आज पूरा विश्व वलर्ड रेबिज डे 2026 मना रहा है। इस दिन जानवरों के काटने से होने वाली रैबिज बीमारी को लेकर जागरूक रहने तथा पर्याप्त बचाव उपाय करने की सलाह दी जाती है। अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा मौंतें कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी से होती हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य में प्रतिवर्ष औसतन 400 मौतें रेबिज की बीमारी से होती हैं, इनमें से 90 प्रतिशत डॉग बाइटस के मामले होते हैं।
छत्तीसगढ़ में आवारा कुत्तों के काटने और उनके हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जिससे राज्य के कई जिलों में दहशत का माहौल है। चंद रोज पहले ही सारंगढ़ में एक ही दिन में एक खूंखार आवारा कुत्ते ने 31 लोगों को काटकर घायल कर दिया। बालोद के डौंडी लोहारा नगर में आवारा कुत्तों ने सड़क पर चल रहे 16 लोगों (महिलाओं और बच्चों सहित) पर हमला कर घायल कर दिया। कोरबा के दादरखुर्द गांव में आवारा कुत्तों के हमले से 5 साल के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। बलरामपुर में कुत्ते के काटने के डेढ़ महीने बाद समय पर रेबीज का इलाज न मिलने के कारण एक 34 वर्षीय महिला की मौत हो गई।
कुत्ते के काटने के बाद पीड़ित ने 12 छात्रों को काटा
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में 11वीं कक्षा के एक छात्र ने स्कूल में करीब 12 विद्यार्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर काटा। इस छात्र को कुछ महीने पहले एक कुत्ते ने काटा था। विधानसभा में उठे एक सवाल के जवाब में राज्य में औसतन 400 मौतें रेबिज से होती हैं। इसमें 90 फीसद से अधिक मामले कुत्तों के काटने के होते हैं। स्ट्रीट डॉग अकेले छत्तीसगढ़ ही नहीं सभी राज्यों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। यही वजह है इस मामले में सीधे केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कहना है कि कुत्तों के हमलों से होने वाली मौतों और मुआवजे की याचिकाओं पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।प्रभावित क्षेत्रों में नगर निगम और पालिका द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनका टीकाकरण करने और नसबंदी अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर, वह भारी मुआवजा तय कर सकता है, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई की.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक वर्ल्ड रेबीज डे 2026 की थीम ब्रेकिंग रेबीज बाउंड्रीज़ (‘Breaking Rabies Boundaries’) है। इस थीम से यह संदेश मिलता है कि हमें रेबीज की बीमारी को तोड़ने की जरूरत है। जिससे लोगों की जान बचाई जा सके। रेबीज के प्रति जागरूकता फैलाकर ऐसा किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ सरकार के एंटी रेबिज उपाय
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि उसने कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने और आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बनाना, डॉग शेल्टर बनाना, एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन अभियान चलाना और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा शामिल है।
राज्य ने कोर्ट को बताया कि अभी दो एजेंसियों के ज़रिए 34 एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर चल रहे हैं, जबकि दिसंबर 2025 तक सिर्फ़ छह सेंटर काम कर रहे थे। जनवरी और जून 2026 के बीच 28 और सेंटर शुरू हुए, जिससे 32 ज़िलों में कम से कम एक ABC सेंटर काम कर रहा है, जबकि गरियाबंद में सेंटर बनाने का काम चल रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि 199 डॉग शेल्टर हैं जिनमें कुल मिलाकर 4,340 कुत्तों को रखने की क्षमता है और 462 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इसके अलावा, जानवरों को पकड़ने के काम में 39 गाड़ियां, 347 जाल, 366 केनेल और 827 कर्मचारी लगे हुए हैं। ABC नियम, 2023 को लागू करने के बारे में हलफनामे में कहा गया है कि 30 जून 2026 तक राज्य ने 30,651 आवारा कुत्तों की नसबंदी की, 50,362 एंटी-रेबीज टीके लगाए और 42,263 कुत्तों को डी-वर्मिंग (पेट के कीड़े निकालने की प्रक्रिया) दी। 2026 की पहली छमाही में इसमें काफी प्रगति हुई है।
राज्यों ने तय किया मुआवजा
कर्नाटक सरकार ने आवारा कुत्तों के हमलों में मौत पर 5 लाख रुपये और गंभीर चोटों पर 5 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। हालांकि छत्तीसगढ़ में ऐसा कोई नियम नहीं बन सका है। सरकार घटना की गंभीरता और मानवीयता के आधार पर मुआवजा देती है। सरकारी अस्पतालों के हाल यह हैं कि वहां एंटीरेबिज इंजेक्शन ही नही रहते। कभी कभी मरीजों को खुद खरीदकर लाकर लगवाना पड़ता है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कुत्ते के काटने और किसी बच्चे, बड़े या बूढ़े, कमजोर व्यक्ति की मौत या चोट लगने पर, वह भारी मुआवजा तय कर सकता है, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले में सुनवाई की थी। केंद्र सरकार ने राज्यों को भेजे गए पत्र में रैबीज के सभी प्रकरणों की नियमित जानकारी देने के लिए कहा है। इसमें रैबीज पीडि़त के साथ ही रैबीज के संदिग्ध मरीजों की भी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से केंद्र को भेजने के लिए कहा गया है।
रैबीज की जांच के लिए हर राज्य में कम से कम एक डायग्नोसिस्ट लैब बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इस लैब में फ्लोरोसेंट एंटीबॉडी परीक्षण की सुविधा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।
रेबीज से बचाव के उपाय
तुरंत धोएं: कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
टीकाकरण करवाएं: डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के सभी डोज अनिवार्य रूप से लगवाएं।
झाड़-फूंक से बचें: किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे या जड़ी-बूटी के भरोसे न रहें, क्योंकि रेबीज के लक्षण दिखने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है और यह जानलेवा होता है।