केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर को लश्कर-ए-तैयबा से ‘धमकी’ भरा पत्र मिला

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 08 Apr 2024 07:24 PM
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर को लश्कर-ए-तैयबा से ‘धमकी’ भरा पत्र मिला
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कोलकाता. केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शांतनु ठाकुर ने सोमवार को दावा किया कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने उन्हें पत्र भेजकर धमकी दी है कि यदि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू की गयी तो वह ‘पूरे देश को जला देगा.’ बंगाली में टाइप किये गये इस कथित पत्र में यह भी धमकी दी गयी है कि यदि राष्ट्रीय नागरिक पंजी को लागू करने के बाद मुसलमानों का उत्पीड़न किया गया तो मतुआ समुदाय के तीर्थाटन स्थल ‘ठाकुरबारी’ को ध्वस्त कर दिया जाएगा.

केंद्रीय पोत, नौवहन एवं जलमार्ग राज्य मंत्री ठाकुर ने संवाददाताओं से कहा, ”यह पत्र मिलने से मैं स्तब्ध हूं. मैंने अपने विभाग को इसकी सूचना दे दी है.” जब इस संबंध में बोनगांव के जिला पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि पुलिस को मंत्री की ओर से अब तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है. इस पत्र पर दस्तखत करने वालों ने दावा किया कि वे पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य हैं. इस पत्र की प्रति ‘पीटीआई-भाषा’ के पास उपलब्ध है.

बंगाल में चुनाव के बाद भी और तीन महीने तक तैनात रहे केंद्रीय बल: शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को मांग की कि राज्य में लोकसभा चुनाव के बाद भी और तीन महीने के लिए केंद्रीय बलों को तैनात रखा जाना चाहिए. अधिकारी ने निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्ति विशेष पर्यवेक्षक से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इससे चुनाव उपरांत हिंसा को रोका जा सकेगा जो 2021 के विधानसभा चुनाव और 2023 के पंचायत चुनाव के बाद देखने को मिली थी. उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में राज्यपाल सी.वी.आनंद बोस, राज्य के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखेंगे.

अधिकारी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि यह उनकी ‘पराजयवादी मानसिकता’ दिखाती है.
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’पर पोस्ट किया, ”शुभेंदु अधिकारी ने मांग की कि आदर्श आचार संहिता हटने के बाद भी केंद्रीय बलों को बंगाल में रहने की अनुमति दी जाए. वह किसी और से बेहतर जानते हैं कि उनकी पार्टी जर्जर स्थिति में है और भाजपा की बंगाल में कोई राजनीतिक पकड़ नहीं है. इसलिए, अपनी घटती प्रासंगिकता को बचाने का उनका एकमात्र विकल्प केंद्रीय बलों की तैनाती की अवधि को बढ.ाना है.” अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के कुल 92 हजार जवानों को तैनात किए जाने की उम्मीद है जो किसी भी एक राज्य में सबसे अधिक है.

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