
पणजी. लेखिका-निर्देशक ताहिरा कश्यप खुराना ने कहा है कि वह अपने जीवन में शुरू से एक कहानीकार रही हैं, लेकिन निर्देशक बनने का उनका सफर आशंकाओं से भरा रहा है. उन्होंने अपनी पुस्तकों, ‘द 12 कमांडेंट्स आॅफ बीइंग ए वुमन’ और ‘द 7 सिन्स आॅफ बीइंग ए मदर’ में बहुत ही मजेदार तरीके से महिलाओं का चित्रण किया है. उन्होंने कहा कि बचपन से ही कहानियां लिखने में उनकी रूचि रही है.
ताहिरा ने कहा, ‘‘मैं एक कहानीकार हूं. मैं बचपन में कहानियां सुनाया करती थी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कहानी बयां करने में अच्छा लगता है, चाहे यह थियेटर, रेडियो, पॉडकॉस्ट, उपन्यास, शॉर्ट फिल्म और अब फीचर फिल्म ही क्यों ना हो. मैं अपने जीवन में शुरू से ही कहानीकार रही हूं और मुझे यह मुकम्मल तौर पर पसंद है.’’ ताहिरा ने कहा कि उन्होंने अपने अंतर्मन की आवाज सुनी और अपने पति, अभिनेता आयुष्मान खुराना के सहयोग से 2017 में अपनी पहली ‘शॉर्ट’ फिल्म ‘टॉफी’ बनाई.
उन्होंने बताया, ‘‘मैंने यह फिल्म बनाने के लिए अपने पति से पैसे उधार लिये थे.’’ ताहिरा ने दो और शॉर्ट फिल्म ‘पिन्नी’ और ‘क्वैरेंटीन क्रश’ भी बनाई है. उन्होंने अपनी पहली फीचर फिल्म ‘शर्माजी की बेटी’ की शूंिटग भी पूरी कर ली है. उन्होंने यहां इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आॅफ इंडिया (इफी) के 53वें सत्र से इतर फिल्म बाजार में एक कार्यक्रम में भाग लिया.



