पहलगाम आतंकी हमले में पति व बेटे को खोने वाली महिला ने कहा : पाक का पूरी तरह हो सफाया

Author: navabharat digital
UPDATED: Wed, 07 May 2025 08:34 PM
पहलगाम आतंकी हमले में पति व बेटे को खोने वाली महिला ने कहा : पाक का पूरी तरह हो सफाया
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अहमदाबाद/अनंतनाग/बालासोर/चंडीगढ/मुंबई/नयी दिल्ली/ईटानगर/शिवमोग्गा. पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति और पुत्र को खोने वाली एक महिला ने बुधवार को ‘आॅपरेशन ंिसदूर’ के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। गुजरात के भावनगर की काजलबेन परमार ने सरकार से अनुरोध किया कि जब तक पाकिस्तान का सफाया नहीं हो जाता, उसके खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए।

सूरत की रहने वाली एक अन्य महिला, जिनके पति की भी आतंकी हमले में मौत हो गई थी, ने सेना की कार्रवाई पर खुशी जताई और कहा कि उसे सरकार पर पूरा भरोसा है। काजलबेन परमार ने भावनगर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘पाकिस्तान पर हवाई हमले को लेकर मुझे बहुत गर्व है। मैं सशस्त्र बलों को सलाम करती हूं और भारत माता की जयकार करती हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आभारी हूं और इस हमले से बहुत खुश हूं। ऐसे हमले जारी रखें और पाकिस्तान को मिटा दें, मोदी साहब से यही मेरी प्रार्थना है।’’

पहलगाम आतंकी हमले में उनके पति यतीश परमार और बेटे स्मित की भी मौत हो गयी थी। 22 अप्रैल के आतंकी हमले में गुजरात के तीन लोगों की मौत हो गयी थी। काजलबेन परमार ने कहा, ‘‘मेरा बेटा 12वीं कक्षा में था। वह अक्सर मुझसे कहता था कि वह भारतीय सेना में शामिल होना चाहता है और देश के लिए लड़ना चाहता है। लेकिन उससे पहले, हम मोरारी बापू की राम कथा में भाग लेने के लिए कश्मीर गए और पहलगाम गए, जहां उन लोगों ने (आतंकवादियों ने) मेरे बेटे और पति को मार डाला।

मैं पाकिस्तान का सफाया होते देखना चाहती हूं।’’ काजलबेन के बड़े बेटे अभिषेक परमार ने कहा कि वह पहलगाम आतंकवादी हमले के 15वें दिन पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई से बहुत खुश है। अभिषेक ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने 15वें दिन पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की। मैंने अपने पिता और भाई को खो दिया। अब मोदी ने उन्हें जवाब दे दिया है और मैं इस बात से खुश हूं।’’

दिवंगत शैलेश कलाथिया की पत्नी शीतलबेन कलाथिया ने संवाददाताओं से कहा कि वह पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कार्रवाई से ‘‘बहुत संतुष्ट’’ हैं। उन्होंने सूरत में कहा, ‘‘मोदी सरकार ने उन लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए जो कुछ भी किया है, उससे मैं बहुत खुश हूं, जिन्होंने ंिहदू और मुसलमान के नाम पर मेरे पति और अन्य लोगों की जान ले ली।

हमें सरकार पर पूरा भरोसा है और उसने अब तक जो कुछ भी किया है, वह उचित है।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य को छीन लिया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अब तक इस बात को स्वीकार नहीं कर पाई है कि उसकी आंखों के सामने उसके पिता के साथ क्या हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘हम तबाह हो गए हैं। हम गुजरात सरकार से अपील करते हैं कि वह हमारे बच्चों के भविष्य और शिक्षा के लिए जो कुछ कर सकती है, करे। मैं पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई से बहुत खुश हूं।’’

मेरे बेटे की हत्या का बदला है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ : पहलगाम हमले में मारे गए आदिल के पिता

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की रक्षा करते हुए अपने जान गंवाने वाले सैयद आदिल हुसैन शाह के पिता ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी शिविरों पर सैन्य कार्रवाई ने उनके बेटे की हत्या का बदला लिया है. पहलगाम के बैसरन में आदिल हुसैन शाह खच्चर पर पर्यटकों को घुमाता था. शाह के परिवार ने जवाबी कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सशस्त्र बलों का आभार व्यक्त किया.

