
वाशिंगटन. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि ‘तनावपूर्ण’ और ‘अनिश्चित’ भू-राजनीतिक संकट र्सिदयों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण ंिजसों की आपूर्ति में नयी ंिचताओं को पैदा कर सकता है. उन्होंने साथ ही मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी पहलुओं और सरकार के संरचनात्मक सुधारों के आधार पर भारत के आर्थिक दृष्टिकोण पर आशावाद व्यक्त किया.
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का वैश्विक ऊर्जा प्रणाली पर बुरा प्रभाव पड़ा है. इसके कारण आपूर्ति और मांग बाधित हुई है और विभिन्न देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों में खटास आई है. सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की विकास समिति की बैठक में विश्व बैंक समूह को संसाधन जुटाने के लिए अभिनव तरीके तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया.
उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीतिक संकट तनावपूर्ण और अनिश्चित बना हुआ है. यह र्सिदयों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस जैसी महत्वपूर्ण ंिजसों की आपूर्ति में नयी ंिचताओं को पैदा कर सकता है. साथ ही विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति नियंत्रण एक प्रमुख ंिचता का विषय होगा.’’ सीतारमण ने आईएमएफ और विश्व बैंक की ताजा वार्षिक बैठक में कहा, ‘‘हालांकि…..मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी पहलुओं और सरकार के संरचनात्मक सुधारों के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दृष्टिकोण आशावादी बना हुआ है.’’
सीतारमण ने कहा कि खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के खतरे के साथ सख्त वित्तीय स्थिति और बढ़ती ब्याज दरों ने दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को वापस लाने और महामारी के कारण होने वाले विकास के झटके को दूर करने के प्रयासों के लिए बड़ी चुनौतियां पेश की हैं. सीतारमण ने कहा कि वैश्विक बाधाओं के बावजूद आईएमएफ का अनुमान है कि भारत 2022 और 2023 दोनों में छह प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
वैश्विक स्तर पर वर्तमान उथल-पुथल से बाहर निकलकर निरंतर वृद्धि के पथ पर बढ़ेगा भारत: सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को भरोसा जताया कि भारत वैश्विक स्तर पर मौजूदा उथल-पुथल से बाहर निकल आएगा और तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण तथा सरकार के कदमों के बूते निरंतर पुनरुद्धार के रास्ते पर आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के तहत भुगतान, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नियामकीय अनुपालन के मामले में भारत ने एक वैश्विक मानक स्थापित किया है और यह अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है.
जॉन हॉपकिन्स स्कूल आॅफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज में ‘भारत की अनोखी डिजिटल सार्वजनिक वस्तुएं’ विषय पर एक सत्र के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार निरंतर हो रहा है.’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने मांग, निर्यात पर वैश्विक उथल-पुथल के असर तथा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को भी ध्यान में रखा है.
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘भारत में आज यह भरोसा है कि हम इससे पार पा लेंगे और प्रदर्शन कर सकेंगे. ऐसा सार्वजनिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के तरीकों की वजह से हो सका है.’’ उन्होंने कहा कि कर्ज उपलब्धता अब कोई मुद्दा नहीं रहा है क्योंकि छोटे व्यवसायियों को भी घर बैठे-बैठे ऋण मिल रहा है.
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की सार्वजनिक वस्तुएं उन देशों के लिए उपलब्ध हैं जिन्हें इनकी जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, कोविन की वजह से विदेश जाने वाले भारतीयों को अपने टीकारकण के बारे में कोई दस्तावेज नहीं दिखाना पड़ा. उन्होंने फोन पर यह दिखा दिया. अब कोविन ऐप हर उस देश के लिए उपलब्ध है जो भी इसका इस्तेमाल करना चाहता है.’’
उन्होंने कहा कि 2014 से 2019 के बीच डिजिटलीकरण पर दिए गए जोर ने कोविड-19 और उसके बाद आर्थिक संकट से जूझने में मदद दी और इसकी वजह से ही लॉकडॉउन के दौरान मदद और राहत तुरंत दी जा सकी. वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि लक्षित रुख इसलिए अपनाया जा सका क्योंकि हम प्रौद्योगिकी के रूप बेहतर स्थिति में है.’’
भारत की सार्वजनिक वस्तुएं जरूरतमंद देशों के लिए उपलब्ध
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डिजिटलीकरण को पिछले दो साल में भारत के लिए सबसे लाभकारी बदलाव करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की सार्वजनिक वस्तुएं जरूरतमंद देशों के लिए उपलब्ध हैं. सीतारमण ने दावा किया कि भारत सरकार ने सार्वजनिक वस्तु के रूप में लोगों के लिए जो नेटवर्क उपलब्ध कराया है, उससे लघु एवं मध्यम उद्योगों को अपना काम-काज बढ़ाने में मदद मिल रही है.
वित्त मंत्री ने ‘जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल आॅफ एडवांस्ड इंटरनेशनल स्टडीज’ (एसएआईएस) के छात्रों को भारत की अनूठी ‘डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं’ पर एक संवादात्मक सत्र के दौरान संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यहां खड़े होकर मैं दोहराना चाहती हूं कि भारत की सार्वजनिक वस्तुएं उन देशों के लिए उपलब्ध हैं, जिन्हें इसकी आवश्यकता है.’’ मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत के पास डिजिटल सेवाओं का भंडार है, जिसका अन्य देश उपयोग कर सकते हैं.
सीतारमण ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) फ्रांस में एक समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर कर चुका है और इसलिए एनपीसीआई के तहत आने वाले सभी ऐप वहां उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा, ‘‘उनसे उन सार्वजनिक वस्तुओं के लिए भुगतान नहीं लिया जाता, जो हमने बनाई हैं.’’ सीतारमण ने दोहराया कि भारतीय सार्वजनिक वस्तुएं अन्य देशों में उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान भारत ने एक ऐसा ऐप बनाया, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने निकटतम अस्पताल को ढूंढ सकता है और जो उन्हें टीकाकरण केंद्र की जानकारी देता है.
वित्त मंत्री ने कहा कि यह ऐप टीकाकरण के बाद उसकी जानकारी रिकॉर्ड कर लेता है और लोगों को फोन पर प्रमाण पत्र भी भेज देता है.
उन्होंने कहा कि इसकी वजह से विदेश जाने वाले यात्रियों को अपने टीकाकरण का सबूत दिखाने के लिए कागज साथ नहीं रखना पड़ता.
वित्त मंत्री ने कहा कि अब यह ऐप अन्य देशों में भी उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह प्रौद्योगिकी शिक्षा में बदलाव ला रही है.’’ उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रौद्योगिकी का विकास और इसके अनुकूल खुद को ढालना भारत के लिए सबसे बड़ा लाभ बन गया है.



