
नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने निर्वाचन आयोग के एक हालिया पत्र की भाषा और लहजे को लेकर सोमवार को उस पर निशाना साधा और सवाल किया कि आखिर यह संस्था असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और ओडिशा के राज्यपाल रघुबर दास के खिलाफ कार्रवाई कब करेगी जो झारखंड विधानसभा चुनाव में ”आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं.” रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से जुड़ी शिकायतों पर मुख्य विपक्षी दल को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वो किसी भी राजनीतिक दल के लिए नहीं की जा सकती.
हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी हार के बाद यह दावा किया था कि कई विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की बैट्री 99 प्रतिशत चार्ज थी और जहां ऐसा हुआ, वहां उसे हार का सामना करना पड़ा. इसको लेकर उसने निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी. हालांकि आयोग ने उसकी शिकायतों को खारिज कर दिया था.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे एक पत्र में आयोग ने कहा था कि इस तरह के “तुच्छ और बेबुनियाद” संदेह “अशांति” पैदा करने की क्षमता रखते हैं, खासकर मतदान और मतगणना जैसे महत्वपूर्ण चरण में, जब राजनीतिक दलों और जनता की बेचैनी चरम पर होती है.
रमेश ने सोमवार को कहा, ”जिस भाषा और लहजे का इस्तेमाल किया गया वो ठीक नहीं है. ऐसा कहा गया कि हम आपसे मिले. क्या आपने (आयोग) हमसे मिलकर अहसान किया? यह तो आपका काम है. चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह राजनीतिक दलों से मिले और उन्हें सुने.” उन्होंने कहा कि किसी भी दल के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. रमेश ने सवाल किया, ”जो भाषा हिमंत विश्व शर्मा बोल रहे हैं, उसको लेकर कोई कार्रवाई करेंगे? ओडिशा के राज्यपाल के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो चुनाव प्रचार कर रहे हैं?” उन्होंने कहा कि इन दोनों के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कांग्रेस की तरफ से शिकायतें दर्ज करायी गई हैं.
महाराष्ट्र और झारखंड में मिलेगा निर्णायक जनादेश, हरियाणा जैसी ‘हरकतों’ को लेकर सतर्क रहेंगे: रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी तथा सहयोगी दलों को निर्णायक जनादेश मिलने की उम्मीद जताते हुए सोमवार को कहा कि हरियाणा के चुनावी नतीजों से सबक लेते हुए अब इन दोनों राज्यों में आखिरी समय तक सतर्क रहना होगा.
रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में यह भी कहा कि महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के जीतने पर मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कोई बाधा पैदा नहीं होगी और ‘सही समय पर, सही चेहरा’ इस पद पर आसीन होगा. कांग्रेस नेता का यह भी कहना था कि महाराष्ट्र में ‘महायुति’ की सरकार ने जिस तरह से वादाखिलाफी की है और विपक्षी दलों में तोड़फोड़ की है, उससे लोगों में गुस्सा है तथा झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक असर हुआ है.
यह पूछे जाने पर कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से कांग्रेस ने क्या सबक लिया है, तो रमेश ने कहा, ”सबक यही लिया है कि आखिरी वक्त तक हमें होशियार रहने की जरूरत है. जिस तरीके से आखिरी वक्त पर करीब 20 विधानसभा क्षेत्रों में जो हरकतें हुई, उससे हमें बचना है…हमें सतर्क रहना होगा.” हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी हार के बाद यह दावा किया था कि कई विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की बैट्री 99 प्रतिशत चार्ज थी और जहां ऐसा हुआ, वहां उसे हार का सामना करना पड़ा. इसको लेकर उसने निर्वाचन आयोग में शिकायत की थी. हालांकि आरोपों ने उसकी शिकायतों को खारिज कर दिया. पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने कहा कि महाराष्ट्र में माहौल महा विकास आघाड़ी के पक्ष में है. इस विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपर) और शिवसेना (यूबीटी) शामिल हैं.
भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी समझौता अनियमितताओं से भरा है: कांग्रेस
कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ किया गया आर्थिक साझेदारी समझौता अनियमितताओं से भरा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया. सरकार की तरफ से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा हस्ताक्षरित भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी समझौता (ईपीएम) अनियमितताओं से भरा है.
उन्होंने कहा, ”इस समझौते में एक खामी है जो यह निर्धारित करती है कि वजन के हिसाब से 2 प्रतिशत से अधिक प्लैटिनम वाली किसी भी मिश्र धातु पर आयात शुल्क लगेगा. मई 2022 में समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत ने 24,000 करोड़ रुपये मूल्य की प्लैटिनम मिश्र धातु का आयात किया है. कर अधिकारियों के आंतरिक रिकॉर्ड का अनुमान है कि इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक वास्तव में सोना है.” रमेश के अनुसार, जुलाई 2024 तक, सोने पर 18.45 प्रतिशत के प्रभावी कर के मुकाबले प्लैटिनम मिश्र धातु पर आयात शुल्क 8.15 प्रतिशत था तथा इस मिश्र धातु को सोने के बजाय प्लैटिनम के रूप में अनिवार्य वर्गीकरण के कारण भारत को राजस्व में कम से कम 1,700 करोड़ रुपये का नुक.सान होने का अनुमान है.
उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय नुक.सान के अलावा इस खामी ने भारत के नियामक बुनियादी ढांचे का मज.ाक बना दिया है.
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ”वित्त मंत्री ने जुलाई, 2024 में अपने बजट भाषण में सोने पर शुल्क को कम किया था. यह आंशिक रूप से इस खामी को दूर करने के लिए किया गया था. दूसरे शब्दों में, सरकार की आर्थिक नीति का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक समझौते पर बातचीत करने के बजाय, सरकार ने समझौते में खामियों को दूर करने की कोशिश करने के लिए अपनी नीति को समायोजित किया.”
उन्होंने कहा कि जनवरी-अप्रैल, 2023 के दौरान संयुक्त अरब अमीरात से भारत का चांदी आयात 22 लाख डॉलर था जो जनवरी-अप्रैल 2024 में भारी उछाल के साथ 1.44 अरब डॉलर हो गया. रमेश ने दावा किया कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते के लिए अधिकांश बातचीत का नेतृत्व किया और 88 दिनों की ”रिकॉर्ड अवधि” में समझौते को पूरा किया. उन्होंने सवाल किया कि क्या इतने महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने में की गई अनावश्यक जल्दबाजी के परिणामस्वरूप ये खामियां उत्पन्न हुई हैं?