शाह के पिता सैयद हैदर शाह ने यहां ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, “मैं आज बहुत खुश हूं कि सेना और (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी ने 26 लोगों की हत्या का बदला लिया है. मुझे खुशी है कि उनकी (हमले में मारे गये लोगों की) आत्मा को आज शांति मिलेगी.” शाह के भाई सैयद नौशाद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके और अन्य 25 परिवारों को न्याय दिलाया है. नौशाद ने कहा, “अब, मेरे भाई और 25 अन्य निर्दोष लोगों की आत्मा को शांति मिलेगी. जब मुझे आज (बुधवार को) सुबह पता चला कि मोदी ने हत्याओं का बदला लिया है, तो मुझे खुशी हुई. हमें अब न्याय मिला है और हम बहुत खुश हैं.”

‘आतंकवादियों को अब जान की कीमत समझ में आएगी: प्रिया दर्शनी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में अपने पति को खो चुकीं ओडिशा की प्रिया दर्शनी आचार्य ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा की गई कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि अब आतंकवादियों को समझ आएगा कि इंसान की जान की कीमत क्या होती है. प्रिया के पति प्रशांत सत्पथी 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे.

उन्होंने बालासोर जिले के ईशानी गांव में स्थित अपने घर में संवाददाताओं से कहा, ह्लमैं बहुत प्रसन्न हूं और सरकार को धन्यवाद देती हूं कि उसने इतना साहसिक कदम उठाया. जब मैं अपने पति के शव के पास थी, तो सेना के जवानों ने मुझे आश्वस्त किया था कि कार्रवाई होगी और आज वह आश्वासन पूरा हुआ.ह्व उन्होंने कहा, ह्लमैं इसलिए खुश हूं क्योंकि अब आतंकवादियों को समझ आएगा कि एक इंसान की जान कितनी अनमोल होती है. मेरे पति का बलिदान व्यर्थ नहीं गया.ह्व भारतीय सशस्त्र बलों ने बुधवार तड़के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पीओके में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर अड्डे और लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके अड्डे सहित नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए.

ऑपरेशन के नाम की सराहना करते हुए प्रिया ने कहा, ह्लआतंकवादियों ने कई महिलाओं के माथे का सिंदूर मिटा दिया और अब उन्हें सही सजा मिली है.ह्व उन्होंने कहा, ह्लमेरे पति वापस नहीं आ सकते, लेकिन मैं चाहती हूं कि ऐसा हमला अब दुनिया के किसी भी कोने में कभी न हो.ह्व पति की मौत के मातम में डूबी प्रिया ने बताया कि उन्हें सरकार की कार्रवाई पर भरोसा था, लेकिन समय को लेकर बेचैनी थी.

आतंकवादी कुछ भी करने से पहले 100 बार सोचेंगे: पहलगाम हमले में मारे गए नरवाल के पिता ने कहा

पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता राजेश नरवाल ने पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ भारत की कार्रवाई की बुधवार को सराहना की और कहा कि मोदी सरकार ने एक कड़ा संदेश दिया है तथा अब 22 अप्रैल के हमले के साजिशकर्ता भविष्य में ऐसे हमले दोहराने से पहले ”100 बार सोचेंगे.” भारतीय सशस्त्र बलों ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए मंगलवार देर रात पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ. बहावलपुर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का ठिकाना भी शामिल है.

राजेश नरवाल ने करनाल में अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, ”जब यह (पहलगाम) घटना हुई थी, तब भी आप (मीडिया) मेरे घर आए थे और पूछा था कि मुझे सरकार से क्या उम्मीद है. मेरा जवाब था कि मुझे अपनी सरकार पर भरोसा है. और आज सरकार ने उस भरोसे को सही साबित किया है.” उन्होंने कहा, ”मैंने कहा था कि ऐसा (जवाबी हमला) किया जाना चाहिए ताकि कोई दोबारा ऐसा कायराना कृत्य करने की हिम्मत न कर सके… (पाकिस्तान और पीओके में) आतंकी ठिकानों पर किए गए हमले हमेशा उनके दिमाग में गूंजते रहेंगे.” मिशन के नाम पर पूछे गए सवाल के जवाब में राजेश ने कहा, ”इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा जाना एकदम उपयुक्त है.” वहीं, नरवाल की मां आशा ने करनाल में संवाददाताओं से कहा, ”यह बिलकुल सही किया कि (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी ने (पहलगाम) हमले का बदला लिया. मैं उनके (सरकार के) साथ हूं, लोग उनके साथ हैं, और हमारा पूरा परिवार उनके साथ है.” उन्होंने कहा, ”मैं अपनी सेना से कहना चाहती हूं कि वह मुंहतोड़ जवाब दे ताकि ऐसी घटनाएं (पहलगाम जैसी) दोबारा न हों.” आशा ने कहा कि जिन लोगों ने पहलगाम हमले में जान गंवाई, उन्हें आज न्याय मिला है.

