निर्वाचन आयोग ने दिलीप घोष, सुप्रिया श्रीनेत को कारण बताओ नोटिस जारी किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 27 Mar 2024 07:30 PM
निर्वाचन आयोग ने दिलीप घोष, सुप्रिया श्रीनेत को कारण बताओ नोटिस जारी किया
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नयी दिल्ली. निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत को कारण बताओ नोटिस जारी किया. रनौत को भाजपा ने आम चुनाव के लिए हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है.

निर्वाचन आयोग ने घोष और श्रीनेत की टिप्पणियों को ”अशोभनीय और गलत” बताया. आयोग ने कहा कि प्रथम दृष्टया, दोनों टिप्पणियां आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) और चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों को गरिमा बनाए रखने की सलाह का उल्लंघन हैं. निर्वाचन आयोग द्वारा 16 मार्च को लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू हो गई.
घोष और श्रीनेत को 29 मार्च की शाम तक कारण बताओ नोटिस का जवाब देने को कहा गया है.

निर्वाचन आयोग ने भाजपा की एक शिकायत के बाद श्रीनेत के खिलाफ कार्रवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर ”अशोभनीय टिप्पणियों” के साथ रनौत की एक तस्वीर पोस्ट की थी. निर्वाचन आयोग के नोटिस के अनुसार सुप्रिया ने पोस्ट किया था, ”मंडी में क्या भाव चल रहा है, कोई बताएगा?” पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता घोष को नोटिस तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा आयोग का रुख करने के बाद जारी किया गया.

आयोग के नोटिस के मुताबिक घोष ने कहा था, ”जब दीदी गोवा जाती हैं, तो वह गोवा की बेटी बन जाती हैं, त्रिपुरा में वह कहती हैं कि मैं त्रिपुरा की बेटी हूं, तय करें कि आपके पिता कौन हैं. स्पष्ट करें…” आयोग ने कहा कि सावधानीपूर्वक जांच करने पर टिप्पणी अशोभनीय, अपमानजनक और प्रथमदृष्टया एमसीसी के प्रावधानों और इस महीने की शुरुआत में जारी आयोग की सलाह का उल्लंघन करने वाली पाई गई है. आयोग ने दोनों नेताओं को एमसीसी के प्रावधान की याद दिलाई जिसमें कहा गया है कि अन्य राजनीतिक दलों की आलोचना उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पिछले रिकॉर्ड और काम तक ही सीमित रहेगी.

आयोग ने कहा, ”पार्टियों और उम्मीदवारों को निजी जीवन के उन सभी पहलुओं की आलोचना से बचना चाहिए, जो अन्य पार्टियों के नेताओं या कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं. अपुष्ट आरोपों या तोड़ मरोड़कर दिए गए बयानों के आधार पर अन्य पार्टियों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना से परहेज करना चाहिए.” राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर के संबंध में राजनीतिक दलों को जारी आयोग की सलाह में कहा गया कि अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के निजी जीवन के किसी भी पहलू, जो सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़ा न हो, की आलोचना नहीं की जानी चाहिए.

आयोग की सलाह में कहा गया, ”प्रतिद्वंद्वियों का अपमान करने के लिए निचले स्तर के निजी हमले नहीं किए जाने चाहिए. राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को ऐसे किसी भी कार्य, कार्रवाई, बयान देने से बचना चाहिए जिसे महिलाओं के सम्मान और प्रतिष्ठा के प्रतिकूल माना जा सकता है.” आयोग की सलाह में यह भी कहा गया था कि सोशल मीडिया पर प्रतिद्वंद्वियों की निंदा और अपमान करने वाली पोस्ट साझा नहीं की जानी चाहिए.

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