भाजपा के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर: सपा नेता रामगोपाल यादव

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 18 Mar 2024 02:04 PM
भाजपा के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर: सपा नेता रामगोपाल यादव
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इटावा. समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने सत्तारूढ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर होने का दावा करते हुए रविवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में यह पार्टी पिछले चुनाव लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार कम से कम 40 सीटें गंवाने जा रही है.

यादव ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “भाजपा के लोग निरंतर असत्य भाषण देकर जनता को बहकाने का काम कर रहे हैं. जब हम लोगों के बीच जाते हैं तो मालूम पड़ता है कि उत्तर प्रदेश में केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर है.” उन्होंने सपा और कांग्रेस के गठबंधन के आगामी लोकसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जाहिर करते हुए दावा किया, “जो गठबंधन है उसकी स्थिति बहुत अच्छी रहेगी और पिछली बार के मुकाबले भाजपा की कम से कम 40 सीटें उत्तर प्रदेश में हम कम करने जा रहे हैं.”

भाजपा को बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरते हुए सपा नेता ने कहा, “जितना झूठ हिंदुस्तान की जनता को 24 घंटे परोसा जा रहा है उसकी असलियत सब जान चुके हैं. आप देखिएगा आगामी लोकसभा चुनाव में बहुत चमत्कारिक परिणाम आएंगे.” चुनावी बॉण्ड को लेकर हो रहे खुलासों के बारे में पूछे जाने पर यादव ने इसे ‘बहुत बड़ा घपला’ करार देते हुए कहा, “ऐसा मेरे ख्याल से कभी हिंदुस्तान में नहीं हुआ कि लोगों को डरा-धमका कर, छापा डलवा कर धन लिया गया हो.”

राज्यसभा सदस्य ने कहा, “दुनिया का कोई दूसरा देश होता तो अभी तक जो सरकार है, जिसने यह सब किया है वह चली गई होती.” यादव ने दावा किया, “एक अच्छी बात कही गई कि ‘ए’ ने खरीदा, ‘बी’ को दे दिया. ‘बी’ ने खरीदा, ‘सी’ को दे दिया. ‘सी’ ने ‘डी’ को दे दिया और ‘डी’ ने जाकर बैंक में जमा करके पैसा ले लिया तो जिसने दिया और लिया था वो नाम ही गायब हो गए.” उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ा घपला है. जो लोग यह कहते हैं कि हमने भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है, इससे बड़ा भ्रष्टाचार तो दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुआ. इस मामले में जिसने चंदा दिया, उसे ठेका मिल गया. ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) से छापे पड़वाए. कंपनी ने पैसा दे दिया और जांच खत्म हो गई.”

यादव ने कहा, “वेदांता कंपनी पर ईडी ने छापा मारा. उसने 400 करोड रुपए दे दिये, फिर जांच खत्म हो गई. सबसे ज्यादा चंदा दिया ‘फ्यूचर गेमिंग’ वाली कंपनी ने, जो टनल बनाती है. उसने 1500 करोड रुपए दिए, उसे कश्मीर में और उत्तराखंड में टनल बनाने का काम दे दिया गया. एक नहीं बहुत सी बातें हैं.” चुनाव से कुछ महीने पहले राम मंदिर के उद्घाटन से क्या भाजपा को लाभ होगा, इस सवाल पर यादव ने चुटीले अंदाज में कहा, “नहीं नहीं… उन्होंने जल्दी उद्घाटन कर दिया. उद्घाटन अब करना चाहिए था. अब जनता की निगाह में वह मुद्दा नहीं रहा.”

उन्होंने कहा, “जनता पहले से पूजा कर रही है. जनता अब यह सवाल कर रही है कि हम जब से पैदा हुए, जब से समझ आई तब से भगवान राम का नाम ले रहे हैं. तब राम नहीं थे क्या? उन्हें अब ये लोग (भाजपा) लाए हैं? भगवान राम जो कण-कण में विद्यमान हैं उनकी ये लोग (भाजपा) प्राण प्रतिष्ठा करेंगे? क्या उससे पहले कोई है ही नहीं? यह सब जनता समझ चुकी है.”

सपा को उप्र में भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन से उम्मीद

उत्तर प्रदेश में पिछले तीन विभिन्न चुनावों में अलग-अलग दलों से गठबंधन कर मैदान में उतरने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) एक बार फिर कांग्रेस से गठबंधन कर अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने की उम्मीद कर रही है. समाजवादी पार्टी ने ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ तालमेल किया है. इसके तहत सपा उत्तर प्रदेश की 80 में से 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस 17 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी. सपा ने भदोही की सीट इंडिया गठबंधन के तहत तृणमूल कांग्रेस को दी है.

सपा ने वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ गठबंधन करके लड़ा था. इसके अलावा उसने साल 2019 का लोकसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और रालोद के साथ और 2022 का विधानसभा चुनाव रालोद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल कमेरावादी तथा कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन करके लड़ा था.

सपा ने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बसपा और रालोद से गठबंधन करके लड़ा था. इस गठजोड़ ने प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में कुछ सीटों पर भाजपा को टक्कर दी थी, लेकिन वह कोई बड़ा प्रभाव डालने में विफल रहा था. बसपा को 10 और सपा को पांच सीटों पर कामयाबी मिली थी जबकि रालोद का खाता नहीं खुल सका था.

बसपा ने इस बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ऐसे में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के रथ को रोकना सपा और कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा. इस बार मुकाबला और भी ज्यादा दिलचस्प हो सकता है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में प्रभावशाली माना जाने वाला राष्ट्रीय लोकदल और पूर्वांचल में असरदार कही जाने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी समेत कई पार्टियां इस बार राजग के हिस्से के रूप में सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनौती पेश करेंगी.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत हासिल की थी. हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हुआ था और उसे 62 सीटें मिली थीं जबकि उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को दो सीटों पर कामयाबी हासिल हुई थी. सपा-बसपा गठबंधन ने 15 और कांग्रेस ने एक सीट जीती थी.

पश्चिमी क्षेत्र: उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव पर क्षेत्रवार नजर डालें तो भाजपा को सबसे ज्यादा 23 सीटें राज्य के पश्चिमी हिस्से से मिली थीं. बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा और नगीना (एससी) सीटें जीती थीं जबकि सपा संभल, मुरादाबाद, मैनपुरी और रामपुर में विजयी हुई.

मध्य क्षेत्र: राज्य के मध्य क्षेत्र में अमेठी और रायबरेली प्रमुख संसदीय क्षेत्र हैं. दोनों लंबे समय से कांग्रेस के गढ. माने जाते रहे हैं. साल 2019 में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी रायबरेली सीट बरकरार रखी थी लेकिन उनके बेटे राहुल गांधी अमेठी सीट केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से जीते थे. बसपा ने मध्य क्षेत्र से अंबेडकर नगर के रूप में केवल एक सीट जीती थी. भाजपा ने इस क्षेत्र से 13 सीटें जीती थीं, जिसमें प्रतिष्ठित फैजाबाद लोकसभा सीट भी शामिल है.

पूर्वी क्षेत्र: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी राज्य के पूर्वी हिस्से की 30 सीटों में शामिल है. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से बसपा ने पांच सीटें जीतीं थीं जबकि सपा ने आजमगढ. के रूप में एक सीट और भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने दो सीटें जीती थीं. बुन्देलखण्ड क्षेत्र: साल 2019 में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भाजपा की जीत हुई थी. उसे झांसी, बांदा, हमीरपुर और जालौन-एससी की सभी चार लोकसभा सीटों पर कामयाबी मिली थी.

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