पहलगाम पीड़ित मेरे पिता को शांति मिली होगी, ऐसी और कार्रवाई की उम्मीद है: पहलगाम हमले के पीड़ित हर्षल ने कहा

पहलगाम आतंकवादी हमले में अपने पिता और दो नजदीकी रिश्तेदारों को खोने वाले हर्षल लेले ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा मंगलवार देर रात पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिये जाने के बाद संतोष जताया है. लेले ने कहा, ”मैं संतुष्ट हूं, मेरे दिवंगत पिता को अब शांति मिली होगी.” आतंकियों ने 22 अप्रैल को लेले की आंखों के सामने उनके पिता और दो नजदीकी रिश्तेदारों को गोली मार दी थी. उन्होंने याद करते हुए कहा, ”मेरे एक रिश्तेदार ने आतंकवादियों से उन्हें छोड़ देने की विनती की, लेकिन उन्हें गोली मार दी गई. उन पर, मेरे दूसरे रिश्तेदार या मेरे पिता पर कोई दया नहीं दिखाई गई.”

उन्होंने ठाणे जिले के डोंबिवली में संवाददाताओं से कहा, ”ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिये जाने के तरीके से मैं खुश हूं. जिन नौ स्थानों से आतंकवादी अपनी गतिविधियां चला रहे थे, उन पर हमला किया गया. हम इस तरह की और कार्रवाई की उम्मीद करते हैं.” हर्षल के पिता संजय लेले और उनके रिश्तेदार अतुल मोने और हेमंत जोशी 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों में शामिल थे. अतुल मोने की पत्नी अनुष्का मोने ने कहा कि उन्हें पता है कि उनकी क्षति अपूरणीय है, फिर भी बुधवार की जवाबी कार्रवाई महत्वपूर्ण थी.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ”जिन्हें हमने खो दिया है, वे कभी वापस नहीं आएंगे. लेकिन सेना की यह कार्रवाई और मुहंतोड़ जवाब, उनके बलिदान के लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि है. आतंकवादियों ने सिर्फ व्यक्तियों पर हमला नहीं किया, उन्होंने भारत की आत्मा पर हमला किया था. और भारत ने उन्हें उनकी जगह दिखा दी है.” उन्होंने यह भी कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. मोने ने कहा, ”यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान का मामला है. ऑपरेशन सिंदूर राजनीति से ऊपर है. यह न्याय के बारे में है, चुनाव के बारे में नहीं. ”

कार्रवाई ऐसी हो कि फिर किसी का सिंदूर न उजड़े, कोई अनाथ न हो: आईबी अधिकारी की पत्नी

पहलगाम आतंकवादी हमले में मारे गए आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी मनीष रंजन की पत्नी जया मिश्रा ने भारत द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में किए गए मिसाइल हमलों को ‘जरूरी’ कदम बताया और साथ ही कहा कि कार्रवाई ऐसी हो कि ‘फिर किसी का सिंदूर न उजड़े और कोई बच्चा अनाथ न हो.’ उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई बहुत पहले हो जानी चाहिए थी. जया ने अपने पति को ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने की भी मांग की.

उन्होंने कहा, ”मैं चाहती हूं कि मेरे पति को शहीद का दर्जा मिले. यह अवश्य मिलना चाहिए.” अपने पति की मौत के मातम में डूबी जया ने कहा कि सरकार को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि फिर किसी का सिंदूर न उजड़े और फिर किसी के बच्चे अनाथ न हों.
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित झालदा शहर से फोन पर बातचीत में जया ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यह कार्रवाई (मिसाइल हमले की) बिल्कुल होनी चाहिए थी. जरूरी था. मैं तो चाहती हूं कि पूरा पाकिस्तान ही तबाह हो जाए. हमारे घर में जो आतंकवादी छुपे हैं, उन पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. चाहे वह कश्मीर में छिपे हों या देश के दूसरे कोनों में. उनका खात्मा होना चाहिए.” यह पूछे जाने पर कि सशस्त्र बलों की आज की कार्रवाई से उन्हें कुछ सुकून तो मिला होगा, जया ने कहा कि ‘सुकून तो अब मिलने वाला नहीं है’.

