गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद “भारतीय धरती पर पाकिस्तान का बचाव करने” के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जिससे अब तक इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 43 हो गयी है. शर्मा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आरोपी को बारपेटा जिले में पकड़ा गया है.
उन्होंने कहा, “भारतीय धरती पर पाकिस्तान का बचाव करने वाले देशद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई पर अपडेट…पाकिस्तान से सहानुभूति रखने के लिए कुल 43 देशद्रोहियों को सलाखों के पीछे डाला गया है. किसी भी देशद्रोही को बख्शा नहीं जाएगा.” वहीं, मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से कुछ पर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) के प्रावधान लगाए जाएंगे, लेकिन सभी पर नहीं. कुछ लोगों ने पहले ही माफी मांग ली है और कहा है कि वे ऐसा दोबारा नहीं करेंगे.” शर्मा ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों का वर्गीकरण किया जाएगा, क्योंकि कुछ लोग आदतन अपराधी हैं, जबकि अन्य ने प्रचार के लिए ऐसा किया.
उन्होंने कहा, “वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव वाले एक अन्य वर्ग ने राजनीतिक कारणों से ऐसा किया है. एक समिति निर्णय लेगी कि किस पर एनएसए लगाया जाएगा और यह कोई राजनीतिक निर्णय नहीं होगा.” इससे पहले, विपक्षी एआईयूडीएफ के विधायक अमीन-उल-इस्लाम को पहलगाम हमले में पाकिस्तान और उसकी मिलीभगत का कथित रूप से बचाव करने के लिए देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. शर्मा ने 22 अप्रैल के हमले के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की शुक्रवार को चेतावनी दी थी.
असम सरकार ने स्वदेशी मुस्लिम समुदायों की जाति जनगणना के लिए कदम उठाए हैं: हिमंत विश्व शर्मा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने राज्य के स्वदेशी मुस्लिम समुदायों का दस्तावेजीकरण और उनकी पहचान करने के उद्देश्य से व्यापक जातिगत गणना कराने के लिए प्रारंभिक कदम उठाए हैं.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि असम के स्वदेशी मुस्लिम समुदाय लंबे समय से अपनी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान स्थापित करने के लिए जातिगत गणना की वकालत कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ”ब्रह्मपुत्र घाटी के गोरिया, मोरिया, देशी, सैयद और जोल्हा (जुलाहा) मुसलमानों के साथ-साथ बराक घाटी के किरेन और मैमल मुसलमानों ने लगातार कहा है कि इस्लाम उनका धर्म है, लेकिन उनके पास विशिष्ट जातीय, भाषाई और सांस्कृतिक विशेषताएं भी हैं, जो उन्हें प्रवासी-मूल या गैर-स्वदेशी मुस्लिम आबादी से स्पष्ट रूप से अलग करती हैं.” इन समुदायों ने विशिष्ट परंपराओं, बोलियों और ऐतिहासिक आख्यानों को संरक्षित किया है जो असम की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक परिदृश्य में गहराई से निहित हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए असम सरकार ने इन स्वदेशी समूहों का दस्तावेजीकरण और उन्हें अलग पहचान देने के उद्देश्य से एक व्यापक जातिगत गणना करने के लिए प्रारंभिक उपाय शुरू किए हैं.
उन्होंने कहा, ”आगामी राष्ट्रीय जनगणना में प्रस्तावित जाति गणना से उनकी दशकों पुरानी आकांक्षाएं पूरी होने की उम्मीद है, जो व्यापक धार्मिक वर्गीकरण और प्रवासी समूहों से अलग उनकी स्वतंत्र पहचान की औपचारिक मान्यता की है.” राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) ने 30 अप्रैल को निर्णय लिया था कि अगली जनगणना में जातिगत गणना को शामिल किया जाएगा.
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देश भर में जातिगत गणना की मांग कर रहे हैं और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं.