डी ने कृषि यंत्रों एवं संबंधित कलपुर्जों से जीएसटी हटाने की मांग की. उन्होंने जीवन बीमा एवं साधारण बीमा पॉलिसियों को भी जीएसटी से मुक्त करने की मांग की. रेड्डी ने विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र का निजीकरण न करने का अनुरोध भी किया. द्रमुक के अरुण नेहरू ने पूर्वोदय योजना में तमिलनाडु को भी शामिल किये जाने का अनुरोध किया.

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