उन्होंने कहा, ”कुछ तसल्ली जरूर मिलेगी. आतंकवाद का समर्थन करने वाले और आतंकवादियों को पनाह देने वाले हर शख्स को चुन-चुन कर मारा जाए, चाहे वह कोई हिन्दुस्तानी हो या पाकिस्तानी.” जया ने कहा कि पाकिस्तान तो तबाह हो जाएगा और अपनी मौत मारा जाएगा लेकिन सीमा पार के आतंकवादियों से कहीं ज्यादा खतरा उन लोगों से है जो ‘अपने ही देश में छुपे’ हुए हैं.

उन्होंने कहा, ”उनका खात्मा जरूरी है.” यह पूछे जाने पर कि वह सरकार से और क्या चाहती हैं, जया ने कहा, ”एक बात जरूर कहना चाहती हूं कि आने वाली पीढ़ी को यह सब न सहना पड़े. ऐसे हमलों में किसी का सिंदूर न उजड़े, कोई बच्चा अनाथ न हो.” मनीष रंजन हैदराबाद में आईबी के ‘सेक्शन ऑफिसर’ के पद पर तैनात थे और पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में मारे गए थे. उनके अलावा इस हमले में और 25 लोग मारे गए थे.

मनीष रंजन अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ छुट्टियों में दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर प्रमुख पर्यटन स्थल बैसरन की वादियों में घूमने गए थे. मूल रूप से बिहार के रहने वाले मनीष रंजन का अंतिम संस्कार झालदा में किया गया था. बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी थी. पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए भारतीय सशस्त्र बलों ने सख्त जवाबी कार्रवाई में मंगलवार देर रात पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किये, जिनमें आतंकवादी समूहों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के गढ़ भी शामिल हैं.

इस अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर भावुक जया ने कहा, ”जब मेरा ही सिंदूर उजड़ गया तो फिर इसका क्या? यह सारी चीजें पहले ही हो जानी चाहिए थीं. इसी बात का तो बहुत ज्यादा गुस्सा है…ऑपरेशन सिंदूर हो या कुछ और. मेरा सिंदूर तो वापस नहीं आएगा.” जया ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत कष्ट है कि सरकार ऐसी कार्रवाई पहले क्यों नहीं करती और क्यों लोगों के मारे जाने का इंतजार करती है? उन्होंने कहा, ”सरकार को सब कुछ पता होता है. कौन-कौन से आतंकवादी संगठन हैं और कौन-कौन लोग उनके कमांडर या प्रमुख हैं. तो फिर लोगों के मारे जाने का इंतजार क्यों किया जाता है? इतने सारे लोग चले गए तब जाकर आप ऑपरेशन कर रहे हैं. क्या फायदा ऐसी कार्रवाई का? पहले ही कार्रवाई कीजिए. मरने का इंतजार क्यों?” जया ने कहा कि आतंकवादियों को ‘कोर्ट ट्रायल’ का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि ‘सीधे गोली मार दी जानी चाहिए, जैसे मेरे पति को मारी गई थी’.

पहलगाम हमले में जया और बच्चों के सामने ही आतंकवादियों ने मनीष रंजन की हत्या की थी. जया ने 22 अप्रैल की घटना को याद करते हुए कहा कि मनीष को गोली लगने के बाद वह अपने बच्चों की जान बचाने के लिए 10-11 किलोमीटर तक भागती रहीं लेकिन उन्हें कोई भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिला.

पहलगाम की घटना के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ”मुझे ठीक से याद नहीं है लेकिन करीब 10-11 किलोमीटर भागी थी बच्चों को लेकर. लेकिन कोई बचाने नहीं आया. लगातार गोलियां चल रही थीं. मैं जंगलों में भाग रही थी बच्चों को लेकर, इस उम्मीद में कि कोई तो बचाने आएगा.” उन्होंने कहा, ”बहुत गुस्सा भी आ रहा था. नीचे पहुंचीं तो लोगों ने बताया कि वे भारतीय सेना से हैं.” पहलगाम हमले के बाद जया का एक वीडियो बहुत वायरल हुआ था, जिसमें वह कहती सुनी जा रही हैं कि मेरे बच्चों को मत मारो. इसी दौरान सेना का एक जवान यह कहता है कि वह ‘इंडियन आर्मी’ से है.

