
नयी दिल्ली. सरकार टोल प्लाजा की जगह स्वचालित ‘नंबर प्लेट पहचान प्रणाली’ के उपयोग के लिए ‘प्रायोगिक परियोजनाओं’ पर काम कर रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से वाहन मालिकों के बैंक खातों से सीधे शुल्क की कटौती की जा सकेगी.
गडकरी ने माइंडमाइन शिखर सम्मेलन में कहा कि फास्टैग की शुरुआत के बाद, सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की टोल आय में सालाना 15,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. उन्होंने इस बारे में विस्तार से जानकारी दिये बिना कहा, ”हम अब आॅटोमोबाइल नंबर प्लेट तकनीक या आॅटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर कैमरा पेश करने जा रहे हैं. इसके बाद किसी टोल प्लाजा की जरूरत नहीं होगी.
गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान टोल प्लाजा पर वाहनों का औसत प्रतीक्षा समय आठ मिनट था. फास्टैग की शुरुआत के साथ वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 के दौरान वाहनों के लिए औसत प्रतीक्षा समय में कमी आयी. यह घटकर 47 सेकंड हो गया. हालांकि यह कुछ स्थानों पर, विशेष रूप से घनी आबादी वाले शहरों में प्रतीक्षा समय में काफी सुधार देखा गया. इसके बावजूद व्यस्त समय के दौरान टोल प्लाजा पर कुछ देरी होती है.
गडकरी ने पिछले महीने कहा था कि सरकार अब दो विकल्पों पर विचार कर रही है. पहला उपग्रह आधारित टोल प्रणाली… जहां एक कार में जीपीएस होगा और टोल सीधे यात्री के बैंक खाते से लिया जाएगा और दूसरा विकल्प नंबर प्लेट पहचान के जरिए शुल्क लेना है.
उन्होंने कहा, ‘हम उपग्रह का इस्तेमाल करते समय फास्टैग की जगह जीपीएस लगाने की प्रक्रिया में हैं. वहीं देश में नंबर प्लेट पर भी अच्छी तकनीक उपलब्ध है.’
गडकरी ने अधिकारियों से इलेक्ट्रिक बसों के लिये समान चार्जिंग प्रणाली पर गौर करने को कहा
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने विभाग के अधिकारियों से विभिन्न कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसों के लिये समान चार्जिंग प्रणाली पर गौर करने को कहा है. गडकरी ने कहा कि विभिन्न कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसों के लिये अलग-अलग चार्जिंग प्रणाली है, ऐसे में राज्यों को दिक्कत हो रही है.
उन्होंने माइंडमाइन शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘हिमाचल प्रदेश के परिवहन मंत्री ने मुझे विभिन्न कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग-अलग चार्जिंग प्रणाली की समस्या के बारे में बताया. मैंने अपने अधिकारियों से इसका समाधान खोजने के लिये कहा है. विभिन्न कंपनियों की इलेक्ट्रिक बसों को चार्ज करने के लिये एक ही प्रणाली होनी चाहिए.’’ गडकरी ने लोगों को सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का उपयोग करने के लिये प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘हमें लोगों को और कार खरीदने के लिए हतोत्साहित करने की जरूरत है… हमें महानगरों में वातानुकूलित ट्रॉली बस सेवा शुरू करने की आवश्यकता है.’’ मंत्री ने उम्मीद जतायी कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कीमतें एक या दो साल के भीतर देश में पेट्रोल वाहनों के मूल्य के बराबर हो जाएंगी. गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2024 के अंत से पहले लॉजिस्टिक लागत को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 10 प्रतिशत तक कम करना है, जो वर्तमान में 14-16 प्रतिशत है. उन्होंने यह भी कहा कि हरित हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है.



