दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत, नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरेंगी: जयशंकर

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 28 Sep 2025 08:53 PM
दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत, नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरेंगी: जयशंकर

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न्यूयॉर्क. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया को बड़े पैमाने पर वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी और अनिश्चितताओं के बावजूद नयी व्यापार व्यवस्थाएं उभरकर सामने आएंगी. जयशंकर ने वैश्विक समीकरणों में बदलाव के बीच आर्थिक संबंधों में विविधता लाने के लिए लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के साथ भारत के बढ़ते रिश्तों पर भी प्रकाश डाला.

उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें वार्षिक सत्र से इतर ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कार्यक्रम में शनिवार को कहा कि अनिश्चितताओं के बावजूद “व्यापार अपना रास्ता बनाता रहेगा.” जयशंकर ने कहा, “दुनिया को वैश्विक कार्यबल की जरूरत होगी और अनिश्चितताओं के बावजूद व्यापार अपना रास्ता बनाता रहेगा. हम नयी व्यापार व्यवस्थाएं, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और कार्यस्थल मॉडल देखेंगे, जो कम समय में वैश्विक परिदृश्य को बहुत अलग बना देंगे.” उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों के साथ संपर्क में है, तथा वह “व्यापार एवं साझेदारी को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखता है.” विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि “ऐसे अशांत माहौल” में, खासतौर पर बड़े देशों के लिए, अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के वास्ते क्षमता निर्माण करना अहम है.

उन्होंने कहा, “आज भारत में इस पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है. प्रौद्योगिकी, आत्मनिर्भरता, बहुध्रुवीयता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग, सभी एक ही पहलू हैं.” दक्षिण-दक्षिण सहयोग उन विकासशील देशों के बीच ज्ञान, विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को दर्शाता है जो ‘ग्लोबल साउथ’ का हिस्सा हैं. इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य आम विकास की चुनौतियों का समाधान करना, आर्थिक और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देना और सामूहिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है, न कि विकसित देशों पर निर्भर रहना.
जयशंकर की यह टिप्पणी अमेरिका के एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाकर सालाना 1,00,000 अमेरिकी डॉलर किए जाने और रूसी तेल की खरीद को लेकर भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के हालिया कदमों के बीच आई है. एच-1बी वीजाधारकों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी लगभग 71 फीसदी (2.8 लाख से अधिक) और चीनी पेशेवरों की हिस्सेदारी लगभग 11.7 प्रतिशत (46,600) है.

By Yogesh Kumar Sahu