वायुसेना के शहीद कॉरपोरल के परिवार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले भारतीय वायुसेना के कॉरपोरल तागे हेलियांग के परिजन ने बुधवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की और कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार सभी आतंकवादी गिरोह को नष्ट कर दे, ताकि किसी अन्य परिवार को वह कष्ट न सहना पड़े, जिससे वे गुजर रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले के रहने वाले कॉरपोरल हेलियांग 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए 26 लोगों में शामिल थे.

कॉरपोरल हेलियांग की पत्नी चारो कामहुआ तागे ने भारत सरकार से आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का आ”ान किया.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को पूरी तरह समर्थन देते हुए उन्होंने कहा, ”हमने अपनी धरती का एक प्यारा बेटा खो दिया है. मेरे पति घटनास्थल से भाग सकते थे. लेकिन एक सैनिक होने के नाते उन्होंने दूसरों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए उन्हें भागने में मदद करते हुए अपनी जान दे दी.” उन्होंने पत्रकारों से कहा, ”मैं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का पूरी तरह समर्थन करती हूं. अब समय आ गया है कि सरकार सभी आतंकी गिरोहों को ध्वस्त करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करे….”

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल से हमला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में किए गए हमले के बाद शहीद तागे के चाचा रुबू बुकर ने भावुक होते हुए कहा, ‘तागे की बहादुरी सच्ची देशभक्ति और साहस का प्रतीक है. उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा.”

आतंकी हमले में जान गवांने वाले की मां ने कहा- “उन्हें प्रधानमंत्री पर भरोसा था”

कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में मारे गए मंजूनाथ राव की मां सुमति ने मंगलवार देर रात पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए हवाई हमलों का स्वागत किया और कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पूरा विश्वास था. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनके बेटे का बलिदान व्यर्थ जाए. उन्होंने कहा कि यह संतोष की भावना नहीं है, क्योंकि उनका बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन ऐसी घटना दूसरों के बच्चों के साथ नहीं होनी चाहिए.

पहलगाम आतंकवादी हमले में ही मारे गए लोगों में शामिल भारत भूषण के परिवार ने पाकिस्तान में नौ आतंकवादी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए हवाई हमलों का स्वागत किया और कहा कि सरकार ने बिल्कुल सही किया तथा वे उनका समर्थन करते हैं.

मंजूनाथ की मां सुमति ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ह्लहमें विश्वास था कि मोदी जी सही निर्णय लेंगे और उन्होंने वही किया. निर्दोषों को कुछ नहीं होना चाहिए, लेकिन जो हमारे खिलाफ अत्याचार या दुष्टता करते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए. मेरे बेटे का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए. मुझे लगता है कि यह सही निर्णय लिया गया है.ह्व उन्होंने कहा, ह्लहम जानते थे कि कुछ न कुछ किया जाएगा. हम आम लोग हैं, बड़े लोग नहीं कि नेताओं को सलाह दें. लेकिन हमें मोदी जी पर विश्वास था. यह कोई संतोष की भावना नहीं है, क्योंकि मेरा बेटा अब वापस नहीं आएगा, लेकिन भविष्य में ऐसा किसी और के बेटे के साथ ऐसा न हो. हर कोई देश में स्वतंत्र रूप से, जहां मर्जी हो, वहां आ जा सके.

कर्नाटक के मंजूनाथ राव और भरत भूषण उन 26 लोगों में शामिल थे, जिनकी 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर प्रमुख पर्यटक स्थल बैसरन में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी. मृतकों में ज्यादातर पर्यटक थे.
भारत भूषण की पत्नी सुजाता ने आतंकवादियों से अपने पति को बख्श देने की मिन्नतें की थीं लेकिन आतंकवादियों ने उनके और उनके बेटे के सामने उनके पति को गोली मार दी थी. भूषण के पिता चन्नवीरप्पा ने कहा कि उन्होंने सुबह छह बजे खबर सुनी कि वायुसेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर दिया है.

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