मुद्रास्फीति के लक्ष्य से ऊपर रहने के बारे में सरकार को लिखा पत्र सार्वजनिक नहीं किया जाएगा: RBI

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि आरबीआई का मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाने के संदर्भ में सरकार को लिखा जाना वाला पत्र विशेषाधिकार का मामला है और वह इसे सार्वजनिक नहीं करेगा. मध्यम अवधि में महंगाई को लक्ष्य के दायरे में रखने के कानून के तहत आरबीआई को लक्ष्य हासिल करने से चूक को लेकर सरकार को पत्र लिखकर उसका कारण बताना होगा. साथ ही पूरी विस्तृत जानकारी देनी होगी कि चार प्रतिशत का लक्ष्य कबतक हासिल किया जा सकता है. इस बारे में केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच समझौता हुआ है.

समझौते के तहत आरबीआई को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी मिली है. मुद्रास्फीति लगातार आठवें महीने छह प्रतिशत से ऊपर है जो आरबीआई के लिये निर्धारित लक्ष्य की ऊपरी सीमा से अधिक है. ऐसी आशंका है कि खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर महीने में भी छह प्रतिशत से ऊपर रहेगी. इसका आंकड़ा 12 अक्टूबर को जारी होगा. अगर यह लक्ष्य से ऊंचा रहता है, तो समझौते के तहत आरबीआई को पत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देना होगा.

मुद्रास्फीति को निर्धारित दायरे में रखने के लक्ष्य को लेकर नियम 2016 से चल रहे हैं लेकिन यह पहली बार होगा, जब आरबीआई को पत्र लिखकर पूरा ब्योरा देना होगा. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह (पत्र) केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच विशेषाधिकार वाला संचार होगा. इस समय मैं यह नहीं कह सकता कि यह सार्वजनिक होगा या नहीं क्योंकि यह केंद्रीय बैंक की तरफ से सरकार को दिया विशेषाधिकार से जुड़ा पत्र होगा.’’ उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सरकार को भेजे जाने वाले पत्र की बातों पर विचार करेगी.

दास ने यह भी कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति के दो साल में चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब आने की उम्मीद कर रहा है. इसमें निरंतर कमी आने की उम्मीद है. केंद्रीय बैंक के अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में महंगाई दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. दूसरी तिमाही में इसके 7.1 प्रतिशत तथा तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है. चौथी तिमाही में इसके 5.8 प्रतिशत पर रहने की संभावना है.

35 करोड़ कार्ड के टोकन में बदलने के साथ प्रणाली टोकनीकरण के लिए तैयार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि लगभग 35 करोड़ कार्ड को टोकन में बदला जा चुका है और प्रणाली एक अक्टूबर से निर्धारित नए मानदंडों के लिए तैयार है. डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा कि प्रणाली में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी अनिच्छा के कारण इसका पालन नहीं किया और उम्मीद है कि वे जल्द ही इन मानदंडों का पालन करेंगे.

आरबीआई ने ग्राहकों की वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक अक्टूबर से भुगतान कार्डों को टोकन में बदलना अनिवार्य कर दिया है. टोकनीकरण के तहत क्रेडिट और डेबिट कार्ड के विवरण को ‘टोकन’ नामक एक वैकल्पिक कोड में बदला जाता है. आरबीआई इससे पहले कई बार इसे अपनाने की समयसीमा को बढ़ा चुका है.

यह पूछने पर कि क्या समयसीमा को एक बार फिर बढ़ाया जाएगा, शंकर ने कहा, ‘‘… प्रणाली तैयार है. लगभग 35 करोड़ टोकन पहले ही बनाए जा चुके हैं.’’ उन्होंने कहा कि सितंबर में कुल लेनदेन का लगभग 40 प्रतिशत टोकन के जरिये किया गया और इसके जरिये करीब 63 करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अंत तक प्रणाली में डेबिट और क्रेडिट कार्ड की कुल संख्या 101 करोड़ से अधिक है.
शंकर ने कहा कि मार्च, 2020 में पहली बार नियम जारी करने के बाद से आरबीआई लगातार हितधारकों से बात कर रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि टोकन को अपनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से आसान हो.

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