सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल जांच: सोशल मीडिया के जरिये 2019 में हुआ डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव

सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल : हरियाणा के मौलवी ने पुलिस से डॉक्टरों से किराया वसूलने की गुहार लगाई

नयी दिल्ली/श्रीनगर. लाल किले के पास 10 नवंबर को चलती कार में हुए बम विस्फोट के साथ सामने आए ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉक्टरों का कट्टरपंथ की ओर झुकाव 2019 से ही सोशल मीडिया मंच के जरिये शुरू हो गया था. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी.

जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि अब तक की जांच से सीमा पार आतंकवाद की रणनीति में ऐसे बदलाव का संकेत मिला है, जो काफी चिंताजनक है. उन्होंने बताया कि इस रणनीति के तहत पाकिस्तान और दुनिया के अन्य हिस्सों में बैठे आतंकी आकाओं द्वारा उच्च शिक्षित पेशेवरों को पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा है.

सूत्रों ने बताया कि आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों, जिनमें डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राठेर, डॉ. मुजफ्फर राठेर और डॉ. उमर-उन-नबी शामिल थे, को शुरू में सीमा पार के आकाओं ने फेसबुक और ‘एक्स’ जैसे सोशल मीडिया मंचों पर सक्रिय पाया था. उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों को तुरंत ‘टेलीग्राम’ पर निजी ग्रुप में जोड़ा गया और यहीं से उन्हें बरगलाना शुरू किया गया. आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों ने हमलों को अंजाम देने के लिए संर्विधत विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने का तरीका सीखने के लिए यूट्यूब का भी खूब इस्तेमाल किया.

पूछताछ के दौरान विश्लेषण किए गए ‘डिजिटल फुटप्रिंट’ से पता चला कि इनके मुख्य संचालक ‘उकासा’, ‘फैजान’ और ‘हाशमी’ हैं. अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों भारत के बाहर से अपनी गतिविधियां चला रहे थे और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों में अक्सर इनके नाम सामने आते हैं. अधिकारियों ने बताया कि भर्ती किए गए डॉक्टरों ने शुरू में सीरिया या अफगानिस्तान जैसे संघर्ष क्षेत्रों में आतंकवादी समूहों में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन बाद में उनके आकाओं ने उन्हें भारत में ही रहने और भीतरी इलाकों में कई विस्फोट करने के लिए कहा.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर इस ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया. इससे जांचकर्ता फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय पहुंचे, जहां से 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ. वर्ष 2018 के बाद से, सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ फैलाने के तरीके में आतंकवादी समूहों द्वारा रणनीतिक बदलाव देखा गया है. ये आतंकवादी समूह डिजिटल मंचों के जरिए लोगों की भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि पुख्ता सुरक्षा उपायों के कारण प्रत्यक्ष और आमने-सामने की बातचीत मुश्किल होती जा रही है.

सूत्रों के मुताबिक, एक बार जब भर्ती होने के इच्छुक लोगों की पहचान हो जाती है, तो उन्हें ‘टेलीग्राम’ जैसे ए्क्रिरप्टेड मैसेजिंग ऐप पर निजी ग्रुप में जोड़ दिया जाता है, जहां उन्हें अत्यधिक मनगढ़ंत सामग्री दिखाई जाती है, जो अक्सर कृत्रिम मेधा (एआई) से बने वीडियो होते हैं.

क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का काम सौंपे जाने से पहले, भर्ती लोगों को वर्चुअल प्रशिक्षण दिया जाता है जिसमें आसानी से उपलब्ध यूट्यूब ट्यूटोरियल शामिल होते हैं. ‘वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क’ और फर्जी पहचान वाली आईडी का व्यापक उपयोग इन आतंकवादी नेटवर्क को पकड़ में आने से बचने में मदद करता है, जो ए्क्रिरप्टेड संचार के लिए ‘टेलीग्राम’ और ‘मैस्टोडॉन’ जैसे मंचों का उपयोग करते हैं.

सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल : हरियाणा के मौलवी ने पुलिस से डॉक्टरों से किराया वसूलने की गुहार लगाई
श्रीनगर में पुलिस पूछताछ कक्ष का माहौल तनावपूर्ण है, लेकिन ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के सिलसिले में हिरासत में लिए गए हरियाणा के एक मौलवी का ध्यान गिरफ्तार डॉक्टरों द्वारा बकाया किराए पर केंद्रित है. हरियाणा के मेवात के मौलवी इश्तियाक को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय के बाहर स्थित उनके किराए के आवास से अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम क्लोरेट और सल्फर सहित 2,500 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद हिरासत में लिया था.

विश्वविद्यालय से गिरफ्तार किए गए ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल के एक प्रमुख सदस्य डॉ. मुजम्मिल गनई से पूछताछ के दौरान इश्तियाक का नाम सामने आया. गनई की निशानदेही पर पुलिस टीम ने मौलवी के आवास से विस्फोटक बरामद किए थे. श्रीनगर पुलिस द्वारा गहन जांच के बाद 10 नवंबर को इस सफेदपोश मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ और तीन डॉक्टरों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. मॉडयूल का भंडाफोड़ होने के बाद इनका अन्य साथी डॉ. उमर नबी फरार हो गया. उमर विस्फोटकों से लदी कार चला रहा था, जिसमें लाल किले के बाहर विस्फोट होने से 15 लोग मारे गए.

अधिकारियों के अनुसार, मौलवी इश्तियाक ने पूछताछ में एक अलग ही कहानी सुनाई, जिसमें उसने दावा किया कि गनई और उमर ने इस वर्ष की शुरुआत में उससे संपर्क किया था, तथा उसे अपने घर पर ”उर्वरक” जैसी कुछ चीजें रखने के लिए कहा था, जिसके एवज में 2500 रुपये मासिक किराया देने का वादा किया गया था.

जांचकर्ताओं ने बताया कि इश्तियाक को मौजूदा स्थिति की गंभीरता की कोई चिंता नहीं थी तथा उसकी चिंता गनई और उमर द्वारा पिछले छह महीनों से नहीं चुकाए गए किराये की वसूली को लेकर थी. गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले तथा अपने चार बच्चों और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे इश्तियाक ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण, श्रीनगर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों से कहा कि वे गनई से बकाया किराया वसूल करें, ताकि वह पैसा अपने घर वालों को भेज सके.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौलवी इश्तियाक द्वारा जताई गई बकाया किराये की चिंता आतंकवादी साजिशों के बीच उलझे जीवन की विचित्र और दुखद झलक पेश करती है. अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान गनई ने भी इश्तियाक की बातों की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि मौलवी इश्तियाक को आगे की कार्रवाई के लिए राज्य जांच एजेंसी को सौंप दिया गया है.

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